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सोमनाथ के पास अतिक्रमण: गुजरात सरकार ने SC में दिया जवाब, प्रतिक्रिया के लिए याचिकाकर्ताओं को चार हफ्ते का समय

Mon, 02 Dec 2024 05:49 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Mon, 02 Dec 2024 05:49 PM IST
सार

28 सितंबर को गुजरात में एक अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया था, जिसका उद्देश्य सोमनाथ मंदिर के पास सरकारी भूमि पर अतिक्रमण को हटाना था। इस मामले में सोमवार की सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी ने कहा कि राज्य ने एक जवाबी हलफनामा दाखिल किया है और याचिकाकर्ता एक प्रत्युत्तर दाखिल करना चाहते हैं।

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Gir Somnath demolition: SC grants four weeks to petitioners to respond to Gujarat's stand
Supreme Court - फोटो : PTI

विस्तार

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को गुजरात सरकार की तरफ से गिर सोमनाथ जिले में तोड़फोड़ अभियान के मामले में हलफनामा दायर करने के बाद याचिकाकर्ताओं को अपना पक्ष रखने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। मामले में न्यायमूर्ति बीआर गवई और केवी विश्वनाथन की पीठ चार अलग-अलग याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी, जिनमें गुजरात सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका भी शामिल थी, जिसमें आरोप था कि सरकार ने बिना सुप्रीम कोर्ट की पूर्व अनुमति के आवासीय और धार्मिक संरचनाओं को अवैध रूप से ध्वस्त किया।
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28 सितंबर को सोमनाथ मंदिर के पास चला अभियान
28 सितंबर को गुजरात में एक अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया था, जिसका उद्देश्य सोमनाथ मंदिर के पास सरकारी भूमि पर अतिक्रमण को हटाना था। इस मामले में सोमवार की सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी ने कहा कि राज्य ने एक जवाबी हलफनामा दाखिल किया है और याचिकाकर्ता एक प्रत्युत्तर दाखिल करना चाहते हैं।
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मामले में अब छह सप्ताह बाद फिर से होगी सुनवाई
वहीं राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुझाव दिया कि सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका गुजरात उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश के खिलाफ है, जो अतिक्रमण हटाने को चुनौती देने वाली एक याचिका में दिया गया था। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को उच्च न्यायालय से निपटने के लिए कहे, ताकि कोर्ट के पास तथ्यात्मक निर्णय हो सके। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि राज्य ने सर्वोच्च न्यायालय में हर बिंदु पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। इस पर अहमदी ने प्रत्युत्तर दाखिल करने की अनुमति मांगी, जिस पर पीठ ने कहा, याचिकाकर्ताओं को चार सप्ताह का समय दिया जाता है कि वे सभी मामलों में प्रत्युत्तर दाखिल करें। छह सप्ताह बाद फिर से सुनवाई होगी।
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गुजरात सरकार ने कार्रवाई को बताया सही
गुजरात सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल अपने हलफनामे में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को उचित ठहराया और कहा कि यह सरकारी भूमि पर अतिक्रमण हटाने का एक सतत अभियान था। 17 सितंबर को, सुप्रीम कोर्ट ने अलग-अलग याचिकाओं की सुनवाई करते हुए आदेश दिया था कि बिना इसकी पूर्व अनुमति के किसी भी संपत्ति को नहीं ढहाया जाएगा, और यह भी कहा था कि संविधान के 'आदर्शों' के खिलाफ एक भी अवैध तोड़फोड़ नहीं होना चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि उसका आदेश उन संरचनाओं पर लागू नहीं होगा जो सार्वजनिक सड़कों, फुटपाथों, रेलवे लाइनों या सार्वजनिक स्थानों जैसे जल निकायों पर स्थित हैं।


सार्वजनिक और सरकारी भूमि पर नहीं लगेगी रोक
गुजरात सरकार के गिर सोमनाथ जिला कलेक्टर की तरफ से दाखिल किए गए हलफनामे में यह बताया गया कि 17 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा था कि अतिक्रमण पर रोक सार्वजनिक स्थानों और सरकारी भूमि पर लागू नहीं होगी। इसके बाद, 13 नवंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने एक आदेश दिया, जिसमें कहा गया कि बिना पूर्व शो-कॉज नोटिस के कोई संपत्ति नहीं ध्वस्त की जानी चाहिए, और प्रभावित पक्षों को जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया जाना चाहिए।
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