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मुफ्त रेवड़ियां: चुनाव आयोग ने विशेषज्ञ समिति से की दूर रखने की अपील, बताई ये वजह
Wed, 10 Aug 2022 10:42 PM IST
Amit Mandal
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 10 Aug 2022 10:42 PM IST
सार
भाजपा नेता व वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की जनहित याचिका के लिखित जवाब में आयोग ने कहा, वह ऐसी किसी भी विशेषज्ञ समिति की स्थापना का स्वागत करता है।
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Election Commission of India, Supreme Court of India
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से चुनाव के दौरान पार्टियों द्वारा रेवड़ियों (मुफ्त उपहारों) की घोषणा की वैधता पर विचार-विमर्श के लिए प्रस्तावित विशेषज्ञ पैनल से उसे दूर रखने की अपील की है। आयोग ने बुधवार को कहा, सांविधानिक निकाय होने के नाते विशेषज्ञ समिति का हिस्सा बनने की पेशकश करना उचित नहीं हो सकता है। खासकर अगर वहां मंत्रालय और सरकारी निकाय हो।
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विशेषज्ञ पैनल बनाने के निर्णय की सराहना करते हुए आयोग ने कहा, देश में लगातार चुनाव होते हैं और बहु-सदस्यीय निकाय में विचार-विमर्श के दौरान कोई भी राय, विचार या टिप्पणी के प्रचारित होने की स्थिति में समान अवसर प्रदान करने की संकल्पना प्रभावित होगी। भाजपा नेता व वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की जनहित याचिका के लिखित जवाब में आयोग ने कहा, वह ऐसी किसी भी विशेषज्ञ समिति की स्थापना का स्वागत करता है। चुनाव प्रक्रिया की शुद्धता के हित में मौजूदा दिशा-निर्देशों को मजबूत करने या संशोधित करने में विशेषज्ञ निकाय के सुझाव से वह बहुत लाभान्वित होगा।
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आयोग ने कहा, सुनवाई के दौरान उसकी मौखिक टिप्पणियों से मीडिया द्वारा ऐसी धारणा बनाई जा रही है कि वह इस मुद्दे पर गंभीर नहीं है। इस कारण सांविधानिक निकाय की प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति हुई। यह उस देश के लिए अच्छा नहीं है जो अपेक्षाकृत ‘जवान’ है लेकिन दुनिया में सबसे बड़ा व स्थिर लोकतंत्र है। चुनाव आयोग ने कहा, उसने एस सुब्रमण्यम बालाजी मामले में शीर्ष अदालत द्वारा लगाई गई सीमाओं को दोहराया था। बालाजी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह चुनावी घोषणापत्रों और वहां किए गए वादों को विनियमित करने के लिए विशाल फैसले की तर्ज पर दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए अपनी शक्ति का उपयोग नहीं कर सकता।
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