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कोरोना काल में मिली छूट का फायदा उठा रहे सरकारी कर्मी, नोडल अफसर कराएंगे जिम्मेदारी का अहसास
Sat, 07 Nov 2020 05:26 PM IST
Harendra Chaudhary
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Sat, 07 Nov 2020 05:26 PM IST
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केंद्रीय सरकारी कर्मचारी (फाइल फोटो)
- फोटो : Amar Ujala
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केंद्र सरकार ने कोरोना संक्रमण के दौरान विभिन्न महकमों में कई तरह की छूट प्रदान की थी। लंबे समय तक वर्क फ्रॉम होम चलता रहा, ऐसे में अनेक अधिकारी जरूरी काम भी भूलने लगे। इन अफसरों को कई बार चेताया गया, लेकिन वे कोरोना काल की छूट का फायदा उठाने की आदत से बाज नहीं आए। कई विभागों में नई कैडर पॉलिसी लागू होनी थी, उसे भी इन अधिकारियों की सुस्ती के चलते आगे टालना पड़ा। अब केंद्र सरकार ने इन अफसरों को जिम्मेदारी का अहसास कराने के लिए नोडल अफसर तैनात किए हैं।
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विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में नई कैडर पॉलिसी को लेकर काम हो रहा है। इसके लिए कई तरह की रिपोर्ट और दस्तावेज पूरे करने होते हैं। कई कर्मियों को इधर-उधर किया जाता है। स्टाफ की कुल संख्या, वर्कलोड और तकनीकी संसाधनों की संयुक्त रिपोर्ट तैयार करनी पड़ती है। कैडर पॉलिसी में बदलाव होने से कई अधिकारियों और कर्मियों को प्रमोशन का अवसर मिल जाता है।
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कुछ अधिकारियों को मनचाही पोस्टिंग और वीआरएस का विकल्प दिया जाता है। इन सबके लिए संबंधित महकमे की विजिलेंस शाखा द्वारा क्लीयरेंस दिए जाने का प्रावधान है। सेक्शन अफसर, अंडर सेक्रेटरी और निदेशक स्तर के अधिकारियों ने सरकार के आदेशों को नहीं माना। करीब आठ माह से अधिकारी अपनी जानकारी नहीं दे रहे हैं। उनसे कहा गया कि वे डिजिटल प्लेटफार्म पर रिपोर्ट दे दें तो उस पर भी अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया।
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डीओपीटी के एक अधिकारी बताते हैं कि कुछ विभाग तो ऐसे हैं, जहां पर किसी ने भी विजिलेंस से क्लीयरेंस नहीं ली है। नतीजा, उनकी सेवा से जुड़ी फाइल आगे नहीं जा पा रही है। अब हर विभाग में अलग से नोडल अफसर तैनात किए गए हैं। ये संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जरूरी रिपोर्ट तलब करेंगे। इसके बाद उनकी फाइल पूरी कर उसे विजिलेंस शाखा के पास भेजा जाएगा। यदि कोई अफसर आनाकानी करेगा तो उसके ख़िलाफ विभागीय नियमों के तहत कार्रवाई होगी।