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गृह मंत्रालय: जेलों में सबसे ज्यादा होती है गांजे और सेलफोन की तस्करी, संसदीय समिति की रिपोर्ट में खुलासा
Thu, 28 Sep 2023 02:44 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 28 Sep 2023 02:44 PM IST
सार
रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि सेलफोन की वजह से ही जेलों के भीतर गैंगवार को बढ़ावा मिलता है। वहीं कैदियों द्वारा गांजे या अन्य नशीले सामान के इस्तेमाल से उनके पुनर्वास जैसे कार्यक्रम प्रभावित होते हैं।
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(सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
गृह मंत्रालय की संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारतीय जेलों में सबसे ज्यादा गांजे और सेलफोन की तस्करी होती है। संसदीय स्थायी समिति की 245वीं रिपोर्ट 'जेल- हालात, सुधार और आधारभूत ढांचा' में यह जानकारी दी गई है। संसदीय समिति ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों के साथ चर्चा के बाद यह रिपोर्ट तैयार की है। बीते दिनों जब संसद का विशेष सत्र आयोजित किया गया तो सत्र के अंतिम दिन यह रिपोर्ट सदन के दोनों सदनों में पेश की गई।
संसदीय समिति की रिपोर्ट में खुलासा
संसदीय समिति की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से बातचीत के बाद समिति को पता चला कि जेलों के भीतर सबसे ज्यादा गांजे और सेलफोन की तस्करी की जाती है। इनके बाद अन्य चीजों का नंबर आता है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि तस्करी कर जेल में भेजे गए सेलफोन से ही अपराधी जेलों में बैठकर बाहर अपना गैंग संचालित करते हैं और आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते हैं। रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि सेलफोन की वजह से ही जेलों के भीतर गैंगवार को बढ़ावा मिलता है। वहीं कैदियों द्वारा गांजे या अन्य नशीले सामान के इस्तेमाल से उनके पुनर्वास जैसे कार्यक्रम प्रभावित होते हैं।
सरकार को दिए गए ये सुझाव
रिपोर्ट में जेलों के भीतर तस्करी रोकने के लिए जेल अधिकारियों की ई-मुलाकात या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठकें करने का सुझाव दिया है। समिति ने ये भी बताया कि जेलों के भीतर विभिन्न सामान की तस्करी में जेल के कर्मचारी ही मदद करते हैं। गृह मंत्रालय से इस तस्करी को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की सलाह दी गई है और सभी जेलों के लिए स्टैंडर्ड प्रोसिजर तय करने की सलाह दी गई है। जेलों में ड्रोन और स्निफर डॉग्स की मदद से निगरानी रखने की सलाह दी गई है।
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संसदीय समिति की रिपोर्ट में खुलासा
संसदीय समिति की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से बातचीत के बाद समिति को पता चला कि जेलों के भीतर सबसे ज्यादा गांजे और सेलफोन की तस्करी की जाती है। इनके बाद अन्य चीजों का नंबर आता है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि तस्करी कर जेल में भेजे गए सेलफोन से ही अपराधी जेलों में बैठकर बाहर अपना गैंग संचालित करते हैं और आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते हैं। रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि सेलफोन की वजह से ही जेलों के भीतर गैंगवार को बढ़ावा मिलता है। वहीं कैदियों द्वारा गांजे या अन्य नशीले सामान के इस्तेमाल से उनके पुनर्वास जैसे कार्यक्रम प्रभावित होते हैं।
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सरकार को दिए गए ये सुझाव
रिपोर्ट में जेलों के भीतर तस्करी रोकने के लिए जेल अधिकारियों की ई-मुलाकात या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठकें करने का सुझाव दिया है। समिति ने ये भी बताया कि जेलों के भीतर विभिन्न सामान की तस्करी में जेल के कर्मचारी ही मदद करते हैं। गृह मंत्रालय से इस तस्करी को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की सलाह दी गई है और सभी जेलों के लिए स्टैंडर्ड प्रोसिजर तय करने की सलाह दी गई है। जेलों में ड्रोन और स्निफर डॉग्स की मदद से निगरानी रखने की सलाह दी गई है।
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