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देश के बच्चों ने राजनीतिक दलों के सामने रख दी ये मांगें, बोले इन्हें भी करो घोषणा पत्र में शामिल
Thu, 28 Mar 2019 06:51 PM IST
अमर शर्मा
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 28 Mar 2019 06:51 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
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स्कूल बहुत दूर है, हमें पैदल चलकर जाना पड़ता है। हमारे स्कूल में शौचालय तो है, मगर उसमें पानी नहीं है। सरकारी दवा केंद्र पर सभी दवाएं नहीं मिलती, बाजार से लेनी पड़ती हैं। हम ईंट-भट्ठों पर रहते हैं, हमारे साथ अच्छा बर्ताव नहीं होता। हमसे काम कराया जाता है। मिड डे मील की क्वालिटी अच्छी नहीं है। खाने में दूध-अंडा भी शामिल हो। जिन्हें यह पसंद न हो, उन्हें केला दे दें। और हां, सरकार को पौष्टिक मिड डे मील 12 वीं कक्षा तक उपलब्ध कराना चाहिए। ये सब बातें देश के बच्चों ने राजनीतिक दलों से कही हैं। इनका कहना है कि हमारी इन मांगों को राजनीतिक दल अपने घोषणा पत्र में शामिल करें।
बता दें कि देश में 40 फीसदी जनसंख्या 18 साल से कम आयु वाले बच्चों की है। ऐसे बच्चे करीब 47.2 करोड़ हैं। बच्चों की समस्याओं और उनके निदान पर काम कर रहे गैर-सरकारी संगठन 'चाइल्ड राइट एंड यू' ने लोकसभा चुनाव से पहले बच्चों से बातचीत कर एक रिपोर्ट तैयार की है। यह रिपोर्ट विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को सौंपी गई है।
संगठन की प्रमुख पूजा मारवाह का कहना है, नवंबर-दिसंबर 2018 में 7-18 वर्ष की आयु के एक हजार से ज्यादा बच्चों के साथ बातचीत की गई थी। छह वर्ष से कम आयु वाले बच्चों के अभिभावकों को चर्चा में शामिल किया गया है।
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14 राज्य, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, दिल्ली और हरियाणा में ग्राउंड लेवल पैनल (जीएलपी) बनाकर बच्चों से बातचीत की गई।
करीब 70 पैनलिस्ट की मदद से कई सामान्य तरीकों के जरिए बच्चों से सवाल पूछे गए। जीएलपी के तहत दो दिवसीय वर्कशॉप आयोजित कर बच्चों के मन की बात जानने का प्रयास किया गया। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भरोसा दिलाया है कि वे बच्चों की इन मांगों को लोकसभा चुनाव के घोषणा पत्र में शामिल करेंगे।
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बता दें कि देश में 40 फीसदी जनसंख्या 18 साल से कम आयु वाले बच्चों की है। ऐसे बच्चे करीब 47.2 करोड़ हैं। बच्चों की समस्याओं और उनके निदान पर काम कर रहे गैर-सरकारी संगठन 'चाइल्ड राइट एंड यू' ने लोकसभा चुनाव से पहले बच्चों से बातचीत कर एक रिपोर्ट तैयार की है। यह रिपोर्ट विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को सौंपी गई है।
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संगठन की प्रमुख पूजा मारवाह का कहना है, नवंबर-दिसंबर 2018 में 7-18 वर्ष की आयु के एक हजार से ज्यादा बच्चों के साथ बातचीत की गई थी। छह वर्ष से कम आयु वाले बच्चों के अभिभावकों को चर्चा में शामिल किया गया है।
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14 राज्य, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, दिल्ली और हरियाणा में ग्राउंड लेवल पैनल (जीएलपी) बनाकर बच्चों से बातचीत की गई।
