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नीरज के गीत को शंकर जयकिशन ने कंपोज करने से मना किया था

Fri, 20 Jul 2018 01:18 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़ Updated Fri, 20 Jul 2018 01:18 AM IST
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Gopal Das Neeraj song was forbidden by Shankar Jaikishan to compose

गोपाल दास नीरज ने फिल्मों में गीत की फ्रीवर्स शैली को जन्म दिया। इसके बाद गीतकार आनंद बक्शी ने इस शैली को आगे बढ़ाया। फ्रीवर्स शैली में नीरज ने राजकपूर की फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ के लिए गीत लिखा था। लेकिन इस गीत के लिए शंकर जयकिशन ने धुन बनाने से ही इनकार कर दिया। बाद में नीरज ने जिस शैली में गीत को गुनगुनाया, उसी शैली में गीत की धुन बनी और गीत कालजयी हो गया। यह गीत था ‘ऐ भाई जरा देख के चलो’।

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बाद में राजकपूर के कहने पर तैयार हुआ कालजयी गीत- ऐ भाई जरा देख के चलो...

इस गीत के संबंध में नीरज ने बताया था कि वह डीएस कालेज में अध्यापन कार्य करते थे। राजकपूर के बुलावे पर छह दिन की छुट्टी लेकर मुंबई गए। यहां पर राजकपूर ने ठहरने की शानदार व्यवस्था की। राजकपूर ने बताया कि वह एक फिल्म बना रहे हैं जो जोकर पर केंद्रित है। इस मीटिंग के बाद अगले चार दिन तक कोई भी गीत राजकपूर को जंचा नहीं। 
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इसके बाद मैंने कहा कि राज साहब फिल्म की केंद्रीय भूमिका में जोकर है। जोकर जो भी बात कहता है उसके दो अर्थ होते हैं। वह गंभीर बात को भी व्यंग्यात्मक तरीके से कहता है। इसलिए जब जोकर गाना गाएगा तो वह ठुमरी, क्लासिकल या कोई परिष्कृत विधा में नहीं गाएगा। वह तो जोकर है। यह बात राजकपूर को जंच गई और मैंने गीत लिखा ‘ए भाई जरा देख के चलो’। गीत सुनते ही राजकपूर खुश हो गए। जब गीत संगीतकार शंकर जयकिशन को सुनाया तो वह बोले कि यह कैसा गीत है? इसमें न तो मुखड़ा है, न अंतरा है, यह क्या है? इसके बाद राजकपूर के कहने पर मैंने अपने ही अंदाज में गीत को पढ़ना और गुनगुनाना शुरू किया। 
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शंकर जय किशन को यही धुन अच्छी लगी और गीत की धुन बनी। मन्ना डे ने इस गीत को गया। इस गीत में दर्शन है। जीवन की नश्वरता का वर्णन है। जगत के मिथ्या होने का प्रमाण है। यह जीवन और संसार की स्थिति को परिभाषित करता हुआ शानदार गीत है जो फिल्म के दार्शनिक प्रस्तुति के साथ मेल खाता है। आज भी इस गीत के लिए मुझसे कवि सम्मेलनों में मांग की जाती है। फ्रीवर्स शैली में आनंद बक्शी ने ‘अच्छा तो हम चलते हैं’ गीत लिखा था।

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