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खबरों के खिलाड़ी: आजम से मिलने पहुंचे अखिलेश ने साधे कौन से समीकरण, विश्लेषकों ने बताया इसका होगा कैसा असर?
Sat, 24 Oct 2026 05:10 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 24 Oct 2026 05:10 PM IST
सार
इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी और राकेश शुक्ल मौजूद रहे।
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खबरों के खिलाड़ी।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव हैं। चुनाव से पहले सियासी दल अपने-अपने समीकरण दुरुस्त करने में लगे हैं। इस हफ्ते अखिलेश यादव और आजम खां की मुलाकात को भी इसी नजरिए से देखा गया। सपा प्रमुख रामपुर जेल में बंद आजम से मिलने जेल पहुंचे। उनके परिवार से भी घर जाकर मुलाकात की। इस मुलाकात के कई मायने निकाले जा रहे हैं। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी और राकेश शुक्ल मौजूद रहे।
विनोद अग्निहोत्री: सतर्कता को आप डरना नहीं कह सकते हैं। मुझे लगता है कि अखिलेश का आजम खां से मिलना सतर्कता वाला कदम है। उत्तर प्रदेश में ये प्रयोग पहले भी हो चुका है। लेकिन उत्तर प्रदेश का मुसलमान उस पार्टी के साथ जाता है जो जीतती हुई दिखती है। अखिलेश यादव इस बार कोई चांस नहीं लेना चाहते हैं, इसीलिए वो आजम खां से मिलने गए। सवाल ये है कि ओवैसी अगर चंद्रशेखर से गठबंधन करते हैं तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा को मुश्किल हो सकती है।
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विनोद अग्निहोत्री: सतर्कता को आप डरना नहीं कह सकते हैं। मुझे लगता है कि अखिलेश का आजम खां से मिलना सतर्कता वाला कदम है। उत्तर प्रदेश में ये प्रयोग पहले भी हो चुका है। लेकिन उत्तर प्रदेश का मुसलमान उस पार्टी के साथ जाता है जो जीतती हुई दिखती है। अखिलेश यादव इस बार कोई चांस नहीं लेना चाहते हैं, इसीलिए वो आजम खां से मिलने गए। सवाल ये है कि ओवैसी अगर चंद्रशेखर से गठबंधन करते हैं तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा को मुश्किल हो सकती है।
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पूर्णिमा त्रिपाठी: सिर्फ एमवाई फैक्टर से सत्ता नहीं मिल सकती है ये अखिलेश को पता है। इसीलिए पीडीए का नारा आया। लेकिन उनकी राजनीतिक मजबूरी इसिलए वो आजम के साथ दिख रहे हैं। ओवैसी 2017 और 2022 में भी चुनाव यहां लड़ चुके हैं। हालांकि, 2024-25 के बाद उनकी लोकप्रियता बढ़ी है। इसलिए अखिलेश आजम खां से मिलने गए। सारी कवायद अपने वोट को कंसॉलिडेट करने की है।
राकेश शुक्ल: उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव सतर्क हो गए हैं। मुसलमानों को ये लग रहा है कि जो हमारे समाज का हो , हमारे लिए खड़ा हो और हमारे लिए बोलता हो। इसलिए असदुद्दीन ओवैसी ने रामपुर में अपना पहला कदम रखा। अगला कदम उनका प्रयागराज के आसपास कहीं होगा फिर पूर्वांचल में। इसलिए अखिलेश यादव को ये कदम उठाना पड़ा है।
राकेश शुक्ल: उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव सतर्क हो गए हैं। मुसलमानों को ये लग रहा है कि जो हमारे समाज का हो , हमारे लिए खड़ा हो और हमारे लिए बोलता हो। इसलिए असदुद्दीन ओवैसी ने रामपुर में अपना पहला कदम रखा। अगला कदम उनका प्रयागराज के आसपास कहीं होगा फिर पूर्वांचल में। इसलिए अखिलेश यादव को ये कदम उठाना पड़ा है।