{"_id":"69186590f4cd9420990f3f99","slug":"government-fixed-quota-for-sugar-exports-now-it-can-exported-15-lakh-tonne-farmers-mills-2025-11-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sugar Export: सरकार ने चीनी के निर्यात के लिए तय किया कोटा, अब इतना कर सकेंगे एक्सपोर्ट","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Sugar Export: सरकार ने चीनी के निर्यात के लिए तय किया कोटा, अब इतना कर सकेंगे एक्सपोर्ट
Sat, 15 Nov 2025 05:06 PM IST
हिमांशु चंदेल
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Sat, 15 Nov 2025 05:06 PM IST
सार
सरकार ने 2025-26 सीजन के लिए 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी है और गन्ना शीरे पर शुल्क समाप्त कर दिया है। हर मिल को पिछले तीन वर्षों के औसत उत्पादन के आधार पर कोटा मिलेगा। सभी मिलें 30 सितंबर तक निर्यात कर सकेंगी। कोटा बदला या वापस किया जा सकता है, लेकिन 31 मार्च 2026 तक ही।
विज्ञापन
चीनी
- फोटो : Freepik.com
विस्तार
सरकार ने 2025-26 सीजन के लिए 15 लाख टन चीनी निर्यात करने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही गन्ना शीरे पर लगा निर्यात शुल्क भी हटा दिया गया है, यानी अब इस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। खाद्य मंत्रालय ने बताया कि यह निर्यात कोटा सभी चालू शुगर मिलों में उनके पिछले तीन सीजनों के औसत उत्पादन के आधार पर प्रो-राटा तरीके से बांटा गया है। सरकार उम्मीद कर रही है कि इससे मिलों को स्टॉक मैनेजमेंट और आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
सरकार द्वारा शुगर मिलों को भेजे गए नोटिफिकेशन में बताया गया है कि हर मिल को उसके पिछले तीन साल के औसत उत्पादन का 5.286 प्रतिशत निर्यात कोटा दिया गया है। खाद्य मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि मिलें इस तय की गई चीनी को 30 सितंबर तक निर्यात कर सकती हैं। चाहे वे खुद निर्यात करें या किसी ट्रेडर, एक्सपोर्टर या रिफाइनरी के जरिए सभी के लिए अंतिम तारीख 30 सितंबर ही रहेगी। इसी तारीख तक बिल ऑफ़ लैडिंग जारी होना भी जरूरी होगा। हालांकि, सरकार ने यह अभी नहीं बताया है कि निर्यात की अनुमति किस दिन से लागू होगी। इस तारीख का इंतजार उद्योग जगत कर रहा है।
ये भी पढ़ें- 'आधार सिर्फ पहचान का दस्तावेज, नागरिकता का नहीं...', सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का जवाब
विज्ञापन
सरकार ने कहा है कि अगर कोई शुगर मिल अपना निर्यात कोटा इस्तेमाल नहीं करना चाहती, तो वह इसे 31 मार्च 2026 से पहले सरकार को बताकर वापस कर सकती है। ऐसे वापस किए गए कोटे को मंत्रालय बेहतर निर्यात करने वाली मिलों या उन मिलों को दे सकता है जो कोटा लेना चाहती हैं। मंत्रालय ने यह भी अनुमति दी है कि मिलें अपना निर्यात कोटा घरेलू मासिक बिक्री कोटे के साथ बदल सकती हैं चाहे आंशिक रूप से या पूरी तरह। लेकिन यह बदलाव भी 31 मार्च 2026 से पहले करना होगा। लेकिन इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि एक बार कोटा अदला-बदली होने पर उसे वापस नहीं लिया जा सकेगा।
हाल ही में आई रिपोर्ट में कहा गया था कि इस समय भारत से चीनी का निर्यात करना फायदे का सौदा नहीं माना जा रहा है। वजह यह है कि घरेलू चीनी की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार से काफी अधिक हैं, जिसके चलते निर्यातक आगे नहीं आ रहे हैं। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, दिसंबर के मध्य से मार्च के बीच निर्यात के कुछ मौके मिल सकते हैं, जब कीमतों में फर्क कम होगा और भारत से चीनी भेजना संभव लग सकता है। साथ ही, अधिक रकबा और बेहतर पैदावार की उम्मीद की वजह से उद्योग मानता है कि 2025-26 सीजन में चीनी का उत्पादन बढ़ सकता है। इसलिए वे सरकार से 20 लाख टन तक निर्यात की मंजूरी देने की मांग कर रहे हैं।
विज्ञापन
सरकार द्वारा शुगर मिलों को भेजे गए नोटिफिकेशन में बताया गया है कि हर मिल को उसके पिछले तीन साल के औसत उत्पादन का 5.286 प्रतिशत निर्यात कोटा दिया गया है। खाद्य मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि मिलें इस तय की गई चीनी को 30 सितंबर तक निर्यात कर सकती हैं। चाहे वे खुद निर्यात करें या किसी ट्रेडर, एक्सपोर्टर या रिफाइनरी के जरिए सभी के लिए अंतिम तारीख 30 सितंबर ही रहेगी। इसी तारीख तक बिल ऑफ़ लैडिंग जारी होना भी जरूरी होगा। हालांकि, सरकार ने यह अभी नहीं बताया है कि निर्यात की अनुमति किस दिन से लागू होगी। इस तारीख का इंतजार उद्योग जगत कर रहा है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- 'आधार सिर्फ पहचान का दस्तावेज, नागरिकता का नहीं...', सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का जवाब
विज्ञापन
सरकार ने कहा है कि अगर कोई शुगर मिल अपना निर्यात कोटा इस्तेमाल नहीं करना चाहती, तो वह इसे 31 मार्च 2026 से पहले सरकार को बताकर वापस कर सकती है। ऐसे वापस किए गए कोटे को मंत्रालय बेहतर निर्यात करने वाली मिलों या उन मिलों को दे सकता है जो कोटा लेना चाहती हैं। मंत्रालय ने यह भी अनुमति दी है कि मिलें अपना निर्यात कोटा घरेलू मासिक बिक्री कोटे के साथ बदल सकती हैं चाहे आंशिक रूप से या पूरी तरह। लेकिन यह बदलाव भी 31 मार्च 2026 से पहले करना होगा। लेकिन इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि एक बार कोटा अदला-बदली होने पर उसे वापस नहीं लिया जा सकेगा।
हाल ही में आई रिपोर्ट में कहा गया था कि इस समय भारत से चीनी का निर्यात करना फायदे का सौदा नहीं माना जा रहा है। वजह यह है कि घरेलू चीनी की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार से काफी अधिक हैं, जिसके चलते निर्यातक आगे नहीं आ रहे हैं। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, दिसंबर के मध्य से मार्च के बीच निर्यात के कुछ मौके मिल सकते हैं, जब कीमतों में फर्क कम होगा और भारत से चीनी भेजना संभव लग सकता है। साथ ही, अधिक रकबा और बेहतर पैदावार की उम्मीद की वजह से उद्योग मानता है कि 2025-26 सीजन में चीनी का उत्पादन बढ़ सकता है। इसलिए वे सरकार से 20 लाख टन तक निर्यात की मंजूरी देने की मांग कर रहे हैं।