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पड़ोसी देशों में उत्पीड़ित अल्पसंख्यक को नागरिकता देना देश का कर्तव्य : राम माधव

Sun, 08 Dec 2019 09:36 PM IST
Mohit Mudgal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Mohit Mudgal Updated Sun, 08 Dec 2019 09:36 PM IST
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giving citizenship to minority Victims of division in neighboring countries is our duty: Ram Madhav
राम माधव

भाजपा महासचिव राम माधव ने पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर मुस्लिम शरणार्थियों के लिए लाए जा रहे नागरिकता संशोधन बिल का बचाव किया। उन्होंने रविवार को कहा कि इन पड़ोसी मुल्कों में सताए गए अल्पसंख्यकों को नागरिका देना भारत का कर्तव्य है क्योंकि वे धर्म के आधार पर देश के विभाजन के फैसले के पीड़ित हैं।

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बिल की विपक्षी दलों द्वारा तीव्र आलोचना पर उन्होंने कहा कि इसी तरह का आव्रजक (असम से निर्वासन) अधिनियम 1950 में जवाहर लाल नेहरू की तत्कालीन सरकार ने बनाया था। नेहरू सरकार ने अवैध प्रवासियों खासतौर पर पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से आए लोगों को निर्वासित करने के लिए 1950 में इसी तरह का कानून बनाया था और उसमें साफ तौर पर कहा गया था कि पूर्वी पाकिस्तान से आने वाले अल्पसंख्यक इसके दायरे में नहीं आएंगे।
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उन्होंने कहा कि देश ने उत्पीड़न के शिकार अल्पसंख्यकों के लिए अपने दरवाजे हमेशा खुले रखे हैं। पड़ोसी देशों के सताए गए अल्पसंख्यक जिन्हें विधेयक में नागरिकता देने का प्रस्ताव है, वे देश को धार्मिक आधार पर बांटने के ऐतिहासिक फैसले के शिकार हैं और यह भारत का कर्तव्य है कि वह इन अल्पसंख्यकों को नागरिकता का अधिकार दे। पूर्वोत्तर के राज्यों में भाजपा के रणनीतिकार माधव ने कहा कि सरकार और गृहमंत्री अमित शाह ने क्षेत्र के लोगों की आशंकाओं को दूर करने के लिए विभिन्न लोगों से गहन चर्चा की है।
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सरकार बिल के मद्देनजर जनसांख्यिकी, भाषा और संस्कृति में बदलाव सहित राज्यों की सभी आशंकाओं का समाधान करेगी। सांसदों को दी गई नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2019 की प्रति के मुताबिक, यह कानून परमिट क्षेत्र (आईएलपी) और जनजातीय क्षेत्रों में लागू नहीं होगा जहां पर संविधान की छठी अनुसूची के तहत शासन होता है। इसलिए यह कानून असम, मेघालय और त्रिपुरा के आदिवासी इलाकों और अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मिजोरम के आईएलपी इलाकों में लागू नहीं होगा।

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