CRPF: तीन लाख जवानों की फोर्स में आत्महत्या-भ्रातृहत्या रोकेंगे 'चार यार', ऐसे कार्मिकों पर रहेगी सख्त निगरानी
सहकर्मी स्तर पर आपसी संचार को बढ़ाने के लिए 'चार यार' यानी 'चार मित्र'/दोस्त, फार्मूला लागू किया गया है। इस प्रणाली में चार लोगों का एक समूह बनेगा।
विस्तार
सीआरपीएफ में बढ़ती आत्महत्याओं और भ्रातृहत्याओं को रोकने के लिए कई सुधारात्मक पहल प्रारंभ की जा रही हैं। इसके तहत बल में विभिन्न स्तरों पर संचार की संस्थागत व्यवस्था में सुधार किया जाएगा। बल में 'चार यार' यानी मित्र, व्यवस्था प्रारंभ होगी। इन चार कार्मिकों में से किसी भी समय कम से कम दो कार्मिकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। सदस्यों का चयन इस तरह किया जाए कि उनमें कम से कम दो लोग हमेशा ड्यूटी पर साथ रहें। ड्यूटी के बाद भी वे एक ही बैरक में रहें। संवाद के कई तरीके होंगे। इसमें सहकर्मी स्तर पर, (जवान से जवान), वरिष्ठ एवं कनिष्ठ अधिकारियों/कार्मिकों के बीच में और यूनिट कार्मिकों/यूनिट व परिवारों के बीच, संवाद शामिल है। संवाद का मकसद है कि 3 लाख की संख्या वाले बल में कोई भी कार्मिक आत्महत्या/भ्रातृहत्या जैसा घातक कदम न उठाए। अब सीआरपीएफ की प्रत्येक कंपनी 'चार यार' के आधार पर संगठित होगी।
इस तरह लागू होगा 'चार मित्र'/दोस्त, फार्मूला ...
सूत्रों के अनुसार, सहकर्मी स्तर पर आपसी संचार को बढ़ाने के लिए 'चार यार' यानी 'चार मित्र'/दोस्त, फार्मूला लागू किया गया है। इस प्रणाली में चार लोगों का एक समूह बनेगा। विशेष तौर पर अधीनस्थ अधिकारी और उनसे कनिष्ठ सिपाही/ हवलदार, सहायक उप निरीक्षक पद के सदस्य, जो तनाव के समय तक एक दूसरे के लिए मौजूद हों। इन चार कार्मिकों में से किसी भी समय कम से कम दो कार्मिकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। सदस्यों का चयन इस तरह किया जाए कि उनमें कम से कम दो लोग हमेशा ड्यूटी पर साथ रहें। ड्यूटी के बाद भी वे एक ही बैरक में रहें। सीआरपीएफ की प्रत्येक कंपनी, 'चार यार' के आधार पर संगठित हो। इतना ही नहीं, 'चार यार' में कार्मिकों को एक या दो समान सामाजिक/भाषाई पृष्ठभूमि अथवा आयु के साथी चुनने दिए जाएं।
संस्थागत बनेंगे 'एक घंटा मिट्टी के साथ' और 'चौपाल'
इन उपायों का मकसद है कि सीआरपीएफ के कार्मिकों के बीच विश्वास और साझेदारी को बढ़ाना है। इसकी मदद से किसी भी जवान को खतरनाक कदम उठाने से रोका जा सकता है। इसके तहत कई उपाय किए जाएंगे। मासिक सैनिक सम्मेलन की मौजूदा व्यवस्था पर दोबारा से विचार कर उसे मजबूत बनाया जाए। सभी अधिकारी और जवान, एक साथ मिलकर, आउटडोर समूह गतिविधियां जैसे, 'एक घंटा मिट्टी के साथ' और चौपाल को संस्थागत बनाया जाए। इनमें खेलकूद एवं मनोरंजन की गतिविधियां शामिल हैं। व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचा जाए। अधीनस्थ अधिकारी व यूनिट/कंपनी कल्याण समिति के सदस्य, सभी चौपालों में अवश्य उपस्थित रहें। कार्मिकों को बोलने के लिए प्रोत्साहित करें। इसके जरिए, जवानों के असामान्य व्यवहार/पैटर्न की निगरानी की जा सकती है।
'यूनिट कल्याण समिति' में होंगे ये लोग
यूनिट और कंपनी स्तर पर 'यूनिट कल्याण समिति' का गठन करें। इस समिति में पीठासीन अधिकारी के रूप में टूआईसी/डिप्टी कमांडेंट, सदस्य 1 के रूप में और यूनिट का चिकित्सा अधिकारी, सूबेदार मेजर सदस्य 2, बीएचएम सदस्य 3 और डब्लूडब्लूए के प्रतिनिधि शामिल होंगे। कंपनी स्तर पर पीठासीन अधिकारी के रूप में कंपनी कमांडर सदस्य 1 और प्लाटून कमांडर व सदस्य 2 के रूप में सीएचएम शामिल होंगे। कमेटी के कार्यों में छुट्टी से लौटने वाले कार्मिकों का यूनिट/कंपनी स्तर की कल्याण समिति द्वारा साक्षात्कार लेना, शामिल है। साक्षात्कार में कई बातें शामिल रहेंगी। जैसे कार्मिक के परिवार की स्थिति कैसी है। बच्चों की शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और संपत्ति के मुद्दे पर बात की जाएगी।
