फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Free Legal Aid Reward Parliamentary committee recommendation Gt should hail lawyers involved

Free Legal Aid Reward: मुफ्त कानूनी सहायता में शामिल वकीलों को पुरस्कृत करे सरकार, संसदीय समिति ने की सिफारिश

Fri, 11 Apr 2025 11:59 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Fri, 11 Apr 2025 11:59 PM IST
सार

विधि एवं कार्मिक संबंधी संसदीय समिति ने सरकार से अहम सिफारिश की है। समिति ने कहा है कि मुफ्त कानूनी सहायता मुहैया कराने वाले वकीलों को सरकार को पुरस्कृत करना चाहिए।

विज्ञापन
Free Legal Aid Reward Parliamentary committee recommendation Gt should hail lawyers involved
Parliament - फोटो : PTI

विस्तार

विधि एवं कार्मिक संबंधी संसदीय समिति ने सरकार से मुफ्त कानूनी सहायता गतिविधियों में शामिल वकीलों को पुरस्कृत करने और उनके योगदान को कॅरिअर में प्रोत्साहन से जोड़ने की सिफारिश की है। समिति ने लीगल सर्विसेज अथॉरिटी एक्ट के तहत निःशुल्क कानूनी सहायता की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रो-बोनो (निःशुल्क सेवा) वकीलों की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक राष्ट्रीय रजिस्ट्री बनाई जाए। इसके तहते उन्हें मान्यता देने के साथ न्यायिक नियुक्तियों में वरीयता मिलनी चाहिए।
विज्ञापन


समिति की रिपोर्ट, जो हाल ही में संसद के बजट सत्र में पेश की गई थी। इसके अनुसार, संरचित प्रोत्साहन के अभाव में वकील निःशुल्क सेवाओं में कम हिस्सा ले रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने भी विशेषकर कैदियों के लिए मुफ्त कानूनी सहायता को मजबूत करने पर जोर दिया है।
विज्ञापन


रिपोर्ट में पैरा-लीगल स्वयंसेवकों (पीएलवी) को भी अहम संसाधन बताया गया है। लेकिन उनका पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाने की बात भी स्वीकार की है। समिति ने सुझाव दिया कि प्रो-बोनो वकीलों के लिए राष्ट्रीय डाटाबेस बनाया जाए। साथ ही वकीलों के मुआवजे की दरों का वार्षिक समीक्षन बाजार के मानकों के अनुरूप किया जाए, ताकि योग्य पेशेवरों को आकर्षित किया जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन


रिपोर्ट में कहा गया कि गरीबों और वंचितों तक कानूनी सुविधाएं पहुंचाने में पीएलवी की भूमिका अहम है, लेकिन उन्हें प्रशिक्षण और संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ता है। समिति ने कानूनी सेवा प्राधिकरणों से पीएलवी को तकनीकी सहायता और प्रोत्साहन देने का आग्रह किया।


जेलों में बंद कैदियों को कानूनी सलाह की व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
इसके अलावा, समिति ने जेलों में बंद कैदियों को कानूनी सलाह मुहैया कराने की व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने पर जोर दिया। उल्लेखनीय है कि भारत में 80 प्रतिशत से अधिक आबादी निःशुल्क कानूनी सहायता की हकदार है, लेकिन जागरूकता और संसाधनों के अभाव में यह योजना पूरी क्षमता से नहीं चल पा रही।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed