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‘विदेशी’ आर्थिक सलाहकारों के साथ छोड़ने के बाद पीएमओ ने खुद संभाली देश की नीति निर्माण की कमान

Fri, 13 Jul 2018 05:08 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 13 Jul 2018 05:08 AM IST
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Government on indigenous agenda after leaving with 'foreign' economic advisors

साल 2014 में सत्ता में आने के बाद से अब तक मोदी सरकार में विभिन्न पदों पर रहे तीन ‘विदेशी’ सलाहकार साथ छोड़ चुके हैं। ऐसे में हाल के फैसलों से ऐसा लगता है कि सरकार अब अपने स्वदेशी एजेंडे की तरफ लौट रही है। रघुराम राजन, अरविंद पनगढिया और अरविंद सुब्रहमण्यन तीनों ऐसे आर्थिक विशेषज्ञ थे जिन्होंने मुक्त, वैश्विक आर्थिक नीतियों पर अमेरिका में महत्वपूर्ण रूप से काम किया था। कई सरकारी अधिकारियों, नीतिगत मुद्दों पर सलाह देने वाले और भाजपा के सदस्यों का कहना है कि अब नीति निर्माण की कमान पीएमओ ने खुद संभाल ही है।

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सरकार पार्टी और संघ की सलाह के साथ ही राष्ट्रवादी अर्थशास्त्रियों की सलाह के आधार पर फैसले कर रही है। सरकार का ध्यान मुक्त व्यापार और उदार नीतियों के बजाय घरेलू उद्योगों को संरक्षण और किसानों के हित वाली नीतियों की तरफ हो रहा है। यह ठीक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एजेंडे की तरह है, जो इन दिनों उद्योगों पर ध्यान दे रहे हैं। इस पूरे मसले पर वित्त मंत्रालय के प्रवक्ता ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। पीएमओ ने भी इससे जुड़े सवालों के जवाब नहीं दिए।
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2016 में लौटे थे रघुराम राजन
मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद बैंकों के निजीकरण की वकालत करने वाले रघुराम राजन को रिजर्व बैंक का गवर्नर बनाए रखा था। साल 2016 में उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद वह शिकागो यूनिवर्सिटी लौट गए। वहीं जीएम फसलों की वकालत करने वाले नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया भी 2017 में कोलंबिया यूनिवर्सिटी लौट गए। वे अध्ययन संबंधी अवकाश पर थे। वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ काम कर चुके मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रह्मण्यन भी अपने परिवार के साथ समय बिताने, शोध और लेखन का हवाला देकर अलविदा कह गए। 
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स्वदेशी विशेषज्ञों की सुनेगी सरकार: महाजन
स्वदेशी जागरण मंच के प्रमुख अश्विनी महाजन का कहना है कि हमें उम्मीद है कि अरविंद के जाने के बाद सरकार घरेलू विशेषज्ञों की बातों को तरजीह देगी। महाजन ने कहा कि विदेशी सलाहकारों के जाने से देश को कुछ भी नुकसान नहीं होगा।

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