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Lok Sabha: 'आयुष्मान भारत में 70 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को शामिल करने के लिए नहीं बना पैनल', सरकार का बयान

Fri, 26 Jul 2024 03:25 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Fri, 26 Jul 2024 03:25 PM IST
सार

केंद्रीय मंत्री जाधव ने कहा कि पात्र परिवारों के सभी सदस्य चाहे उनकी आयु कुछ भी हो आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत लाभ उठा सकते हैं। हालांकि, इस योजना के तहत 70 वर्ष और उससे अधिक आयु वाले नागरिकों को स्वास्थ्य लाभ देने के लिए कोई विशेषज्ञ समिति गठित नहीं की गई है।

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Government said No panel formed for extending benefits to cover citizens above 70 under Ayushman Bharat
संसद - फोटो : ANI

विस्तार

केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने शुक्रवार को लोकसभा को बताया कि आयुष्मान भारत के तहत 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के नागरिकों को स्वास्थ्य लाभ देने के लिए कोई पैनल गठित नहीं किया गया है। बता दें कि आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा अस्पताल में भर्ती होने, भर्ती होने से पहले, उपचार और अस्पताल में भर्ती होने के बाद के खर्चों को कवर करता है।
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दरअसल, जाधव इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य दावा एक्सचेंज की शुरुआत करके आयुष्मान भारत का विस्तार करके 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के नागरिकों को कवर करने का प्रस्ताव रखा है और क्या योजना के प्रारूप को मजबूत करने के लिए कोई विशेषज्ञ पैनल गठित किया गया है।
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कुछ भी हो उम्र, उठा सकते हैं लाभ
केंद्रीय मंत्री ने लिखित उत्तर में कहा कि पात्र परिवारों के सभी सदस्य चाहे उनकी आयु कुछ भी हो आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह योजना 55 करोड़ व्यक्तियों को द्वितीयक और तृतीयक देखभाल अस्पताल में भर्ती होने के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करती है, जो 12.34 करोड़ परिवारों के बराबर है। उन्होंने कहा कि 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने के लिए कोई विशेषज्ञ समिति गठित नहीं की गई है।
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इतने अस्पताल क्लेम करने के लिए तैयार
एक अन्य सवाल के जवाब में जाधव ने कहा कि 34 बीमा कंपनियां और थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर सक्रिय हैं और करीब 300 अस्पताल नेशनल हेल्थ क्लेम एक्सचेंज (एनएचसीएक्स) पर अपने क्लेम भेजने की तैयारी कर रहे हैं। इसका उद्देश्य 21 जुलाई तक स्वास्थ्य बीमा दावा प्रसंस्करण को सुव्यवस्थित और तेज करना है। जाधव ने कहा कि सरकार ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत एनएचसीएक्स गेटवे बनाया है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य बीमा को सुव्यवस्थित करना, बीमा उद्योग में दक्षता बढ़ाना और मरीजों के अनुभव में सुधार करना है।

आयुष्मान भारत योजना या PMJAY योजना क्या है?
पीएमजेएवाई, जिसे आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के रूप में भी जाना जाता है, सबसे बड़ी स्वास्थ्य देखभाल कागज रहित योजनाओं में से एक है, जो कैशलेस चिकित्सा कवरेज प्रदान करती है। भारत सरकार द्वारा प्रायोजित यह पहल सार्वजनिक अस्पतालों और नेटवर्क निजी अस्पतालों में परिवार के आकार, लिंग या आयु से संबंधित किसी भी सीमा के बिना वंचित परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।


सुनिश्चित करेंगे...कफ सिरप की खराब गुणवत्ता जैसी घटनाएं न हों
लोकसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार सुनिश्चित करेगी कि अफ्रीका को निर्यात किए गए कफ सिरप की खराब गुणवत्ता जैसी घटनाएं दोबारा न होने पाएं। देश में दवाओं की जांच के लिए मजबूत व्यवस्था लागू है। कांग्रेस सदस्य गौरव गोगोई की उठाई गई चिंताओं पर नड्डा ने यह जवाब दिया।

मासिक धर्म अवकाश अनिवार्य करने का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं
महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने बताया कि सरकार के पास कार्यस्थलों के लिए भुगतान सहित मासिक धर्म अवकाश अनिवार्य करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

इसके अलावा स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में लिखित जवाब में कहा कि महामारियों की रोकथाम और उनके खिलाफ तैयारी साझा वैश्विक जिम्मेदारी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय भविष्य की महामारियों या सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों के खिलाफ बेहतर तैयारी के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए अपेक्षित समर्थन देता है। अनुप्रिया ने बताया कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद 150 से अधिक वायरस अनुसंधान व निदान प्रयोगशालाएं बनाई है। नागपुर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान बन रहा है।


अनुप्रिया ने बताया कि नागपुर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान बन रहा है। बीते वर्ष पूरे देश में 1,862 रोग फैले। एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम के अनुसार इसमें सबसे अधिक संख्या केरल में दर्ज की गई। केरल में लोगों को 253, कर्नाटक में 223, महाराष्ट्र में 208 और मध्य प्रदेश में 140 रोगों के प्रकोप का सामना करना पड़ा।
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