गुजरात: जिस गांव का कभी नाम नहीं सुना, वहां दिग्गज नेता लगा रहे चक्कर
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ऊना तहसील के मोटा समधियाला गांव के बारे में शायद ही किसी ने सुना हो, लेकिन आज कल यह गांव बहुत ज्यादा चर्चा में है। देश की राजनीति के बड़े-बड़े धुरंधर इस गांव के चक्कर लगा रहे हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने 21 जुलाई को गिर-सोमनाथ जिले की ऊना तहसील में मोटा समधियाला गांव का दौरा किया था और गो रक्षा से जुड़े लोगों द्वारा पीटे गए दलित युवाओं से मुलाकात की थी।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, जेडीयू नेता शरद यादव, एनसीपी के प्रफुल पटेल भी ऊना के इस गांव में पीड़ित दलित परिवार के मुखिया बालू सर्वइया से मिलके आ चुके हैं। गाय की खाल ले जाने के आरोप में गौ-रक्षकों ने 11 जुलाई को ऊना तहसील के गांव मोटा समधियाला के दलितों को बांधकर पीटा था।
जिसेक बाद में पूरे देश में कई जगह दलितों ने प्रदर्शन किया। इस एक बड़ी घटना ने मोटा समधियाला गांव को मैप पर लाकर डाल दिया। मामले ने जैसे ही तूल पकड़ा तो बड़े-बड़े राजनीतिज्ञ भी अपनी रोटियां सेंकने में लग गए। यही नहीं मामले को लेकर संसद के दोनों सदनों में भी जमकर बहस हुई।
ट्रकों में भरकर आ रहे हैं लोग
इडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, एनजीओ अमरदीप फाउंडेशन ट्रस्ट के साथ काम करने वाले 29 वर्षीय सुरेश चंदपा बताते हैं कि, "जब मैंने 11 जुलाई वाली घटना के बारे में सुना तो मैं दंग रह गया। मैं तुरंत दलित परिवार के मुखिया बालू सर्वइया के पास मिलने गया और उसे भरोसा दिलाया कि इंसाफ जरूर मिलेगा।
सप्ताह के अंत तक गांव में जैसे आगंतुकों की बाढ़ सी आ गई। केंद्रीय मंत्री पुरषोत्तम रुपाला भी उन आगंतुकों में शामिल थे। मंत्री रुपाला के जाते ही ट्रक भरकर दलित बालू को सहयोग देने के लिए दूर-दूर से आने लगे। उन्होंने बालू के घर के बाहर मीटिंग भी की।" पूरे राज्य भर से ट्रकों में दलित बालू के घर आने लगे।
उन्होंने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के नारे भी लगाए हालांकि इस बीच बालू काफी शांत दिखा। कई दलित संगठन के प्रमुखों ने भी बालू के घर इकठ्ठे लोगों को संबोधित किया। उन्होंने लोगों से कहा है कि वो तब तक धरना प्रदर्शन करेंगे जब तक कोर्ट बालू को न्याय नहीं दे देता।
मामले की जांच कर रही सीआईडी भी लोगों से बालू के परिवार से दूर रहने को कह रही है कारण है बालू की तबियत ठीक नहीं है। सीआईडी ने बालू का बयान दर्ज कर लिया है। और मामले की जांच कर रही है। हालांति लोगों का तांता बालू के घर लगा रहता है। दलितों के विभिन्न समुदायों से लोग बालू से मिलने आ रहे हैं। यही नहीं मिलने आ रहे लोग बालू के परिवार के लिए राशन, सब्जियां भी ला रहे हैं।