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High Court: 'व्यवसायीकरण के साथ ही खेलों को भी बराबर अहमियत दें', हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार
Wed, 03 Jul 2024 01:36 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 03 Jul 2024 01:36 PM IST
सार
सरकार ने खेल परिसर की जगह को नवी मुंबई से 115 किलोमीटर दूर रायगढ़ जिले के मनगांव में स्थानांतरित करने का फैसला किया। इसके खिलाफ इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स, नवी मुंबई केंद्र ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर राज्य सरकार के फैसले को चुनौती दी।
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बॉम्बे हाईकोर्ट
- फोटो : एएनआई
विस्तार
एक याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति और राष्ट्र के निर्माण में खेलों की अहम भूमिका होती है और अब वक्त आ गया है कि सराकर भी व्यवसायीकरण और कंक्रीटीकरण के साथ ही खेलों को भी बराबर अहमियत दे। हाईकोर्ट ने कहा कि एक प्रगतिशील शासन कभी भी समाज की जरूरतों से अनजान नहीं रह सकता। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसके तहत नवी मुंबई के स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स को 115 किलोमीटर दूर रायगढ़ जिले में स्थानांतरित कर दिया गया था।
क्या है मामला
साल 2003 नवी मुंबई में 20 एकड़ जमीन खेल परिसर के लिए आवंटित की गई थी। साल 2016 में नवी मुंबई के योजना प्राधिकरण सिडको ने इस खेल परिसर के एक हिस्से को एक निजी डेवलेपर को आवंटित कर दिया, जिस पर रिहायशी और व्यवसायिक निर्माण किया जाना था। सरकार ने खेल परिसर की जगह को नवी मुंबई से 115 किलोमीटर दूर रायगढ़ जिले के मनगांव में स्थानांतरित करने का फैसला किया। इसके खिलाफ इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स, नवी मुंबई केंद्र ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर राज्य सरकार के फैसले को चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने की अहम टिप्पणी
हाईकोर्ट ने जनहित याचिका के पक्ष में फैसला देते हुए सरकार के फैसले को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट की पीठ ने कहा कि प्राधिकरण को नागरिकों के वर्तमान के साथ ही भविष्य के अधिकारों के लिए भी सजग रहना चाहिए और खेल के मैदान और खेल परिसर रहने चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा कि 'हम देख सकते हैं कि मुंबई, नवी मुंबई या आसपास के क्षेत्रों जैसे महानगरों की वर्तमान दुर्दशा को देखते हुए ऐसी सार्वजनिक सुविधाओं के लिए निर्धारित भूमि पर निर्माण और वाणिज्यिक दोहन को निश्चित रूप से कम करने की जरूरत है। पीठ ने कहा कि सरकारी खेल परिसर बच्चों और युवाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण है, जो शहरी क्षेत्रों में आबादी का एक बड़ा हिस्सा हैं, और उन्हें सर्वश्रेष्ठ खेल सुविधाओं से वंचित करना पूरी तरह से सार्वजनिक हित के खिलाफ है।
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पीठ ने कहा कि 'यह सरकार और योजनाकारों पर निर्भर करता है कि वे इस बात पर भी विचार करें कि कंक्रीटीकरण को किस हद तक बढ़ाया जा सकता है, खास तौर पर भविष्य की पीढ़ी के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली बेहद जरूरी सार्वजनिक सुविधाओं जैसे पार्क, खेल के मैदान, मनोरंजन पार्क और खेल परिसरों की बलि देकर।
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क्या है मामला
साल 2003 नवी मुंबई में 20 एकड़ जमीन खेल परिसर के लिए आवंटित की गई थी। साल 2016 में नवी मुंबई के योजना प्राधिकरण सिडको ने इस खेल परिसर के एक हिस्से को एक निजी डेवलेपर को आवंटित कर दिया, जिस पर रिहायशी और व्यवसायिक निर्माण किया जाना था। सरकार ने खेल परिसर की जगह को नवी मुंबई से 115 किलोमीटर दूर रायगढ़ जिले के मनगांव में स्थानांतरित करने का फैसला किया। इसके खिलाफ इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स, नवी मुंबई केंद्र ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर राज्य सरकार के फैसले को चुनौती दी।
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हाईकोर्ट ने की अहम टिप्पणी
हाईकोर्ट ने जनहित याचिका के पक्ष में फैसला देते हुए सरकार के फैसले को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट की पीठ ने कहा कि प्राधिकरण को नागरिकों के वर्तमान के साथ ही भविष्य के अधिकारों के लिए भी सजग रहना चाहिए और खेल के मैदान और खेल परिसर रहने चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा कि 'हम देख सकते हैं कि मुंबई, नवी मुंबई या आसपास के क्षेत्रों जैसे महानगरों की वर्तमान दुर्दशा को देखते हुए ऐसी सार्वजनिक सुविधाओं के लिए निर्धारित भूमि पर निर्माण और वाणिज्यिक दोहन को निश्चित रूप से कम करने की जरूरत है। पीठ ने कहा कि सरकारी खेल परिसर बच्चों और युवाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण है, जो शहरी क्षेत्रों में आबादी का एक बड़ा हिस्सा हैं, और उन्हें सर्वश्रेष्ठ खेल सुविधाओं से वंचित करना पूरी तरह से सार्वजनिक हित के खिलाफ है।
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पीठ ने कहा कि 'यह सरकार और योजनाकारों पर निर्भर करता है कि वे इस बात पर भी विचार करें कि कंक्रीटीकरण को किस हद तक बढ़ाया जा सकता है, खास तौर पर भविष्य की पीढ़ी के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली बेहद जरूरी सार्वजनिक सुविधाओं जैसे पार्क, खेल के मैदान, मनोरंजन पार्क और खेल परिसरों की बलि देकर।