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गंगासागर मेलाः अपनों को देख 'अम्मा' के आंखों से छलप पड़े आंसू, 'हम' ने बिछड़ों को मिलाया
Wed, 15 Jan 2025 02:18 PM IST
अभिषेक दीक्षित
एन. अर्जुन, गंगासागर (कोलकाता)
एन. अर्जुन, गंगासागर (कोलकाता)
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Wed, 15 Jan 2025 02:18 PM IST
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Gangasagar Mela
- फोटो :
Amar Ujala
विस्तार
हां, भैया अम्मा मिल गईं...अम्मा मिल गईं... आप चिंता मत करो। हम उनको साथ लेकर आ रहे हैं। कहते हुए जहां, एक तरफ हेम लता का गला रूंआसा हो रहा था, वहीं अब तक अपनों का इंतजार कर रही 75 वर्षीय 'अम्मा' सुशीला देवी ने जैसे ही अनजार शहर में 'अपनों' को देखा तो आंखों से आंसू छपल पड़े। हां..यही हैं हेम लता..यहीं हैं मेले लोग। मैं इन सबको पहचानती हूं, कहते हुए रो पड़ीं सुशील देवी। मुझे ले चलो...मुझे लो चलो...। यह नजारा था, गंगासागर मेले में खोये हुए लोगों को आपनों को मिलाने वाली संस्था 'हम' अस्थायी ऑफिस के बाहर का। मकर संक्रांति के दिन जिसने भी यह दृश्य देखा, भावुक हो गया..आंखें गीली हो आईं।
सासनीगेट की अम्मा बिछड़ गईं थीं अम्मा अपनों से
एक पुरानी कहावत है, हर तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार...इसी कहावत को सुनाकर अलीगढ़ के सासनीगेट की 75 वर्षीय सुशीला देवी भी शायद मकर संक्रांति के अवसर पर गंगासागर में पवित्र स्नान करने पहुंची थीं। लेकिन जिन लोगों के साथ वे यहां पहुंची थीं, वे उनसे बिछुड़ गईं। उनकी तबीयत भी बिगड़ गई। इसकी जानकारी जब 'हम रेडियो क्लाब वेस्ट बंगाल' नामक संस्था को लगी तो उन्होंने बहुत प्रयास करके किसी तरह हेम लता का पता लगाया और उनसे संपर्क किया। अम्मा ने बताया कि वे 5 तारीख को गंगासागर स्नान के लिए अपने परिचितों के साथ अलीगढ़ से चली थीं। हेम लता ने बताया कि ये हमारी पड़ोस में रहती हैं, हम जिन तीन गाड़ियों में आए थे, उनमें एक गाड़ी में थीं।
हर कोई बोला, हम भी बनेंगे 'हम'
अम्मा को जब साथ आए लोग ले जाने लगे तो उन्होंने हम संस्थान का धन्यवाद करते हुए कहा, आपका जितना भी धन्यवाद करें, कम है। आप बिछड़ों को मिलाते हों, हम सब भी 'हम' संस्था जैसा बनना चाहते हैं। विनोद कुमार ने कहा, अगर आज हम अम्मा के बिना अलीगढ़ जाते तो हम लोगों को क्या जवाब देते। किस मुंह से अलीगढ़ जाते। भले ही वे हमारी रिश्तेदार नहीं हैं, लेकिन आए तो साथ थे। यह हमारी जिम्मेदारी है, कि हम अम्मा को सही-सलामत लेकर जाएं।
बस आप लोगों की थोड़ी मदद करनाः विश्वास
हम रेडियो क्लब वेस्ट बंगाल के सचिव अंबरिश नाग विस्वास ने कहा, हम पिछले 33 वर्षों से गंगासागर मेले में खोए हुए लोगों को अपनों से मिलाने का काम कर रहे हैं। यह हमारा पैशन है, हमारी टीम रात-दिन काम करती है। मैं केवल इतना कहना चाहता हूं, कि अनजान शहर में अगर कोई रास्ता भटक जाए, कोई अपनों से बिछड़ जाए, तो बस आप एक अच्छे नागरिक बनकर उनको अपनों से मिला दीजिए। बस आप थोड़ी मदद करना। बिछड़े हुए अपनों से मिल जाएंगे, इससे जो खुशी आपको मिलेगी, वह आप केवल अनुभव कर पाएंगे।