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Monsoon Session: 2004-14 के मुकाबले बीते आठ साल में 27 गुना बढ़े ED के छापे, सरकार ने राज्यसभा में दी जानकारी
Tue, 26 Jul 2022 10:36 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Tue, 26 Jul 2022 10:36 PM IST
सार
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक लिखित उत्तर में राज्यसभा को बताया कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत पुराने मामलों में लंबित जांच को निपटाने और नए मामलों में समयबद्ध तरीके से जांच पूरी करने के लिए जांच की संख्या में वृद्धि की गई है।
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ईडी की कार्रवाई
- फोटो : ANI
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विस्तार
मोदी सरकार के 8 साल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई में तेजी आई है। मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा (Rajya Sabha) में मंगलवार को एक लिखित जवाब में सरकार ने बताया कि ईडी (ED) के छापे 2004-14 की तुलना में 2014-2022 के दौरान 27 गुना बढ़ गए हैं। गौरतलब है कि 2004-14 तक केंद्र में कांग्रेस के गठबंधन वाली यूपीए सरकार(UPA Govt) थी। सरकार ने राज्यसभा में बताया कि 2004-14 के बीच ईडी द्वारा 112 छापे की तुलना में 2014 से 2022 तक ये आंकड़ा 27 गुना बढ़कर 3,010 हो गया।
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वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक लिखित उत्तर में राज्यसभा को बताया कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत पुराने मामलों में लंबित जांच को निपटाने और नए मामलों में समयबद्ध तरीके से जांच पूरी करने के लिए जांच की संख्या में वृद्धि की गई है। उन्होंने आगे बताया कि जिन मामलों में कई आरोपी होतें हैं उनमें जांच प्रक्रिया जटिल हो जाती है। ऐसे में छापेमारी की कार्रवाइयों की संख्या में वृद्धि होती है।
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केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी के एक सवाल का जवाब देते हुए ये जानकारी दी। शिवसेना सांसद ने पूछा था कि क्या ईडी के छापे 2014 से लगभग 90 प्रतिशत बढ़ गए हैं? क्या ईडी के मामलों में छापे-शिकायत का अनुपात 2014 से काफी कम हो गया है?
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उनके इस सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पीएमएलए लागू होने के बाद पहले नौ वर्षों के दौरान कम संख्या में तलाशी (112) की गई, जिसके परिणामस्वरूप 5,346.16 करोड़ रुपये की अपराध की आय कुर्क की गई और 104 अभियोजन शिकायतें दर्ज की गईं। उन्होंने 2004-05 से 2013-14 वित्तीय वर्ष की अवधि के आंकड़े उपलब्ध कराते हुए कहा, इस अवधि के दौरान, ट्रायल कोर्ट ने किसी भी आरोपी को मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध के लिए दोषी नहीं ठहराया है। चौधरी ने इसके बाद 2014-15 और 2021-22 के बीच आठ वित्तीय वर्षों के आंकड़े उपलब्ध कराए।
उन्होंने बताया कि पुराने मामलों में लंबित जांच को निपटाने के लिए और पीएमएलए के तहत समयबद्ध तरीके से नए मामलों में जांच पूरी करने के लिए पिछले आठ वर्षों के दौरान 3,010 बार तलाशी की गई। इसके परिणामस्वरूप लगभग 99,356 करोड़ रुपये के अपराध की आय कुर्क की गई।
उन्होंने बताया कि ईडी ने 31 मार्च, 2022 तक कुल 992 मनी लॉन्ड्रिंग चार्जशीट दायर की हैं और इनमें से 23 लोगों को मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध के लिए दोषी ठहराया गया है। केवल एक मामले में अभियुक्तों को योग्यता के आधार पर छुट्टी दे दी गई है, जिसके खिलाफ माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष अपील पहले ही दायर की जा चुकी है।