गीता गोपीनाथ के पिता बोले, अब दिल खोलकर बेटी की कामयाबी की खुशियां मना सकूंगा
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने भारतीय मूल की अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ को मुख्य अर्थशास्त्री नियुक्त किया है। गीता इस वक्त हार्वर्ड विवि में इंटरनेशनल स्टडीज ऑफ इकोनॉमिक्स में प्रोफेसर हैं। उन्होंने इंटरनेशनल फाइनेंस और मैक्रोइकोनॉमिक्स में रिसर्च की है। आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के बाद गीता दूसरी भारतीय हैं, जबकि पहली भारतीय महिला हैं जब किसी भारतीय को इस पद की जिम्मेदारी दी गई है।
गीता गोपीनाथ के बारे में जानकारी
1971 में केरल में कन्नौर के मलयाली परिवार में जन्म हुआ, पिता टीवी गोपीनाथ पेशे से किसान हैं, गीता का विवाह इकबाल धालीवाल से हुआ है।
गीता के पिता टी.वी. गोपीनाथ पेशे से किसान हैं और बेटी की इस उपलब्धि से बेहद खुश हैं। गोपीनाथ ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इतने हफ्ते इस खबर को सबसे छिपाए रखा, अब जमकर जश्न मनाऊंगा। आईएमएफ में बेटी के मुख्य अर्थशास्त्री नियुक्त होने पर गोपीनाथ बताते हैं कि 14 सितंबर को गीता परिवार से मिलने बेंगलुरु आई थी, उसी दिन उसे आईएमएफ चीफ का कॉल आया।
आईएमएफ चीफ ने बेटी को बताया कि उसका नाम प्रतिष्ठित पोस्ट के लिए फाइनल किया गया है। गीता के पिता गोपीनाथ कहते हैं कि बेटी ने तुरंत ये बात मुझे बताई, लेकिन कहा कि ऑफिशियल अनाउंसमेंट होने तक इसे गुप्त रखा जाए। वह आगे कहते हैं कि मैंने 16 दिन तक इस खबर को सबसे छिपाए रखा, अब दिल खोलकर बेटी की कामयाबी की खुशियां मना सकूंगा।
गीता के पति इकबाल धालीवाल भी इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएट हैं और 1995 बैच के आईएएस टॉपर थे। इकबाल आईएएस की नौकरी छोड़ प्रिंसटन पढ़ने चले गए थे। गीता अपने पति और एक बेटे से साथ कैम्ब्रिज में रहती हैं।
हार्वर्ड की तीसरी महिला प्रोफेसर
गीता हार्वर्ड के इतिहास की तीसरी ऐसी महिला प्रोफेसर हैं जो इस पद पर रहने के दौरान आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री बनी हैं। इससे पहले भारतवंशी और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन भी इस पद पर रहते हुए आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री बने थे।
40 से ज्यादा शोध पत्र लिख चुकी हैं गीता गोपीनाथ
गीता साल 2001 से 2005 तक शिकागो यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर थीं। इसके बाद साल 2005 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर उनकी नियुक्ति हुई। साल 2010 में गीता इसी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बनीं और फिर 2015 में वे इंटरनेशनल स्टडीज ऑफ इकोनॉमिक्स की प्रोफेसर बन गईं। गोपीनाथ 40 से ज्यादा शोध पत्र लिख चुकी हैं, इनमें विनिमय दरें, व्यापार और निवेश, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट, मौद्रिक नीति, कर्ज और और उभरते बाजारों के संकट पर आधारित शोध शामिल हैं।
गीता ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन से एमए की डिग्री हासिल की है। उसके बाद उन्होंने अर्थशास्त्र में पीएचडी की डिग्री प्रिंसटन विश्विद्यालय से 2001 में प्राप्त की। इसके बाद उसी साल उन्होंने शिकागो विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर काम शुरू कर दिया, वर्ष 2005 से वह हार्वर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ा रही हैं।
आईएमएफ के एक बयान के अनुसार गोपीनाथ मारीस ओब्स्टफील्ड का स्थान लेंगी। ओब्स्टफील्ड 2018 के अंत में सेवानिवृत्त होंगे। आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टीन लेगार्ड ने कहा कि गोपीनाथ दुनिया की बेहतरीन अर्थशास्त्रियों में से एक हैं, उनके पास उम्दा शैक्षणिक योग्यता के साथ व्यापक अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी है।