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General Naravane: 'भारत की एकता को संविधान ने जोड़ा', पूर्व सेना प्रमुख बोले- बांटने की ताक में बैठे दुश्मन

Mon, 18 Aug 2025 07:35 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: हिमांशु चंदेल Updated Mon, 18 Aug 2025 07:35 PM IST
सार

पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने कहा कि भारत की असली ताकत उसका संविधान है, जिसने देश को एकजुट किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि दुश्मन ताकतें धर्म और जाति के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश करेंगी। राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना तक सीमित नहीं, बल्कि खाद्य, ऊर्जा और स्वास्थ्य से जुड़ी है।

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General Naravane former Army Chief Says Constitution strengthened unity of India enemies waiting to divide us
पूर्व सेना प्रमुख नरवणे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (सेवानिवृत्त) ने सोमवार को कहा कि भारत अपनी मूल संवैधानिक मूल्यों और साझा पहचान से एकजुट है, लेकिन दुश्मन ताकतें और स्वार्थी हित समाज को धर्म और जाति के आधार पर बांटने की कोशिश करेंगे। वह अपनी किताब ‘कैंटोनमेंट कॉन्सपिरेसीज’ के विमोचन के मौके पर बोल रहे थे। नरवणे ने कहा कि नागरिकों को ऐसी साजिशों को समझना होगा और एकजुट रहना होगा।
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जनरल नरवणे ने कहा कि संविधान ही भारत को एक साथ जोड़े हुए है और यही देश को आगे बढ़ा रहा है। इसमें न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व जैसे मूल मूल्य शामिल हैं, जो भारत की पहचान और मजबूती का आधार हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर इन चार मूल्यों को बढ़ावा दिया जाए तो देश को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता और भारत हमेशा मजबूत और एकजुट रहेगा।
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अंदरूनी खतरे ज्यादा खतरनाक
पूर्व सेनाध्यक्ष ने कहा कि राष्ट्र बाहरी और भीतरी दोनों तरह की चुनौतियों का सामना करता है। लेकिन आंतरिक खतरे ज्यादा गंभीर होते हैं क्योंकि वे समाज में फूट डालकर देश को अस्थिर कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि दुश्मन ताकतें हमेशा धर्म और जाति के नाम पर लोगों को बांटने की कोशिश करेंगी और यही सबसे बड़ा खतरा है।
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राष्ट्रीय सुरक्षा सिर्फ सेना तक सीमित नहीं
नरवणे ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मतलब केवल सेना नहीं है। इसमें खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, जल सुरक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अगर इनमें से किसी पहलू में कमी रह जाए तो देश की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे सुरक्षा को व्यापक नजरिए से समझें और केवल सैन्य ताकत पर निर्भर न रहें।




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वैश्विक घटनाओं का भारत पर असर
पूर्व सेनाध्यक्ष ने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक माहौल में दुनिया में कहीं भी होने वाली घटनाएं भारत को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ और ट्रंप-पुतिन मुलाकात का उदाहरण दिया। नरवणे ने कहा कि ऐसी घटनाओं के तात्कालिक, अल्पकालिक और दीर्घकालिक असर हो सकते हैं, इसलिए भारत को नीति और रणनीतिक स्तर पर हर स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए।



युद्ध नहीं, संवाद ही समाधान
जनरल नरवणे ने साफ किया कि भारत हमेशा से विवादों का समाधान संवाद और चर्चा से चाहता है, न कि बल प्रयोग से। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का उल्लेख किया जिसमें कहा गया है कि यह युद्ध का युग नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सीमाओं को ताकत के दम पर बदलने की कोशिश स्वीकार्य नहीं है और विवादों का हल बातचीत के जरिए ही निकालना चाहिए।


 
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