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जानें कौन हैं सुप्रीम कोर्ट के वो चार वरिष्ठ जज, जिन्होंने खोला मोर्चा

Fri, 12 Jan 2018 04:50 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 12 Jan 2018 04:50 PM IST
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four supreme court judges who did a press conference for the first time in indian judicial history
सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की - फोटो : ANI
भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब देश की सर्वोच्च अदालत के चार वरिष्ठ जजों ने प्रेस कांफ्रेंस की और देश की जनता के सामने अपनी बात रखी। इन जजों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। जस्टिस चेलामेश्वर ने कहा कि, 'आज हम इसलिए सामने आए कि आज से 20 साल बाद कोई यह ना कह दे कि क्या इन चार जजों ने अपनी अंतरआत्मा बेच दी थी।' प्रेस कांफ्रेंस करने वाले सुप्रीम कोर्ट के यह चार वरिष्ठ जज हैं जस्टिस जस्ती चेलामेश्वर, जस्टिस रंगन गोगोई, जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ। आइए जानते हैं इन चारों जज के बारे में। 
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जस्टिस जस्ती चेलामेश्वर 

जस्ती चेलामेश्वर सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के बाद वरिष्ठता में दूसरे नंबर पर हैं। 10 अक्टूबर 2011 को वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने। वह केरल और गुवाहाटी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे हैं। जस्ती चेलामेश्वर का जन्म 23 जून 1953 में आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के मोवया मंडल के पेड्डा मुत्तेवी गांव में हुआ। मद्रास के लोयला कॉलेज से फिजिक्स में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने आंध्र यूनिवर्सिटी से 1976 में कानून की डिग्री की। 
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जस्टिस रंजन गोगोई 

जस्टिस रंजन गोगोई सुप्रीम कोर्ट में जजों की वरिष्ठता सूची में तीसरे नंबर पर हैं। 2018 में वह जस्टिस दीपक मिश्रा के रिटायर होने के बाद मुख्य न्यायाधीश बनने की कतार में हैं। भारत के पूर्वोत्तर राज्य से इस शीर्ष पद पर पहुंचने वाले वह पहले जस्टिस होंगे। जस्टिस गोगोई का जन्म 18 नवंबर 1954 को हुआ। उन्होंने गुवाहाटी हाई कोर्ट से वकालत की शुरुआत की थी। 28 फरवरी 2001 को वह गुवाहाटी हाई कोर्ट में स्थायी जज नियुक्त हुए। वह 12 फरवरी 2011 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। 23 अप्रैल 2012 को वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने। 
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जस्टिस मदन भीमराव लोकुर 

जस्टिस मदन भीमराव लोकुर सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठता में चौथे नंबर पर हैं। जस्टिस लोकुर का जन्म 31 दिसंबर 1953 में हुआ। उनकी स्कूली शिक्षा नई दिल्ली में हुई। उन्होंने इलाहाबाद से 12वीं की पढ़ाई पूरी की और दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इतिहास (ऑनर्स) में स्नातक की डिग्री ली। उन्होंने 1977 में दिल्ली विश्वविद्यालय से ही कानून की डिग्री हासिल की। 1977 में उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से वकालत की शुरुआत की। 13 फरवरी 2010 से 21 मई 2010 तक वे दिल्ली हाई कोर्ट में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे. इसके बाद वह गुवाहाटी हाई कोर्ट और आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में मुख्य न्यायधीश रहे। 4 जून 2012 को वह सुप्रीम कोर्ट के जज नियुक्त हुए। न्यायिक सुधारों, अदालतों के कम्प्यूटरीकरण, न्यायिक शिक्षा, कानूनी सहायता और सेवाएं, जुवेनाइल जस्टिस जैसे विषयों में उनकी रुचि है। 


जस्टिस कुरियन जोसेफ 

सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठता के क्रम में जस्टिस कुरियन जोसेफ पांचवे स्थान पर हैं। जस्टिस कुरियन जोसेफ का जन्म 30 नवंबर 1953 में हुआ। यूपी में शुरुआती स्कूली शिक्षा हुई। उन्होंने केरल लॉ एकेडमी से वकालत की डिग्री हासिल की। केरल हाईकोर्ट से 1979 में उन्होंने वकालत की शुरुआत की। 12 जुलाई 2000 को वह केरल हाई कोर्ट के जज बने। केरल हाईकोर्ट को दो बार कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रह चुके जस्टिस जोसेफ ने 8 फरवरी 2010 को हिमाचल प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। 8 मार्च 2013 को वह सुप्रीम कोर्ट में जज बने।
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