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अल नीनो का खौफ: कम बारिश से खरीफ फसलों को बचाने के लिए सरकार मुस्तैद, बने निगरानी समूह

Tue, 02 Jun 2026 05:55 AM IST
राकेश कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Tue, 02 Jun 2026 05:55 AM IST
सार

अल नीनो के कारण इस साल सामान्य से कम मानसूनी बारिश के अनुमान को देखते हुए केंद्र सरकार ने खरीफ फसलों को सूखे से बचाने के लिए 'फसल मौसम निगरानी' और 'संकट प्रबंधन' समूह गठित किए हैं। राज्यों को आपातकालीन योजनाओं के साथ कम समय में पकने वाली किस्मों के बीज का 1% बफर स्टॉक रखने को कहा गया है। 
 

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government forms monitoring groups to protect kharif crops from el nino and low rainfall
खरीफ फसल (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

अल नीनो के प्रभाव से सामान्य से कम मानसूनी बारिश के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। खरीफ की फसलों के लिए जोखिमों को कम करने के लिए फसल मौसम निगरानी समूह और संकट प्रबंधन समूह गठित किए गए हैं।
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सामान्य से कम बारिश का अनुमान
साथ ही राज्य सरकारों को एक संकट प्रबंधन योजना भी भेजी है। पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रमों के संदर्भ में आयोजित अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में खाद्य और उर्वरक सुरक्षा से संबंधित चिंताओं पर चर्चा के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने यह जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा कि राज्यों को एक प्रतिशत बीज भंडार बनाए रखने के लिए कहा गया है, जिसमें अल्प और मध्यम अवधि की किस्मों पर विशेष जोर दिया गया है। इस सीजन के लिए सरकार ने पहले से ही उर्रवरकों (यूरिया और डीएपी) का भंडारण 51 फीसदी कर लिया है, जो सामान्यतौर पर 33 फीसदी रखा जाता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने हालिया पूर्वानुमान में अल नीनो के चलते इस मानसूनी सीजन में सामान्य से कम (लगभग 90 फीसदी) बारिश का अनुमान जताया है। 
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आपातकालीन योजनाएं तैयार
कृषि मंत्रालय भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) के सहयोग से जिला आपातकालीन योजनाएं तैयार कर रहा है। उर्वरक की मांग के अनुमानों को संशोधित किया है। खरीफ 2026-27 फसल वर्ष के लिए यूरिया की मांग 194 लाख टन आंकी गई है, जो 4 लाख टन कम है, जबकि डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की मांग में 6 लाख टन की कटौती करके इसे 60 लाख टन कर दिया गया है।
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उर्वरकों का भंडारण 
पश्चिम एशिया संकट के बाद घरेलू उर्वरक उत्पादन 104.81 लाख टन रहा, जिसमें 27.62 लाख टन का आयात शामिल है। उर्वरक मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा ने बताया कि इससे कुल उपलब्धता लगभग 132.43 लाख टन हो गई है।
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