कंपनी कमांडर की अनिवार्य तौर पर अभ्युक्ति
कार्मिक यह महसूस करे कि वह सीआरपीएफ का अभिन्न और महत्वपूर्ण हिस्सा है। वह छुट्टी काटने के बाद अपने बड़े परिवार यानी 'बल' में वापस आ गया है। कार्मिक का साक्षात्कार, नो यूअर पर्सनल 'केवाईपी' प्रोफार्मा के आधार पर होगा। इसमें उपभोग की गई छुट्टी की प्रकृति और अवधि, छुट्टी से रिपोर्ट करने की तिथि, छुट्टी लेने का कारण, यदि छुट्टी के दौरान कोई समस्या आई हो, परिवार की खुशहाली के बारे में, वित्तीय स्थिति, कोई तनाव, हेल्थ इश्यू, पहले की कोई शिकायत तो लंबित नहीं है, समस्या के संबंध में परामर्श या सलाह की आवश्यकता हो। कॉलम के आखिर में कंपनी कमांडर की अनिवार्य तौर पर अभ्युक्ति रहेगी।
समय समय पर जाचेंगे सीआईबीआईएल स्कोर
'यूनिट कल्याण समिति' द्वारा कार्मिकों की खर्च करने की आदतों और कुछ कार्मिकों की ऑनलाइन गेमिंग व सट्टेबाजी की लत पर नजर रखी जाए। बल में संबंधित कार्मिकों का सीआईबीआईएल स्कोर समय समय पर जांचा जाए। अगर किसी कार्मिक का विचलित व्यवहार है तो 'चार यार' प्रणाली का इस्तेमाल किया जाए। कार्मिकों को आत्महत्या जैसे कदम उठाए जाने से रोकने के लिए एक पॉलिसी बनाई जाए। कर्मियों से जुड़े ऐसे मुद्दों की पहचान और दस्तावेजीकरण किया जाए, ताकि तनावग्रस्त कर्मियों को अपनी शिकायतें बताने की उम्मीद और रास्ता मिले। कार्मिकों के खाने पीने और सोने का व्यवहार, संचार पैटर्न, पारस्परिक व्यवहार, सिबिल स्कोर के बारे में नियमित फीडबैक लिया जाए। इस मामले में समिति 'चार यार' प्रणाली, सीएचएम, सूबेदार मेजर, मैस कमांडर और लेखा शाखा के कार्मिकों सहित सभी संबंधित शाखाओं की मदद ली जा सकती है।
इन कारणों पर रहेगी विशेष नजर
समिति को एक यह दायित्व भी सौंपा गया ह कि वह असामान्य व्यवहार के मामलों पर तुरंत ध्यान दे। उस वक्त खतरे की आशंका महसूस की जाए, जब कोई व्यक्ति छुट्टी से ओएसएल रहता है। तय दिनों से छुट्टी को आगे बढ़ाता है, छुट्टी से जल्द रिपोर्ट करता है, छुट्टी जाने में कोई रुचि नहीं दिखाता, फोन पर बातचीत करने में ज्यादा समय व्यतीत करता है। फोन पर परिवार से बात करने के दौरान आक्रामक होना, इंटरनेट पर गेमिंग या सट्टेबाजी में लिप्त रहना, कार्मिक के विषय में किसी बैंक या अन्य वित्तीय संस्थान द्वारा ऋण ग्रस्तता, दिवालियापन या किसी दूसरे मुद्दे के संबंध में कोई रिपोर्ट, कार्यालय को भेजी गई हो। क्या वह अपने सहकर्मी या दूसरे स्त्रोतों से धन उधार लेता है।
कंपनी/यूनिट में तैयार होगी एक लॉग बुक
इसके अलावा कमेटी को कार्मिक के परिवार में बेहतर समन्वय स्थापित कराने में मदद करनी चाहिए। कुछ मामलों में कार्मिक के परिवार को प्रोत्साहित और संवदेनशील बनाने का प्रयास करना है। जैसे एटीएम कार्ड संभालना, नेट बैंकिंग, यूपीआई भुगतान, परिवार के संबंध में वित्तीय निर्णय लेना, बुनियादी डिजिटल कौशल सीखना, उच्च शिक्षा का लक्ष्य रखना, अभिभावक और शिक्षक बैठकों में स्वयं भाग लेना, बच्चों को डॉक्टर के पास ले जाना व दोपहिया/चार पहिया वाहन चलाना सिखाना। उक्त बातों को लेकर संबंधित कंपनी/यूनिट में एक लॉग बुक तैयार होगी। सुपरवाईजरी अधिकारी अपने दौरे के दौरान लॉग बुक का निरीक्षण करेंगे।
हेल्पलाइन पर ले सकते हैं मदद
