फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Government is going offensive after five rounds of fail talks with farmers

किसान आंदोलन की खबर लेने की सोच रही है केंद्र सरकार, वार्ता के पांच दौर असफल रहने के बाद रुख आक्रामक

Tue, 15 Dec 2020 06:57 PM IST
गौरव पाण्डेय जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Tue, 15 Dec 2020 06:57 PM IST
विज्ञापन
Government is going offensive after five rounds of fail talks with farmers
किसान आंदोलन - फोटो : पीटीआई (फाइल)

केंद्र सरकार की तरफ से जो बयान सामने आ रहे हैं, उन्हें देखकर नहीं लगता कि किसान आंदोलन समाप्त होने की तरफ अग्रसर है। वार्ता के पांच दौर असफल रहने के बाद अब सरकार का रुख आक्रामक है। केंद्र सरकार, किसान आंदोलन की खबर लेने की सोच रही है, यह बात किसान नेता भी समझ रहे हैं। किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार, पांच दौर की बातचीत के बाद बौखला गई है। अब ऐसे हथकंडे अपनाए जा रहे हैं कि जिससे किसानों का आंदोलन उग्र हो जाए और सरकार को बल प्रयोग करने का मौका मिल सके। 

विज्ञापन


अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के वरिष्ठ सदस्य अविक साहा भी यह बात मानते हैं कि जिस तरह के सरकारी बयान आ रहे हैं, वह आंदोलन के लिए शुभ लक्षण नहीं है। सरकार ने किसान संगठनों में फूट डालने की हर संभव कोशिश की है। अब ऐसे लोगों को किसान बनाकर कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर से मिलवाया जा रहा है, जो पहले के किसी आंदोलन में दिखाई नहीं पड़े। एक तरफ सरकार कहती है कि हम बातचीत के लिए तैयार हैं तो दूसरी ओर अपने मनचाहे संगठनों से खुद के पक्ष में बयान दिलाकर किसानों को गुमराह कर रही है। 
विज्ञापन



अविक साहा बताते हैं कि प्रधानमंत्री से लेकर केंद्रीय मंत्रियों तक कोई भी आंदोलन को लेकर सार्थक बयान नहीं दे रहा है। जब बातचीत के दौर चल रहे थे, तब भी केंद्र की तरफ से आंदोलन को भड़काने वाली बयानबाजी होती रही। अब बातचीत बंद है तो सरकार ने आंदोलन को फूट डालकर, हिंसा करा कर और किसानों को कृषि कानूनों के मुद्दे पर गुमराह करने की रणनीति बनाई है। बतौर साहा, हैरानी की बात है कि प्रधानमंत्री के उस बयान को, जो उन्होंने गुजरात में दिया है कि दिल्ली के आसपास किसानों को गुमराह किया जा रहा है, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से लेकर पार्टी के दूसरे मंत्री और पदाधिकारी उसे वायरल कर रहे हैं। ये एक स्पष्ट इशारा है कि सरकार तीनों कानूनों को आसानी से वापस नहीं लेगी। आरएसएस के लोग गांव गांव घूमने लगे हैं। वे खेतों में पहुंचकर किसानों को बरगला रहे हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यवान ने कहा, चूंकि इस आंदोलन में पंजाब और हरियाणा के किसानों की ज्यादा संख्या है तो अब उनके बीच विवाद कराने का प्रयास हो रहा है। एसवाईएल नहर का मुद्दा, जिस पर अभी कोई चर्चा नहीं चल रही थी, उसे जानबूझकर गर्माया जा रहा है। इसके पीछे केंद्र सरकार का मकसद है पंजाब और हरियाणा के किसानों को अलग अलग करना। केंद्र में भाजपा नेता जानते हैं कि एक बार इन दोनों राज्यों के किसानों के बीच में मतभेद हो गए तो उसके बाद दिल्ली की सीमा पर चले रहे किसान आंदोलन को खत्म कराने में वक्त नहीं लगेगा। सरकार ने आंदोलन में माओवादी और खालिस्तानी ताकतों के  घुसने की बात फैलाई। इसके बाद भी जब आंदोलन नहीं टूटा तो किसान संगठनों के नेताओं को अलग अलग फोन किए जाने लगे। इनमें फूट डालने के लिए केंद्र सरकार ने पूरा जोर लगा रखा है।   


किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट कहते हैं कि केंद्र सरकार का दोहरा चरित्र सामने आ गया है। एक तरफ तो सरकार कहती है कि बातचीत जारी है। दूसरी ओर भाजपा ने मंत्री किसान आंदोलन को गलत ठहरा रहे हैं। भाजपा के छोटे बड़े नेता गांवों में पहुंच कर तीनों कानूनों को जायज बताने में लगे हैं। वे किसानों से कह रहे हैं कि विपक्षी दल खासतौर पर कांग्रेस पार्टी ये सब करा रही है। वह किसानों को भड़का रही है। बतौर रामपाल, केंद्र सरकार जितना मर्जी प्रयास कर ले, आंदोलन आगे बढ़ता रहेगा। कड़ाके की ठंड में भी किसानों की संख्या बढ़ना इस बात का गवाह है कि ये आंदोलन किसी के बहकावे में आकर नहीं किया जा रहा, बल्कि अन्नदाता खुद को जीवित रखने के लिए ऐसा आंदोलन करने को मजबूर हुआ है। हमें यह नहीं समझ आता कि केंद्र सरकार किस आधार पर तीनों कानूनों को जायज ठहरा रही है। जब इन कानूनों को लाने से पहले किसी किसान से बात ही नहीं की गई तो अब सरकार बातचीत का ढोंग क्यों कर रही है। उसे बिना किसी शर्त के तीनों कानूनों को रद्द करना होगा। अगर सरकार ने आंदोलन को बल प्रयोग के द्वारा खत्म कराने का प्रयास किया तो देश के हर गांव में किसान एवं दूसरे वर्ग सड़कों पर आ जाएंगे। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed