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Cough Syrup: कफ सिरप निर्यात के लिए सरकार ने जारी की गाइडलाइन, विदेश से शिकायतों के बाद सख्ती
Wed, 24 May 2023 10:43 PM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Wed, 24 May 2023 10:43 PM IST
सार
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने सोमवार को एक अधिसूचना जारी की। इसमें कहा गया है कि पहले उत्पाद के नमूने का सरकारी प्रयोगशाला में परीक्षण करवाना होगा।
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cold cough syrup
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
भारतीय फार्मास्यूटिकल फर्मों द्वारा निर्यात किए जाने वाले खांसी के सीरप को लेकर दुनियाभर में किरकिरी होने के बाद सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने विदेश में दवा भेजे जाने से पहले उसके परीक्षण कराने का आदेश दिया है। इसलिए, अब कफ सिरप निर्यातकों को विदेश भेजने के पहले अपने उत्पादों का निर्धारित सरकारी प्रयोगशालाओं में परीक्षण कराना जरूरी होगा।
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एक जून से लागू नियम
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने सोमवार को एक अधिसूचना जारी की। इसमें कहा गया है कि पहले उत्पाद के नमूने का प्रयोगशाला में परीक्षण करवाना होगा। इसके बाद ही कफ सिरप के निर्यात करने की अनुमति मिलेगी। बता दें, नया नियम एक जून से लागू हो जाएगा।
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सरकारी प्रयोगशालाओं में होगी जांच
डीजीएफटी का कहना है कि खांसी की दवा के सैंपल की जांच अनिवार्य रूप से सरकारी प्रयोगशालाओं में होगी। जांच संबंधी प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही विदेशों में नियार्त करने की अनुमति दी जाएगी। कई शहरों में स्थित क्षेत्रीय दवा परीक्षण प्रयोगशाला, कोलकत्ता के केंद्रीय दवा प्रयोगशाला और केंद्रीय दवा परीक्षण प्रयोदशालाओं में नमूनों का परीक्षण किया जाएगा। इसके अलावा राज्य सरकारों द्वारा मान्यता प्राप्त दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं में भी नमूनों की जांच की जा सकेगी।
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कई बच्चों की मौत के बाद सरकार गंभीर
गौरतलब है, सरकार ने यह कदम भारत में बने कफ सिरप की गुणवत्ता को लेकर दुनिया भर में उठे सवालों के बाद उठाया है। पिछले साल गाम्बिया और उजबेकिस्तान में क्रमशः 66 एवं 18 बच्चों की मौत हुई थी। इसके लिए भारत-निर्मित कफ सिरप को कथित तौर पर दोषी बताया गया था। वहीं, वित्त वर्ष 2021-22 में भारत से 17 अरब डॉलर के कफ सिरप निर्यात किए गए थे और यह राशि 2022-23 में बढ़कर 17.6 अरब डॉलर हो गई।
डीसीजीआई ने प्रयोगशालाओं को दिए आदेश
भारत में एक जून से निर्यात से पहले खांसी की दवाई का परीक्षण अनिवार्य कर दिया गया है, जिसके बाद भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने निर्दिष्ट राज्य प्रयोगशालाओं से कहा है कि वे विनिर्माताओं के ऐसे नमूनों की सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर जांच करें और परीक्षण जारी करें। जल्द से जल्द रिपोर्ट करें।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने सोमवार को एक अधिसूचना में कहा कि खांसी की दवाई के निर्यातकों को 1 जून से प्रभावी उत्पाद निर्यात करने से पहले एक सरकारी प्रयोगशाला द्वारा जारी विश्लेषण का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा।