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परिकर के निधन के बाद मुश्किल में भाजपा, सीएम की रेस में सबसे आगे प्रमोद सावंत

Mon, 18 Mar 2019 10:35 AM IST
अजय सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी Published by: अजय सिंह Updated Mon, 18 Mar 2019 10:35 AM IST
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Goa Government: no party has sufficient number, governor will have to take final call
मनोहर परिकर - फोटो : Facebook

गोवा में मनोहर परिकर के निधन के बाद राजनीतिक संकट शुरू हो गया है। अभी नई सरकार बनने में समय है। वहीं भाजपा जहां अपनी सरकार बचाने में जुटी हुई है वहीं कांग्रेस ने 48 घंटों के अंदर दूसरी बार राज्यपाल को पत्र लिखकर सरकार बनाने का दावा पेश किया है। देर रात केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी राज्य पहुंचे और विधायकों के साथ बैठक की। भाजपा नेता विश्वजीत राणे और एमजीपी नेता सुदीन धवलीकर बैठक में शामिल हुए। ऐसी खबर है कि इन्होंने मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जताई है। तीसरे उम्मीदवार प्रमोद सावंत बैठक में मौजूद नहीं थे। हालांकि, गोवा विधानसभा के स्पीकर प्रमोद सावंत मुख्यमंत्री बनाए जाने की दौड़ में सबसे आगे नजर आ रहे हैं। धवलीकर ने कहा कि नेतृत्व के मुद्दे पर दोपहर तीन बजे तक तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

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कौन हैं प्रमोद सावंत

सूत्र बता रहे हैं कि इन सब के बीच गोवा विधानसभा के स्पीकर प्रमोद सावंत मुख्यमंत्री बनाए जाने की दौड़ में सबसे आगे नजर आ रहे हैं। इस बारे में अंतिम फैसला एक-दो दिन में कर लिया जाएगा।

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प्रमोद सावंत दो बार विधायक बन चुके हैं, इससे पहले वे भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष भी थे। हालांकि पार्टी के भीतर ही प्रमोद सावंत को विरोध का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि कहा जाता है कि वो अभी बहुत नए हैं। उनके अलावा श्रीपद नाइक भी एक नाम हैं जो मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल हैं। जो इस वक्त केंद्र सरकार में आयुष मंत्री हैं। उन्हें वापस बुलाकर राज्य की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
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कांग्रेस में इस बात को लेकर आशंका है कि भाजपा राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करवा सकती है। वहीं भाजपा खेमे में यह चर्चा है कि विधानसभा अध्यक्ष प्रमोद सावंत को अतंरिम मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। जिससे कि पार्टी को आगे की रणनीति बनाने का मौका मिल जाए। दोनों पार्टियों के सूत्रों का कहना है कि यदि राज्यपाल मृदुला सिन्हा संख्या से संतुष्ट नहीं होती हैं तो वह लोकसभा चुनाव तक विधानसभा को निलंबित करने की सिफारिश कर सकती हैं। 

किसी के पास नहीं है बहुमत

राज्य में मौजूद विधायकों की वर्तमान संख्या फिलहाल किसी पार्टी के पक्ष में नहीं है। वहीं इस समय किसी भी पार्टी ने मुख्यमंत्री उम्मीदवार का चुनाव नहीं किया है जो सदन में बहुमत साबित कर सके। राज्य में विधानसभा की 36 सीटे हैं। परिकर और फ्रांसिस डिसूजा के निधन से भाजपा की दो सीटें कम हो गई हैं। वहीं कांग्रेस के दो विधायक इस्तीफा दे चुके हैं। इस समय 14 विधायकों के साथ कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है। 

महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी और गोवा फॉरवर्ड पार्टी के पास तीन-तीन विधायक हैं। एनसीपी के पास एक और निर्दलीय विधायकों के पास तीन सीटें हैं। भाजपा के पास राज्य की 12 सीटे हैं। जिसमें से एक पांडुरंग मडकईकर अस्पताल में हैं और इस बात की बहुत कम आशंका है कि वह विधानसभा में वोट करने के लिए आएंगे। यही कारण है कि कांग्रेस बोल रही है कि उसके पास 14 विधायक हैं जबकि भाजपा के पास 11 हैं। इसलिए उसे सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए। 

भाजपा से नहीं मिला मुख्यमंत्री का ऑफर

रिपोर्ट के मुताबिक कहा जा रहा था कि भाजपा गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस विधायक दिगंबर कामत को मुख्यमंत्री पद की पेशकश कर रही है। इसपर कामत का बयान आया है। उन्होंने रविवार को कहा कि उन्हें भाजपा से गोवा का मुख्यमंत्री बनने का कोई ऑफर नहीं मिला है।

कामत ने कहा, "दिल्ली का मेरा कार्यक्रम 2-3 दिन पहले बन गया था। किसी से मिलने का सवाल ही नहीं उठता। मैं दिल्ली अपने निजी काम के लिए गया था। इस तरह की खबरों को अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए बनाया गया है। मुझे भाजपा से कोई पेशकश नहीं मिली है। यदि मेरी किस्मत में गोवा का मुख्यमंत्री बनना लिखा होगा तो कोई मुझे उससे रोक नहीं सकता है।"

मुख्यमंत्री पर नहीं बनी सहमति

कांग्रेस और भाजपा ने देर रात अपने विधायक दल की बैठक बुलाई ताकि मुख्यमंत्री उम्मीदवार का चयन हो सके, लेकिन दोनों ही पार्टियों में आम सहमति नहीं बन पाई है। केंद्रीय मंत्री गडकरी ने गोवा फॉरवर्ड पार्टी के नेता विजय सरदेसाई के आवास पर विधायकों के साथ बैठक की। बैठक के बाद सरदेसाई ने कहा कि उन्होंने परिकर को अपना समर्थन दिया था न कि भाजपा को। अब जब परिकर नहीं हैं तो उनके पास विकल्प खुले हुए हैं। उनका कहना है कि वह राज्य में स्थिरता चाहते हैं। वह नहीं चाहते कि राज्यपाल सदन को भंग कर दें। 

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