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जम्मू-कश्मीर: गुलाम नबी आजाद ने कहा- उम्मीद है सरकार चुनाव से पहले पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग खारिज नहीं करेगी

Mon, 28 Jun 2021 04:19 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Mon, 28 Jun 2021 04:19 AM IST
सार

  • नेता गुलाम नबी आजाद ने बैठक में साफ कहा कि जम्मू-कश्मीर के केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा किसी को भी स्वीकार्य नहीं है। हमारी राय बिलकुल स्पष्ट है। हम केवल यह चाहते हैं कि पहले पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल हो और उसके बाद चुनाव कराए जाएं।

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Ghulam Nabi Azad says hope the government will not reject the demand for full statehood to Jammu and Kashmir before the elections
गुलाम नबी आजाद - फोटो : पीटीआई

विस्तार

वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने रविवार को उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार विधानसभा चुनाव से पहले जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की राजनीतिक दलों की मांग को खारिज नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि पूर्व राज्य के केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा किसी को भी ‘स्वीकार्य’ नहीं होगा।

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 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जम्मू-कश्मीर पर हुई सर्वदलीय बैठक में आजाद भी शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि संवाद प्रक्रिया को शुरुआत करार दिया और कहा कि यह केंद्र की जिम्मेदारी है कि वह वहां पर विश्वास और भरोसा पैदा करे। उन्होंने कहा कि बैठक की खास बात यह थी कि सभी को खुलकर बोलने को कहा गया। डन्हें लगता है कि सभी नेताओं ने बहुत ही खुलकर बात की और सबसे महत्वपूर्ण चीज यह थी कि किसी को लेकर कोई दुर्भावना नहीं थी।
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72 वर्षीय नेता ने कहा कि उन्होंने बैठक में साफ कहा कि जम्मू-कश्मीर के केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा किसी को भी स्वीकार्य नहीं है। हमारी राय बिलकुल स्पष्ट है। हम केवल यह चाहते हैं कि पहले पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल हो और उसके बाद चुनाव कराए जाएं। हालांकि केंद्र ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी लेकिन सभी राजनीतिक दलों का संयुक्त रूप से मानना है कि पहले पूर्ण राज्य का दर्जा मंजूर किया जाए और इसके बाद चुनाव हों। पूर्ण राज्य की बहाली पर केंद्र के तैयार होने की संभावना पर उन्होंने कहा कि वह आशावान हैं क्योंकि केंद्र ने मना नहीं किया है। 
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अनुच्छेद 370 को खत्म करने पर कांग्रेस के रुख पर उन्होंने कहा कि 5 अगस्त 2019 को दो चीजें हुई, एक राज्य का दर्जा घटाकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभक्त कर दिया गया और अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया गया। अनुच्छेद 370 का मामला सुप्रीम कोर्ट में है।

इस पर हम सार्वजनिक रूप से कुछ भी नहीं कहना चाहते हैं। पूर्ण राज्य का दर्जा का मामला सुप्रीम कोर्ट के सक्षम नहीं है और इसलिए हम इसकी मांग कर रहे हैं। पीएम के दिल की दूरी कम करने पर उन्होंने कहा कि केंद्र को तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। इसमें वक्त लगेगा लेकिन उसे शुरुआत करनी चाहिए।


केंद्र को सभी राजनीतिक दलों के साथ एकसमान व्यवहार करना चाहिए। दूसरा जम्मूू व कश्मीर के कारोबारियों को राहत उपलब्ध कराई जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने बैठक में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास पर भी जोर दिया था और कहा था कि सभी राजनीतिक दलों को इस मकसद को पूरा करने के लिए आगे आना चाहिए। 1990 में आतंकवाद के उफान पर होने के दौरान करीब 60000 से अधिक कश्मीरी पंडितों के परिवारों ने घाटी से पलायन किया था और जम्मू, दिल्ली समेत देश के अन्य हिस्सों में शरण ली।

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