करीब 70 पैनलिस्ट की मदद से कई सामान्य तरीकों के जरिए बच्चों से सवाल पूछे गए। जीएलपी के तहत दो दिवसीय वर्कशॉप आयोजित कर बच्चों के मन की बात जानने का प्रयास किया गया। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भरोसा दिलाया है कि वे बच्चों की इन मांगों को लोकसभा चुनाव के घोषणा पत्र में शामिल करेंगे।
बच्चों ने राजनीतिक दलों से की ये मांग
सांकेतिक तस्वीर
स्कूलों में बेहतर शौचालय व्यवस्था हो। खासतौर पर, लड़कियों के लिए अलग शौचालय बनाए जाएं। सबसे बड़ी बात जो बच्चों ने कही है कि स्कूल में ऐसी कोई प्रणाली नहीं है, जहां बच्चों की आवाज सुनी जाए। उनकी जरूरतों के लिए भी एक प्रभावी प्लेटफार्म होना चाहिए। लड़कियों के सरकारी हॉस्टल में सुरक्षा के सही इंतजाम नहीं हैं, हमें रात में डर लगता है।
कुछ बच्चों का कहना था कि हम झुग्गियों में रहते हैं। हमारे पास शौचालय नहीं है। घरों के बाहर गंदा पानी बहता है। कभी-कभी तो यह पानी हमारे घर के अंदर तक आ जाता है। पानी के लिए टयूबवैल लगा है, लेकिन उसमें पानी नहीं है। बस को लेकर भी बच्चों ने कई सुझाव दिए हैं। कई जगहों पर स्कूल दूर हैं, बच्चों को पैदल जाना पड़ता है। अभिभावक इस डर से अपने बच्चों को स्कूल में ही नहीं भेजते।
पूजा मारवाह का कहना है कि 2019 में हमें उम्मीद है कि राजनीतिक दल अपने चुनावी घोषणा पत्र में बच्चों के इन सुझावों को जगह देंगे। हालांकि ये बच्चे देश की उस आबादी का हिस्सा हैं जो मतदान नहीं करती, मगर यह हमारा कल है। हमें इनका आज संवारना होगा, तभी देश का भविष्य मजबूत हो सकेगा।
पूजा मारवाह ने बताया कि हमने भाजपा प्रवक्ता माधव भंडारी, सीपीआई के राज्यसभा सांसद डी.राजा, सीपीआई एम के नीलोत्पल बसु, एनसीपी की सुप्रिया सुले, डीएमके की कनिमोझी, कांग्रेस के राज्यसभा सांसद शकील अहमद और सीपीआई बिहार के कन्हैया कुमार आदि नेताओं से मुलाकात कर आग्रह किया है कि वे अपने चुनावी घोषणा पत्र में बच्चों की इन मांगों को शामिल कराने के अलावा उन्हें धरातल पर लागू कराने का भी प्रयास करें।
कुछ बच्चों का कहना था कि हम झुग्गियों में रहते हैं। हमारे पास शौचालय नहीं है। घरों के बाहर गंदा पानी बहता है। कभी-कभी तो यह पानी हमारे घर के अंदर तक आ जाता है। पानी के लिए टयूबवैल लगा है, लेकिन उसमें पानी नहीं है। बस को लेकर भी बच्चों ने कई सुझाव दिए हैं। कई जगहों पर स्कूल दूर हैं, बच्चों को पैदल जाना पड़ता है। अभिभावक इस डर से अपने बच्चों को स्कूल में ही नहीं भेजते।
पूजा मारवाह का कहना है कि 2019 में हमें उम्मीद है कि राजनीतिक दल अपने चुनावी घोषणा पत्र में बच्चों के इन सुझावों को जगह देंगे। हालांकि ये बच्चे देश की उस आबादी का हिस्सा हैं जो मतदान नहीं करती, मगर यह हमारा कल है। हमें इनका आज संवारना होगा, तभी देश का भविष्य मजबूत हो सकेगा।
इन पार्टियों को सौंपा गया है बच्चों का मांग पत्र
'चाइल्ड राइट एंड यू' ने बच्चों का यह मांग पत्र राष्ट्रीय दल जैसे कांग्रेस पार्टी, भाजपा, सीपीआई और सीपीआई (एम) को सौंपा है। इसके अलावा जेडीयू, बसपा, सपा, आरजेडी, टीएमसी, एनसीपी और डीएमके के प्रतिनिधियों से मिलकर बच्चों की मांगें चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने की मांग की गई है।पूजा मारवाह ने बताया कि हमने भाजपा प्रवक्ता माधव भंडारी, सीपीआई के राज्यसभा सांसद डी.राजा, सीपीआई एम के नीलोत्पल बसु, एनसीपी की सुप्रिया सुले, डीएमके की कनिमोझी, कांग्रेस के राज्यसभा सांसद शकील अहमद और सीपीआई बिहार के कन्हैया कुमार आदि नेताओं से मुलाकात कर आग्रह किया है कि वे अपने चुनावी घोषणा पत्र में बच्चों की इन मांगों को शामिल कराने के अलावा उन्हें धरातल पर लागू कराने का भी प्रयास करें।