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'भगवान के देश' केरल ने ऐसे दी महामारी को मात, कायम की दूसरे राज्यों के लिए मिसाल, पढ़ें ये कहानी

Thu, 21 May 2020 03:03 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 21 May 2020 03:03 PM IST
सार

  • केरल में संक्रमण से ठीक होने की दर देश में सबसे अधिक 93.24 फीसदी है, जबकि राष्ट्रीय औसत 38.71 फीसदी है
  • केरल के लोग सदियों से गर्म पानी ही पीते हैं। वॉटर कूलर अथवा फ्रीज का पानी इस्तेमाल नहीं होता
  • केरल में महामारी का पहला केस जनवरी 2020 के दौरान वुहान से लौटे मेडिकल छात्रों में सामने आया था
  • केरल में 1.72 लाख लोगों को कोविड के लिए निगरानी में रखा गया

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'Gods own country Kerala has defeated such an epidemic, set example for others
कोरोना वायरस की जाच - फोटो : PTI (File)

विस्तार

'भगवान का अपना देश' नाम से मशहूर भारत के दक्षिणी राज्य केरल ने कोरोना को मात ही नहीं दी, बल्कि वह दूसरों के लिए भी मिसाल बन गया है। वहां की जीवन शैली में आयुर्वेद का गहरा प्रभाव और मजबूत स्वास्थ्य ढांचे के कारण कोरोना के विरुद्ध जंग में केरल का कमाल दिखाई दे रहा है।
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केरल के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) और कोविड के विरुद्ध चलाये जा रहे अभियान के ओवर ऑल इंचार्ज डॉ.विश्वास मेहता कहते हैं, विपरीत परिस्थितियों में यदि आपकी सरकार और प्रशासन की ठोस रणनीति, बेहतर सूझबूझ, सटीक पूर्वानुमान, श्रेष्ठ कार्य योजना (विशेष कर माइक्रो लेवल प्लानिंग) तथा जमीनी स्तर पर टीम की तत्परता एवं कार्य कुशलता और कुशल प्रबंधन को धरातल पर उतरा जाए तो बड़ी से बड़ी मुश्किल भी आसान हो सकती है।

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केरल सरकार इसी मूल मंत्र के साथ काम कर रही है। लॉकडाउन के पहले ही केरल की अपनाई गई इस रणनीति में लोगों की समग्र निगरानी (स्ट्रेट सर्विलांस) और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के कार्य प्रमुख तौर पर शामिल रहे।

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'Gods own country Kerala has defeated such an epidemic, set example for others
Dr. Vishwas Mehta, IAS, Additional Chief Secretary, Home, Vigilance, Housing, Coastal Shipping & Inland Navigation, Government of Kerala - फोटो : ANI (File)

केरल में ठीक होने की दर सर्वाधिक

कोरोना की लड़ाई में आज केरल प्रदेश एक मॉडल बनकर उभरा है। केरल में संक्रमण से ठीक होने की दर देश में सबसे अधिक 93.24 फीसदी है, जबकि राष्ट्रीय औसत 38.71 फीसदी है। राजस्थान के उदयपुर संभाग के डूंगरपुर नगर के मूल निवासी डॉ. विश्वास मेहता भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव एवं केरल के प्रमुख स्वास्थ्य सचिव रहते हुए स्वाइन फ्लू और इबोला जैसी बीमारियों के विरुद्ध भी सफलता पूर्वक जंग लड़ चुके हैं।

डॉ. विश्वास का कहना है कि केरल के लोग सदियों से गर्म पानी ही पीते हैं। वॉटर कूलर अथवा फ्रीज का पानी इस्तेमाल नहीं होता। यदि आपको दिल्ली में कभी केरल हाऊस में मेहमान बनने का मौका मिले तो हॉटपोट में जीरा मिला गर्म पानी का स्वाद चखने को मिल सकता है।

केरल में कोरोना के खिलाफ जंग लड़ने वाले मुख्य सूत्रधारों में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के साथ स्वास्थ्य मंत्री केके शैलाजा, मुख्य सचिव टॉम जॉस और प्रमुख स्वास्थ्य सचिव डॉ. राजन एन खोबरागड़ की टीम प्रमुख है। इनके अलावा अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधि, चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ से लेकर पंचायत स्तर के कार्यकर्ताओं के सामूहिक प्रयास व उनकी समर्पण भावना ने खूब रंग दिखाया है।

वुहान से लौटे मेडिकल छात्रों में कोरोना के लक्षण दिखे थे

भारत में कोरोना वायरस का पहला केस जनवरी 2020 के दौरान केरल राज्य में ही सामने आया था। यहां के कुछ मेडिकल छात्र कोरोना ग्रस्त वुहान शहर से स्वदेश लोटे थे। उनमें इस वायरस के पॉजिटिव लक्षण पाए गए थे।

इसकी जानकारी मिलते ही भारत सरकार एवं केरल सरकार तुरंत हरकत में आई। संक्रमित छात्रों को क्वारंटीन कर उनका इलाज शुरू किया गया। इसके परिणाम अच्छे रहे और कुछ दिनों बाद स्वस्थ होने पर उन्हें अस्पताल से छुट्टी भी मिल गई।

केरल में कोरोना से दो लोगों की मृत्यु होने के बाद तो राज्य सरकार ने कोरोना पर विजय पाने के लिए कमर ही कस ली। मुख्यमंत्री विजयन के नेतृत्व में केरल सरकार और प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए संक्रमण पर प्रभावी ढंग से नियंत्रण किया। मरने वाले लोगों की संख्या भी चार से अधिक नहीं बढ़ने दी।

कोरोना की लड़ाई के प्रमुख योद्धाओं में शामिल डॉ. विश्वास मेहता राज्य सरकार की तरफ से गठित चार आपात समूहों के कार्यों का सुपरविजन करते हुए रोज अपने 17-18 घंटे के काम की रिपोर्ट सीधे ही मुख्यमंत्री को देते हैं।

सीएम पी. विजयन के नेतृत्व में राज्य सरकार की जबरदस्त रणनीति के कारण ही आज केरल देश में एक मॉडल राज्य माना जा रहा है। केरल में 1.72 लाख लोगों को कोविड के लिए निगरानी में रखा गया।

स्वास्थ्य, पंचायत कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों ने लोगों के साथ दैनिक आधार पर व्यापक एवं सतत संपर्क किया। यह पता लगाया गया कि कोरोना का लक्षण किसी व्यक्ति को संक्रमित तो नहीं कर रहा।

इसका परिणाम यह रहा कि आज निगरानी में रखे जाने वाले लोगों की संख्या घट कर 48,825 रह गई है। ऐसा तभी संभव हो पाया, जब प्रदेश में 14 दिन के क्वारंटीन का सख्ती से पालन किया गया।

कोरोना के कुल 642 मामलों में से अब तक 497 मामलों में रोगी ठीक हो घर जा चुके हैं। केवल 80 केसों में ही इलाज कर रहे हैं। वर्तमान में 20 मई तक 48,825 व्यक्ति सर्विलान्स में हैं, जिनमें 48,287 अपने घरों में अलग थलग रखे गए हैं।

राज्य में 538 लोग अस्पतालों के आइसोलेशन वार्ड में है। इनमें 122 लोग ईलाज के लिए भर्ती है। 42,201 नमूनों की जांच में 40,639 सेंपल नेगेटिव पाए गए हैं।

केरल में कोरोना को हराने के लिए ये सब किया गया

  • केरल में 60 वर्ष से ऊपर की उम्र के 42 लाख लोग हैं। सरकार और लोगों की जागरूकता के कारण केवल चार लोगों की मौत हुई है।
  • कोविड नियंत्रण, देखरेख व समीक्षा के लिए चार नियंत्रण कक्ष 24 घंटे कार्य करते रहे
  • स्वास्थ्य, श्रम, आपदा प्रबंधन और चिकित्सा उपकरणों तथा खाद्य एवं रसद आपूर्ति की निगरानी व अंतरराज्यीय मुद्दों के लिए अलग अलग नियंत्रण कक्ष बनाए गए 
  • मुख्य सचिव प्रतिदिन दोपहर 12 बजे बैठक कर रणनीति पर चर्चा करते हैं
  • सीएम शाम 4 बजे सभी प्रभारी अधिकारियों से मिल कर काम का फीडबैक लेते हैं
  • हर दिन स्वास्थ्य विभाग की तरफ से पावर प्वाइंट प्रस्तुतियां दी जाती हैं; इसके बाद शाम 6 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाती है।
  • ये संकल्प लिया गया कि कोरोना के विरुद्ध जंग के समाप्त होने तक राज्य में कोई भी चैन से नहीं बैठेगा और अन्य विपदाओं की तरह इस पर भी राज्य को अवश्य ही विजय मिलेगी।
  • कोरोना से की जा रही जंग में यहां दुनिया की सबसे कम मृत्यु दर होना, जनसंख्या घनत्व के आधार पर भारत में सबसे अधिक कोविड परीक्षण, कोविड परीक्षण कियोस्क स्थापित करने वाला भारत का पहला राज्य 
  • भारत में प्लाज्मा थेरेपी आजमाने में प्रथम, हर जिले में कम से कम दो विशेष कोविड अस्पताल बनाने और केरल महामारी रोग अधिनियम महामारी नियंत्रण पर कानून बनाने वाला भारत का पहला राज्य बना 
  • टेली मेडिसिन शुरू करने वाला पहला राज्य बना, बिना भोजन के कोई नहीं, पूरे राज्य में 1400 से अधिक सामुदायिक रसोई शुरू हुई 
  • भारत में प्रवासी श्रम शिविरों की सबसे अधिक संख्या (5500 से भी अधिक)
  • भारत में 22567 में से 15541 कोविड कैंप और शेल्टर केरल में 24 घंटे के भीतर युद्धस्तर पर 300 डॉक्टरों और 400 स्वास्थ्य निरीक्षकों की नियुक्ति करने वाला पहला राज्य। 
  • 20 हजार करोड़ रुपये की वित्तीय मदद के प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा करने वाला पहला राज्य।
  • एपीएल / बीपीएल में किसी भी भेदभाव के बिना एक महीना मुफ्त भोजन प्रदान करने वाला पहला राज्य।
  • कोरोना वायरस चेन को तोड़ो अभियान - भारत में पहली बार हाथ धोने, स्वच्छता और सामाजिक दूरी के नियम की पालना करवाने वाला पहला राज्य।
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