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क्रिप्टो से एआई तक: 46 आर्थिक मुद्दों की जांच करेगी संसद की वित्त समिति, पेंशन से लेकर जीएसटी तक पर रहेगी नजर
Sat, 24 Oct 2026 02:07 PM IST
प्रशांत तिवारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Sat, 24 Oct 2026 02:07 PM IST
सार
संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति वित्त वर्ष 2026-27 में क्रिप्टोकरेंसी, वित्तीय क्षेत्र में एआई, बैंकिंग, टैक्स सुधार और महंगाई समेत 46 अहम आर्थिक मुद्दों की समीक्षा करेगी। इस स्थायी समिति में लोकसभा के 21 और 10 राज्यसभा के सांसद हैं।
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भर्तृहरि महताब
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति चालू वित्त वर्ष 2026-27 में देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े 46 अहम मुद्दों की पड़ताल करेगी। इनमें क्रिप्टोकरेंसी, वित्तीय क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का इस्तेमाल, महंगाई, बैंकिंग व्यवस्था और कर सुधार जैसे विषय शामिल हैं। समिति इन मुद्दों का विस्तार से अध्ययन करने के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी।
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भर्तृहरि महताब फिर बने समिति के अध्यक्ष
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इसी महीने की शुरुआत में कई संसदीय समितियों का नए सिरे से गठन किया था। इसके तहत भारतीय जनता पार्टी के सांसद भर्तृहरि महताब को वित्त संबंधी स्थायी समिति का अध्यक्ष फिर से नियुक्त किया गया है। इस समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल हैं।
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46 मुद्दों पर होगा विस्तार से अध्ययन
लोकसभा बुलेटिन के मुताबिक, समिति ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 46 विषय चुने हैं। इनमें वित्त मंत्रालय के विभिन्न विभागों के अलावा कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय, नीति आयोग और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। इन विषयों का संबंध देश की आर्थिक नीतियों, सरकारी योजनाओं और आम लोगों की आर्थिक स्थिति से है।
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महंगाई, रुपये और सरकारी संपत्तियों पर नजर
समिति महंगाई पर काबू पाने, रुपये की स्थिरता बनाए रखने और मुद्रा प्रबंधन के तरीकों की समीक्षा करेगी। वित्तीय क्षेत्र में लागू नियमों की प्रभावशीलता भी जांची जाएगी। इसके साथ ही सरकारी संपत्तियों से कमाई बढ़ाने और उनके बेहतर इस्तेमाल के लिए अपनाई जा रही मुद्रीकरण की नीति पर भी विचार होगा।
बैंकिंग, पेंशन और बीमा की समीक्षा
समिति बैंकिंग, पेंशन और स्वास्थ्य बीमा क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों का अध्ययन करेगी। असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ पहुंचाने के उपायों पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा, केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के कामकाज और उनके नतीजों का आकलन किया जाएगा।
क्रिप्टो और एआई पर रहेगा खास ध्यान
समिति आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों यानी क्रिप्टो से जुड़े मुद्दों और उनके भविष्य की संभावनाओं का अध्ययन करेगी। वित्तीय क्षेत्र में एआई के बढ़ते इस्तेमाल से पैदा होने वाले अवसरों और चुनौतियों पर भी गौर किया जाएगा। साथ ही, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के कामकाज में मौजूद नियामकीय कमियों की जांच होगी।
कर सुधार और वित्तीय संस्थाओं की समीक्षा
वस्तु एवं सेवा कर, सीमा शुल्क और प्रत्यक्ष करों में सुधार भी समिति के एजेंडे में शामिल हैं। इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक की बदलती आर्थिक परिस्थितियों में भूमिका, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के कामकाज तथा छोटी बचत योजनाओं की समीक्षा की जाएगी।
कंपनियों और विकास योजनाओं पर भी नजर
समिति राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण के सामने आने वाली चुनौतियों, कंपनियों की सामाजिक जिम्मेदारी, कॉरपोरेट ई-गवर्नेंस और लेखा परीक्षकों की जवाबदेही पर विचार करेगी। क्षेत्रीय विकास में नीति आयोग की भूमिका और आकांक्षी जिला कार्यक्रम की प्रगति की भी समीक्षा होगी।
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आर्थिक आंकड़ों को बेहतर बनाने पर जोर
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय से जुड़े विषयों में राष्ट्रीय लेखा आंकड़ों का अध्ययन शामिल है। समिति आर्थिक आंकड़े जुटाने, उनका विश्लेषण करने और उनकी गुणवत्ता सुधारने के उपाय भी सुझाएगी। इससे सरकार को बेहतर आर्थिक नीतियां बनाने में मदद मिल सकती है।