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मिशन गगनयान: प्रशिक्षण के लिए इस महीने रूस जाएंगे चयनित अंतरिक्षयात्री, 2022 में होगी लॉन्चिंग

Thu, 16 Jan 2020 12:08 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Thu, 16 Jan 2020 12:08 PM IST
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Gaganyaan Mission ISRO Selected astronauts will go to Russia for training in January
ISRO - फोटो : PTI

भारत के पहले मानव मिशन गगनयान के लिए चयनित चार अंतरिक्ष यात्रियों को कुछ दिनों के अंदर प्रशिक्षण के लिए रूस भेजा जाएगा। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि इन्हें रूस में अगले 11 महीनों तक प्रशिक्षण दिया जाएगा। 

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जितेंद्र सिंह के अनुसार, गगनयान मिशन के लिए 10 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस मिशन को देश की आजादी की 75वीं वर्षगाठ पूरा होने के अवसर पर 2022 में लॉन्च किया जाएगा। 
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रूस में प्रशिक्षण के बाद चयनित अंतरिक्ष यात्रियों को भारत में भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। यहां उन्हें इसरो द्वारा डिजाइन किए गए मॉड्यूल का संचालन और इसके साथ काम करना सिखाया जाएगा।
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भारतीय अंतरिक्षयात्रियों के लिए प्रयोगशाला में बना विशेष खाना
गगनयान मिशन में जाने वाले भारतीय अंतरिक्षयात्रियों के लिए विशेष तरह का खाना बनाया गया है। भारतीय अंतरिक्षयात्रियों के लिए खाने का जो मेन्यू तैयार किया गया है कि उसमें एग रोल्स, वेज रोल्स, इडली, मूंग दाल का हलवा और वेज पुलाव शामिल है। जिसे मैसूर के रक्षा खाद्य अनुसंधान प्रयोगशाला में तैयार किया गया है। अतंरिक्षयात्रियों को खाना गर्म करने के लिए फू़ड हीटर्स भी दिए जाएंगे।

इसके अलावा अंतरिक्षयात्रियों को पीने के लिए पानी और जूस दिया जाएगा। चूंकि अतंरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण नहीं होता है इसलिए गगनयान अभियान में जाने वालों के लिए ऐसे विशेष कंटेनर बनाए गए हैं जिनमें वह इसे लेकर जा सकें।

बता दें कि अतंरिक्षयात्रियों का यह खाना स्वस्थ है और एक साल तक चल सकता है। हालांकि एक बार पैकेट खुलने के बाद उसे 24 घंटों के अंदर खाना होगा। इस खाने को आधा खाकर नहीं रखा जा सकता। जब आप पैकेट खोल देते हैं तो ये सामान्य खाने की तरह बन जाता है।

इसरो के साथ रक्षा खाद्य अनुसंधान प्रयोगशाला (डीएफआरएल) ने गगनयान के लिए एक करार किया है। जिसके अनुसार अभियान के लिए वह 60 किलो खाना औपर 100 लीटर पानी उपलब्ध कराएगा। साल 2022 में गगनयान से चार भारतीय अंतरिक्ष में जाएंगे। जो सात दिनों तक अंतरिक्ष में रहेंगे।

आगरा में बने पैराशूट से धरती पर उतरेगा 'गगनयान'

मिशन गगनयान के क्रू मॉड्यूल की वापसी और रिकवरी सिस्टम में आगरा के एडीआरडीई (हवाई वितरण अनुसंधान एवं विकास संस्थान) के पैराशूट का इस्तेमाल किया जाएगा। इन पैराशूट को तैयार किया जा चुका है। 
इनसे मलपुरा पैरा ड्रॉपिंग जोन में ट्रॉयल किया जा रहा है। यह दो साल और चलेगा। 2022 में मिशन शुरू होने से ऐन पहले तक अलग-अलग ऊंचाई से जंपिंग का अभ्यास किया जाएगा। इसे देखने के लिए इसरो की टीम भी आगरा आ सकती है।

आगरा के एडीआरडीई को इसके पैराशूट तैयार करने की जिम्मेदारी मिली थी। एडीआरडीई चंद्रयान और मंगलयान मिशन में अपनी विशेषज्ञता दिखा चुका है। गगनयान में वापसी के समय अंतरिक्ष से धरती की कक्षा में प्रवेश के बाद यात्री पानी या जमीन पर एडीआरडीई के पैराशूट लेकर आएंगे। 

क्रू मेंबर को सुरक्षित लेकर आएगा पैराशूट
किसी भी दुर्घटना की स्थिति में क्रू एस्केप सिस्टम अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रखेगा। स्वदेशी रिकवरी सिस्टम में छह पैराशूट रखे गए हैं। 31 मीटर व्यास के आखिरी पैराशूट क्रू मेंबर को सुरक्षित लेकर आएंगे। एडीआरडीई के निदेशक एके सक्सेना और उनकी टीम इस मिशन का हिस्सा बनने से बेहद उत्साहित हैं। 

संस्थान के एक अधिकारी ने बताया कि मलपुरा देश का सबसे बड़ा पैरा ड्रॉपिंग जोन होने के कारण पैराशूट का ट्रॉयल यहीं पर किया जारहा है। यह लगभग दो साल चलेगा। इसे देखने के लिए इसरो के अधिकारी भी आएंगे। इस मिशन के लिए इसरो और डीआरडीओ के बीच सहमति हुई है।

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