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‘आजाद बलूचिस्तान’ पर सहमति दे भारत सरकार : नायला बलूच
अमर उजाला ब्यूरो/ वाराणसी
Updated Mon, 07 Nov 2016 02:02 AM IST
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नायला कादरी बलूच
- फोटो : अमर उजाला
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विश्व बलूच महिला फोरम की प्रेसिडेंट नायला कादरी बलूच चाहती हैं कि भारत सरकार ‘आजाद बलूचिस्तान’ की मांग पर अपनी सहमति दे। पाकिस्तान से खाली हाथ आजादी की लड़ाई लड़ रहे बलूचों को भारत से खासी उम्मीदें हैं। भारत के दुनिया भर में रह रहे बलूचों की मदद के लिए आगे आने से हिंदुस्तानियों और बलूचों में संवाद कायम होगा। हम नजदीक आकर यह तय कर सकेंगे कि बलूचिस्तान की निर्वासित सरकार का स्वरूप कैसा हो।
रविवार को वाराणसी में ‘अमर उजाला’ से बातचीत में नायला ने कहा कि बलूचों को भारत सरकार से हर प्रकार की मदद की उम्मीद है। लेकिन ‘आजाद बलूचिस्तान’ की मांग पर अभी तक भारत सरकार का समर्थन हमें नहीं मिला है। हालांकि यहां की सिविल सोसायटी और विभिन्न संगठनों के लोग हमारे साथ हैं। फ्री बलूचिस्तान के लिए भारत सरकार क्या कर सकती है?
उन्होंने कहा कि दुनिया के जितने देशों में भारतीय दूतावास हैं वो बलूचों को हिंदुस्तान आने और यहां बसने में मदद करें। वीजा देते समय बलूचों को पाकिस्तानी न समझा जाए। जिस तरह से पाकिस्तान से आने वाले हिंदू समुदाय के लोगों को यहां विशेष सुविधाएं और बसने सहित अन्य सहूलियतें मिली हुई हैं, वैसा ही सलूक बलूचों के भी साथ हो। बलूचिस्तान न कभी पाकिस्तान का हिस्सा था और न रहेगा।
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इंडो-बलूच फोरम गठित
रविवार को यहां आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान नायला और उनके बेटे मजदक दिलशाद कादरी की मौजूदगी में इंडो-बलूच फोरम के गठन की घोषणा की गई। फोरम बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई में बड़ी मदद करेगा। फोरम की मदद से दुनिया भर के बलूचों को एकजुट किया जाएगा। नायला ने कहा कि पाकिस्तान सरकार को जब इस फोरम का पता चलेगा तो बलूचों पर दमनात्मक कार्रवाई बढ़ेगी लेकिन हमारी लड़ाई जारी रहेगी।
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रविवार को वाराणसी में ‘अमर उजाला’ से बातचीत में नायला ने कहा कि बलूचों को भारत सरकार से हर प्रकार की मदद की उम्मीद है। लेकिन ‘आजाद बलूचिस्तान’ की मांग पर अभी तक भारत सरकार का समर्थन हमें नहीं मिला है। हालांकि यहां की सिविल सोसायटी और विभिन्न संगठनों के लोग हमारे साथ हैं। फ्री बलूचिस्तान के लिए भारत सरकार क्या कर सकती है?
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उन्होंने कहा कि दुनिया के जितने देशों में भारतीय दूतावास हैं वो बलूचों को हिंदुस्तान आने और यहां बसने में मदद करें। वीजा देते समय बलूचों को पाकिस्तानी न समझा जाए। जिस तरह से पाकिस्तान से आने वाले हिंदू समुदाय के लोगों को यहां विशेष सुविधाएं और बसने सहित अन्य सहूलियतें मिली हुई हैं, वैसा ही सलूक बलूचों के भी साथ हो। बलूचिस्तान न कभी पाकिस्तान का हिस्सा था और न रहेगा।
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इंडो-बलूच फोरम गठित
रविवार को यहां आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान नायला और उनके बेटे मजदक दिलशाद कादरी की मौजूदगी में इंडो-बलूच फोरम के गठन की घोषणा की गई। फोरम बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई में बड़ी मदद करेगा। फोरम की मदद से दुनिया भर के बलूचों को एकजुट किया जाएगा। नायला ने कहा कि पाकिस्तान सरकार को जब इस फोरम का पता चलेगा तो बलूचों पर दमनात्मक कार्रवाई बढ़ेगी लेकिन हमारी लड़ाई जारी रहेगी।