ग्रीन इकोनॉमी का हिस्सा बनने के लिए हो जाइए तैयार, तेजी से बदलेंगी रोजगार की प्राथमिकताएं
- दुनिया को प्रदूषण से बचाने के लिए ऊर्जा के नए मॉडल अपनाने पर दिया जा रहा जोर
- कार्य संस्कृति में बदलाव के जरिए ग्रीन इकॉनॉमी विकसित करने पर काम करेगी सरकार
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विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि वायु प्रदूषण के कारण प्रति वर्ष दुनिया में कम से कम 42 लाख लोगों की जान चली जाती है। लेकिन इसके बाद भी दुनिया की सरकारें कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रति बहुत सकारात्मक नहीं रहतीं। उन्हें डर होता है कि अगर वे कार्बन उत्सर्जन कम करने की कोशिश करती हैं और इसके लिए कोयले-तेल की बजाय ऊर्जा के दूसरे स्रोतों को अपनाती हैं तो इससे उनकी जीडीपी और विकास दर पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि वायु प्रदूषण के कारण दुनिया की जीडीपी में ज्यादा गिरावट आ रही है। अगर सरकारें 'ग्रीन इकॉनॉमी' को अपनाने की कोशिश करें तो इससे न सिर्फ विकास दर को बनाए रखा जा सकेगा, बल्कि दुनिया को रहने के लिए ज्यादा बेहतर वातावरण भी दिया जा सकेगा।
स्वस्थ नागरिक मजबूत करते हैं देश की अर्थव्यवस्था
दिल्ली डायलॉग कमीशन के चेयरमैन जैस्मीन शाह मंगलवार को वैश्विक फोरम 'रेस टू जीरो एमिशन' पर ग्रीन इकोनॉमी पर दिल्ली सरकार का पक्ष रखेंगे। जैस्मिन शाह ने अमर उजाला को बताया कि अभी तक विश्व की सरकारों की सोच हुआ करती थी कि अगर वे कार्बन उत्सर्जन कम करने की तरफ आगे बढ़ती हैं तो इससे उनकी आर्थिक स्थिति में गिरावट हो सकती है।
लेकिन आधुनिक रिसर्च से यह बात साबित हो गई है कि ग्रीन इकोनोमी विकास दर के साथ-साथ लोगों का स्वास्थ्य भी बनाए रखती है। अगर नागरिक स्वस्थ और कार्यशील बने रहते हैं तो इससे अंततः देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। इसलिए समय की मांग है कि अब सभी सरकारें सकारात्मक तरीके से ग्रीन इकॉनॉमी को अपनाने के लिए आगे बढ़ें।
जैस्मिन शाह ने कहा कि प्रदूषण से मुक्ति के लिए सरकारों में इच्छाशक्ति होनी चाहिए। इसके लिए जरूरी ढांचा विकसित करना चाहिए। दिल्ली सरकार का लक्ष्य है कि कम से कम 25 फीसदी इलेक्ट्रिक गाड़ियां का रजिस्ट्रेशन हो। इसके लिए जगह-जगह पर चार्जिंग स्टेशन विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। अगर सभी सरकारें इसी प्रकार का लक्ष्य तय करें तो आने वाले समय में वाहन जनित प्रदूषण को बहुत हद तक कम किया जा सकता है।
नवंबर-दिसंबर में दिल्ली में प्रदूषण का एक बड़ा कारण पराली है। दिल्ली सरकार ने पूसा के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर पराली को नष्ट करने का एक सकारात्मक उपाय खोज लिया है। अगर आसपास की सरकारें भी इसे अपनाने का प्रयास करें तो पराली के प्रदूषण का स्थाई समाधान मिल सकता है।
आने वाले समय में ग्रीन इकोनोमी देश-दुनिया की अपरिहार्य आवश्यकता बन सकती है और इसके लिए नीतियों में भारी बदलाव की आवश्यकता होगी। इसके लिए अभी से लक्ष्य तय कर आवश्यक ढांचा विकसित करने पर जोर दिया जाना चाहिए। इससे नई नौकरियों का सृजन भी होगा और विकास की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
रेस टू जीरो एमिशन को मिशन बनाने की कोशिश
वर्ष 2020 पूरी दुनिया के लिए कड़े संघर्ष वाला साल साबित हुआ है। लेकिन इस बेहद कठिन वर्ष में भी पर्यावरणवादियों का प्रयास है कि दुनिया को शून्य कार्बन उत्सर्जन के लिए प्रेरित किया जा सके। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर पूरी दुनिया के बड़े शहरों की सरकारों, उद्योगपतियों, वैज्ञानिकों को इस बात के लिए प्रेरित किया जा रहा है कि वे इस तरह के विकास कार्य करें, जिसमें कार्बन का उत्सर्जन न के बराबर हो और दुनिया को आने वाली पीढ़ी के लिए प्रदूषण की दृष्टि से कम खतरनाक बनाया जा सके।