कंपनी कल्याण समिति के ध्यान में कोई ऐसा मामला आता है कि जिसमें कार्मिक को लंबे समय तक निगरानी की आवश्यकता है तो ऐसे मामलों को यूनिट कल्याण समिति के संज्ञान में लाया जाए। अगर इस बीच उस व्यक्ति का तबादला हो जाता है तो संबंधित यूनिट/कार्यालय को उचित रूप से सूचित किया जाए। समिति कोई अतिसंवेदनशील रिपोर्ट देती है तो यूनिट चिकित्सा अधिकारी की राय के आधार पर कार्रवाई की जाए। इसमें वरिष्ठ अधिकारियों का परामर्श, जीवनसाथी और परिवार के अन्य सदस्यों से बातचीत व कार्यस्थल पर सहकर्मियों का सहयोग, शामिल है। हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट हेल्पलाइन नंबर 08448844845, टेली मानस हेल्पलाइन नंबर 14416 और 1800-891-4416 और सीआरपीएफ के स्नेहालय से मदद मांगी जा सकती है।
कोई कार्मिक बार बार ऋण तो नहीं मांग रहा
आत्महत्या जैसी घटना को रोकने के लिए कार्मिकों के परिवारों को बल के कल्याण संबंधी कार्यक्रमों और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी आयोजनों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। महिलाओं को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर, बल के सदस्यों के बीच जागरूकता फैलाई जाए। अगर कोई कार्मिक बार बार ऋण मांगता है या साथी कर्मियों से उधार लेता है, ऋण की अदायगी में चूक, इसे एक गंभीर खतरे के तौर पर लें। कार्मिकों के स्वास्थ्य का ध्यान रखा जाए। शराब का अत्यधिक सेवन, इस पर निगरानी रखें। यह आंकलन किया गया है कि कुछ आत्महत्याएं, सेवा से संबंधित मुद्दे, जैसे कि किसी वरिष्ठ या सहकर्मी द्वारा उस व्यक्ति के प्रति किए गए व्यवहार के कारण की गई थीं। डिप्रेशन और शराब निर्भरता सिंड्रोम जैसी मानसिक स्थितियों पर ध्यान केंद्रित किया जाए।
हथियारों के सुरक्षित भंडारण के लिए प्रोटोकॉल
ऐसे मुद्दों के कारण होने वाला तनाव अचानक प्रकट नहीं होता, बल्कि यह समय के साथ बढ़ता जाता है। हालांकि बल में कर्मी एक साथ रहते/काम करते/खाते हैं, इसलिए ऐसे मुद्दे दोस्तों और सहकर्मियों के लिए अनजान नहीं बने रह सकते। इसके लिए उक्त मुद्दों की सही पहचान की जाए, उनका दस्तावेजीकरण किया जाए। संबंधित प्राधिकारी द्वारा उचित कदम उठाए जाएं। कुछ मामलों में यह पाया गया है कि कार्मिक द्वारा अन्य कार्मिक के हथियार से आत्महत्या की गई है, इसलिए यूनिट/कार्यालय द्वारा हथियारों के सुरक्षित भंडारण के लिए प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाए, ताकि हथियारों के दुरुपयोग को रोका जा सके।
इन संकेतों को पहचानना होगा
यूनिट और कंपनी स्तर पर बीएचएम और सीएचएम आत्महत्याओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वजह, ये संपर्क का प्रथम बिंदु होते हैं, जिनके साथ कंपनी या यूनिट के जवान अपनी समस्याओं को साझा करते हैं। ऐसे में जूनियर कमांडरों 'बीएचएम और सीएचएम' को यूनिट/कंपनी के जवानों के साथ अपनी बातचीत में सहानुभूति रखने के लिए संवेदनशील बनाना अनिवार्य है। इस मकसद की प्राप्ति के लिए, उन्हें संकेतों को पहचानने और समय पर वरिष्ठ पदाधिकारी के ध्यान में लाने के लिए प्रशिक्षित करना आवश्यक है। सभी स्तरों पर नेतृत्व को मानसिक स्वास्थ्य, कल्याण और सहजसंवाद की संस्कृति को बढ़ावा देने में सक्रिय रूप से शामिल होने के लिए भी संवेदनशील बनाया जाए। जहां कर्मचारी भय या प्रतिशोध के डर के बिना अपनी परेशानियों को व्यक्त करने के लिए स्वयं को स्वतंत्र महसूस कर सकें। यह पत्र, 22 नवंबर को सभी जोन मुख्यालय के विशेष महानिदेशकों, निदेशक अकादमी, आईजी सेक्टर हेडक्वार्टर, ट्रेनिंग सेंटर एवं संयुक्त अस्पताल, डीआईजी सभी रेंज कार्यालय, ग्रुप सेंटर, ट्रेनिंग सेंटर, संयुक्त अस्पताल, सीडब्लूएस, एडब्लूएस और कमांडेंट, सभी बटालियन को भेजा गया है।