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ईसाइयों के लिए एएमयू व जामिया की तर्ज पर सरकार बनाए यूनिवर्सिटी
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Sun, 14 Jan 2018 01:50 AM IST
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एएमयू
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) और जामिया मिलिया इस्लामिया की तर्ज पर सरकार को ईसाइयों के सशक्तीकरण के लिए भी यूनिवर्सिटी स्थापित करनी चाहिए और उसमें इस समुदाय के शिक्षाविदों को सही प्रतिनिधित्व भी देना चाहिए। केंद्र सरकार को यह सुझाव राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने दिया है। आयोग ने वर्ष 2016-17 की अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा है कि उसके इस सुझाव पर सात साल के अंदर अमल किया जाना चाहिए।
ईसाइयों के लिए सरकारी खजाने से बनाई जाने वाले विश्वविद्यालयों के लिए शैक्षणिक नीतियों के निर्धारण में इस समुदाय के शिक्षाविदों को शामिल किया जाना चाहिए। इससे संबंधित विशेषज्ञ समितियों में भी उन्हें स्थान देना चाहिए। आयोग की इस रिपोर्ट को बजट सत्र में संसद में पेश किए जाने की संभावना है।
पढ़ें- चीन ने ईसाइयों से कहा, जीसस नहीं राष्ट्रपति शी जिनपिंग बचाएंगे आपको
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इस अनुशंसा के बारे में पूछे जाने पर आयोग के चेयरमैन सैयद गयोरूल हसन रिजवी ने कहा कि इस कदम से शिक्षा के क्षेत्र में ईसाइयों की स्थिति मजबूत होगी। एएमयू और जामिया की तरह ईसाइयों की यूनिवर्सिटी में भी अन्य समुदाय के विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाना चाहिए। आयोग ने कहा है कि सरकार को ईसाइयों के लिए कम से कम एक यूनिवर्सिटी का निर्माण पूरी तरह से अपने खजाने से करना चाहिए।
इसके लिए वह कैथोलिक बिशप कांफ्रेंस की मदद ले सकती है। याद रहे कि 2011 की जनगणना के मुताबिक सात साल से ज्यादा उम्र के बच्चों के लिए ईसाइयों की शिक्षा दर 74.34 फीसदी है। इस आयु वर्ग में सबसे ज्यादा अशिक्षित मुस्लिम समाज में है जिनकी संख्या 42.72 फीसदी है। हिंदुओं के मामले में यह 36.4, सिखों के लिए 32.49 और बौद्धों के लिए 28.17 फीसदी है।
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ईसाइयों के लिए सरकारी खजाने से बनाई जाने वाले विश्वविद्यालयों के लिए शैक्षणिक नीतियों के निर्धारण में इस समुदाय के शिक्षाविदों को शामिल किया जाना चाहिए। इससे संबंधित विशेषज्ञ समितियों में भी उन्हें स्थान देना चाहिए। आयोग की इस रिपोर्ट को बजट सत्र में संसद में पेश किए जाने की संभावना है।
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इस अनुशंसा के बारे में पूछे जाने पर आयोग के चेयरमैन सैयद गयोरूल हसन रिजवी ने कहा कि इस कदम से शिक्षा के क्षेत्र में ईसाइयों की स्थिति मजबूत होगी। एएमयू और जामिया की तरह ईसाइयों की यूनिवर्सिटी में भी अन्य समुदाय के विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाना चाहिए। आयोग ने कहा है कि सरकार को ईसाइयों के लिए कम से कम एक यूनिवर्सिटी का निर्माण पूरी तरह से अपने खजाने से करना चाहिए।
इसके लिए वह कैथोलिक बिशप कांफ्रेंस की मदद ले सकती है। याद रहे कि 2011 की जनगणना के मुताबिक सात साल से ज्यादा उम्र के बच्चों के लिए ईसाइयों की शिक्षा दर 74.34 फीसदी है। इस आयु वर्ग में सबसे ज्यादा अशिक्षित मुस्लिम समाज में है जिनकी संख्या 42.72 फीसदी है। हिंदुओं के मामले में यह 36.4, सिखों के लिए 32.49 और बौद्धों के लिए 28.17 फीसदी है।