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सरकारों के लिए शर्मनाक हैं गोरखपुर के आंकड़े, 20 देशों से ज्यादा है बाल मुत्यु दर
amarujala.com, Presented by: शाहरुख खान
Updated Mon, 14 Aug 2017 04:30 PM IST
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गोरखपुर जिले के बीआरडी कॉलेज में हुई 63 बच्चों की मौत के बाद मामला गर्माया हुआ है। लेकिन आपको यह नहीं पता कि गोरखपुर एक ऐसा जिला है जहां 3 दशकों से बच्चों की अकाल मौत हो रही हैं। यहां शिशु मृत्यु दर सबसे ज्यादा है। आंकड़े इतने चौंकाने वाले हैं, अगर गोरखपुर एक देश होता तो वह उन 20 देशों की जमात में शामिल होता जहां सबसे ज्यादा मृत्यु दर हैं।
अगर स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो गोरखपुर में पैदा हुए 1000 बच्चों में से 62 बच्चे एक साल से पहले ही मर जाते हैं। वहीं पूरे उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 48 का है। जबकि पूरे भारत में 1,000 में से 40 बच्चों की मौत हो जाती है।
वहीं सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी के यूएस के डेटा से वैश्विक स्तर पर तुलना करें तो गोरखपुर दुनिया के ऐसे 20 देशों में शामिल दिखता है जहां शिशु मृत्यु दर का आंकड़ा सबसे ज्यादा है।
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स्वास्थ्य विभाग के कार्यकर्ता बॉबी रमाकांत के अनुसार, 20 देशों में 44.5 लाख की आबादी वाला गोरखपुर शिशु मृत्यु दर के मामले में 18वें नंबर पर है। इन आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि गोरखपुर ने पश्चिमी अफ्रीका के रिपब्लिक ऑफ गाम्बिया की जगह ले ली है। इस देश की आबादी 19.18 लाख है।
वहीं गोरखपुर को टक्कर देने में 62.90 और 64.60 शिशु मृत्यु दर वाले जाम्बिया और साउथ सुडान हैं। आपको बता दें कि अफगानिस्तान इस सूची में शिशु मृत्यु दर 112 के साथ टॉप पर है।
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अगर स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो गोरखपुर में पैदा हुए 1000 बच्चों में से 62 बच्चे एक साल से पहले ही मर जाते हैं। वहीं पूरे उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 48 का है। जबकि पूरे भारत में 1,000 में से 40 बच्चों की मौत हो जाती है।
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वहीं सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी के यूएस के डेटा से वैश्विक स्तर पर तुलना करें तो गोरखपुर दुनिया के ऐसे 20 देशों में शामिल दिखता है जहां शिशु मृत्यु दर का आंकड़ा सबसे ज्यादा है।
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स्वास्थ्य विभाग के कार्यकर्ता बॉबी रमाकांत के अनुसार, 20 देशों में 44.5 लाख की आबादी वाला गोरखपुर शिशु मृत्यु दर के मामले में 18वें नंबर पर है। इन आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि गोरखपुर ने पश्चिमी अफ्रीका के रिपब्लिक ऑफ गाम्बिया की जगह ले ली है। इस देश की आबादी 19.18 लाख है।
वहीं गोरखपुर को टक्कर देने में 62.90 और 64.60 शिशु मृत्यु दर वाले जाम्बिया और साउथ सुडान हैं। आपको बता दें कि अफगानिस्तान इस सूची में शिशु मृत्यु दर 112 के साथ टॉप पर है।
बच्चे के शव को लेकर जाते परिजन
गोरखपुर में 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मौत के मामले में हालात और भी बदतर हैं। यहां यह औसत 76 का है। पूरे भारत में 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मौतों का आंकड़ा 50 है। जबकि उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 62 का है।
गौरतलब है कि गोरखपुर जिले में करीब 35 प्रतिशत बच्चे कम वजन कुपोषित के हैं और 42 प्रतिशत कमजोर बच्चे हैं। इसके अलावा टीकाकरण के मामले में भी गोरखपुर काफी पीछे है। यहां 3 में से एक बच्चे का जरूरी टीकाकरण का चक्र पूरा नहीं हो पाता है।
बच्चों के चिकित्सकों का कहना है कि कुपोषण और अधूरे टीकाकरण के कारण बच्चों में इंसेफलाइटिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर शैल अवस्थी के मुताबिक कुपोषित बच्चों के अंदर इंफेक्शन से मुकाबले की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। उन्होंने बताया कि इस कारण डायरिया और सांस के संक्रमण की बीमारी से बच्चे मर जाते हैं।
गौरतलब है कि गोरखपुर जिले में करीब 35 प्रतिशत बच्चे कम वजन कुपोषित के हैं और 42 प्रतिशत कमजोर बच्चे हैं। इसके अलावा टीकाकरण के मामले में भी गोरखपुर काफी पीछे है। यहां 3 में से एक बच्चे का जरूरी टीकाकरण का चक्र पूरा नहीं हो पाता है।
बच्चों के चिकित्सकों का कहना है कि कुपोषण और अधूरे टीकाकरण के कारण बच्चों में इंसेफलाइटिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर शैल अवस्थी के मुताबिक कुपोषित बच्चों के अंदर इंफेक्शन से मुकाबले की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। उन्होंने बताया कि इस कारण डायरिया और सांस के संक्रमण की बीमारी से बच्चे मर जाते हैं।