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'स्पेशल 26' कर रही है बेरोजगारों से छलावा, आईबी, रेलवे और दूसरे महकमों की नौकरी बांट रहे ठग

जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: Rajeev Rai Updated Sun, 16 Aug 2020 07:31 PM IST
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job fraud
job fraud - फोटो : अमर उजाला
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देश में बेरोजगारी ने पहले से ही युवाओं की कमर तोड़ रखी है। अब रही सही कसर 'स्पेशल 26' पूरी कर रही है। ठगों के ये गिरोह बेधड़क होकर युवाओं के सपनों से खेल रहे हैं। जॉब के फर्जी विज्ञापन देते हैं, साक्षात्कार लेते हैं, मोटी राशि लेकर ज्वाइनिंग लेटर भी थमा देते हैं। उसके बाद जब यह पता चलता है कि ये सब तो ठगों का माया जाल था तो उन युवाओं की स्थिति का अंदाजा लगा सकते हैं, जिन्हें नौकरी का फार्म भरने के लिए दूसरों से आर्थिक मदद लेनी पड़ती है। 
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लंबे समय से 'स्पेशल 26' बेरोजगारों से छलावा कर रही है। देश की टॉप इंटेलिजेंस एजेंसी आईबी, सीबीआई, रेलवे और दूसरे महकमों की नौकरी बांट कर ठग लाखों करोड़ों कमा रहे हैं। युवा हल्लाबोल आंदोलन के प्रमुख नेता एवं स्वराज इंडिया पार्टी की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष अनुपम का दावा है कि ये ठग राजनेताओं की छत्रछाया और अफसरों के मार्गदर्शन में स्पेशल 26 जैसी फ्रॉड की घटनाओं को अंजाम देते हैं। अभी हाल ही में रेलवे और इंडियन ऑयल में इस तरह के मामले देखने को मिले हैं। जब कभी कार्रवाई की बात होती है तो किसी दफ्तर के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को किंगपिन बताकर मामला खत्म कर दिया जाता है।


हाल ही में एक प्राइवेट एजेंसी ने भारतीय रेलवे में 5000 से ज्यादा पदों के लिए नौकरी का फर्जी विज्ञापन जारी कर दिया था। धड़ाधड़ आवेदन आने लगे और बहुत से युवाओं ने कुछ पैसे भी जमा करा दिए। किसी युवा का इंटरनेट काम नहीं कर रहा था तो उसके लिए एजेंसी ने फीस जमा कराने का दूसरा तरीका बता दिया। नौकरी का विज्ञापन 8 अगस्त को जारी हुआ था। कई दिनों बाद मालूम हुआ कि रेलवे ने ऐसा कोई विज्ञापन ही नहीं दिया है। नौकरी के सपने संजोय बैठे युवा सन्न रह गए। रेलवे ने यह कह कर अपना पल्ला झाड़ लिया कि प्राइवेट एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर रहे हैं। प्रकाशित विज्ञापन में कहा गया था कि भारतीय रेलवे ने आठ श्रेणियों में 5,285 पदों के लिए आवेदन मांगे हैं। आवेदकों को 750 रुपये की आनलाइन फीस जमा करानी थी। आवेदन की आखिरी तारीख 10 सितंबर 2020 रखी गई। रेलवे ने कहा, इस तरह की जॉब के लिए किसी निजी एजेंसी को आवेदन देने की इजाजत नहीं दी गई है। अवेस्ट्रेन इंफोटेक संगठन के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं।

इससे पहले सीबीआई और आईबी के नाम पर भी यह सब फर्जीवाड़ा हो चुका है। सीबीआई ऐसे कई मामलों में सचेत कर चुकी है। इसके बाद भी 'स्पेशल 26' सक्रिय है। आईबी में भी ऐसे मामले सामने आए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर आईबी की नौकरी के फर्जी विज्ञापन को लेकर नोटिस जारी कर रखा है। इस नोटिस में कहा गया है कि ऐसे कुछ गिरोह सक्रिय हैं जो आईबी में नौकरी दिलाने के विज्ञापन जारी कर रहे हैं। ये गिरोह न केवल परीक्षा और साक्षात्कार तक सीमित रहते हैं, बल्कि नियुक्ति पत्र भी जारी कर देते हैं। पिछले दिनों इंडियन ऑयल की डीलरशिप देने के लिए फर्जी विज्ञापन जारी हो गया। 



इंडियन ऑयल ने खुद यह चेतावनी जारी की है कि इस तरह के विज्ञापनों के झांसे में न आएं। कंपनी ने अपने ट्विटर हैंडल के जरिए लोगों को सावधान किया है कि कुछ वेबसाइट इंडियन ऑयल के नाम का झूठा इस्तेमाल कर रही हैं। पेट्रोल पंप डीलरशिप के नाम पर ये कंपनी लोगों के साथ जालसाजी कर रही हैं। दूर दराज के इलाक़ों में मोबाइल टावर लगाने के नाम पर फर्ज़ीवाड़ा करने वाली दर्जनों कंपनियां सामने आ चुकी हैं।

एसएससी और विभिन्न राज्यों के भर्ती बोर्डों या आयोग में हो रही अनियमित्तताओं को लेकर आवाज उठाने वाले युवा हल्लाबोल आंदोलन के नेता अनुपम कहते हैं कि यह सब राजनेताओं और नौकरशाहों की मिलीभगत के बिना नहीं हो सकता। बाद में जब जांच किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचने वाली होती है तो संबंधित अफसर का तबादला कर दिया जाता है। यूपी के शिक्षक घोटाले में यही कुछ तो हुआ है। मंत्रियों के जानकार सामने आने लगे तो रातोंरात जांच अधिकारी बदल दिए गए। एसएससी मामले की जांच में जब सीबीआई ने छह माह तक चार्जशीट दायर नहीं की तो आरोपी जमानत पर छूट गए। 

स्पेशल 26 के खेल का केवल रूप बदलता रहता है, बाकी यह खेल अधिकांश राज्यों व केंद्रीय विभागों में जारी है। बेरोजगार, जिनमें बड़ी संख्या मजदूरों और किसानों के बच्चों की हैं, उनके पास फार्म भरने के पैसे नहीं होते। ऐसे में जब उन्हें पता चलता है कि वे पिछले एक साल से स्पेशल 26 के जाल में फंसे थे तो उनकी क्या हालत होती होगी, यह सोच सकते हैं। इन लोगों का विभाग में कोई न कोई लिंक अवश्य होता है। इंटरनेट पर आवेदन और फीस जमा होती है, इसके बावजूद सरकार उन्हें समय रहते नहीं पकड़ पाती। 

हर विभाग में एक आईटी टीम को 24 घंटे अलर्ट पर रखा जाए। डेडिकेट यूनिट का गठन हो। इससे पहले कि लाखों पीड़ित ठगे जाएं, उनके सपने टूटें, स्पेशल 26 को सलाखों के पीछे कर दिया जाए। केंद्र सरकार और राज्य सरकारें अगर भर्ती समय पर करें तो भी ऐसी घटनाएं रोकी जा सकती हैं। ठगी का मौका ही तब मिलता है, जब सरकार चयन प्रक्रिया में वर्षों लगा देती है। परेशान युवा नौकरी के चक्कर में इन ठगों के शिकंजे में फंस जाते हैं।
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