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Kerala: आनुवांशिक बीमारी से पीड़ित बच्चा जन्मा तो मां-बाप का फूटा गुस्सा, चार डॉक्टरों के खिलाफ कराया केस दर्ज

Thu, 28 Nov 2024 01:13 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम Published by: काव्या मिश्रा Updated Thu, 28 Nov 2024 01:13 PM IST
सार

दंपती का कहना है कि डॉक्टर प्रसव से पहले करवाई गईं जांचों के दौरान यह पता लगाने या खुलासा करने में नाकाम रहे कि बच्चे को कोई आनुवंशिक बीमारी है। इसके बजाय, डॉक्टरों ने उन्हें आश्वासन दिया था कि रिपोर्ट सामान्य हैं।

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Four doctors booked in Kerala for birth of newborn with genetic disorders
जांच में जुटी पुलिस - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

केरल से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहां चार डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इन पर मां के गर्भ में ही नवजात शिशु में आनुवांशिक बीमारी का पता लगाने में कथित रूप से नाकाम रहने का आरोप लगा है। 

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इन डॉक्टरों के खिलाफ केस
अलप्पुझा दक्षिण पुलिस के अनुसार, आरोपियों में कडप्पुरम सरकारी महिला एवं बाल अस्पताल से जुड़ी दो महिला डॉक्टर और निजी डायग्नोस्टिक लैब की दो डॉक्टर शामिल हैं। पुलिस ने मंगलवार को अनीश और सुरुमी द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया।
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'चार दिन बाद बच्चे को दिखाया'
दंपती का कहना है कि डॉक्टर प्रसव से पहले करवाई गईं जांचों के दौरान यह पता लगाने या खुलासा करने में नाकाम रहे कि बच्चे को कोई आनुवंशिक बीमारी है। इसके बजाय, डॉक्टरों ने उन्हें आश्वासन दिया था कि रिपोर्ट सामान्य हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें प्रसव के चार दिन बाद बच्चा दिखाया गया था। 
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यह है पूरा मामला
प्राथमिकी में कहा गया है कि 35 वर्षीय सुरुमी कडप्पुरम महिला एवं बाल अस्पताल में भर्ती थीं। वह तीसरी बार मां बनने वाली थीं। उन्हें 30 अक्तूबर को अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था। हालांकि, भ्रूण की गति और दिल की धड़कन नहीं सुनाई देने की बात कहते हुए अलप्पुझा के वंदनम में सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एमसीएच) में रेफर कर दिया गया। आठ नवंबर को एमसीएच में सर्जरी के बाद बच्चे का जन्म हुआ और उसमें खतरनाक बीमारियां पाई गईं। 

डॉक्टर ने दी सफाई
इस बीच, आरोपी डॉक्टरों में से एक ने कहा कि उसने गर्भावस्था के शुरुआती महीनों के दौरान ही सुरुमी का इलाज किया था। उन्होंने कहा, 'मैंने उनकी गर्भावस्था की शुरुआत में तीन महीने तक देखभाल की थी। जिन रिपोर्टों को मैंने देखा था उनमें भ्रूण के विकास को लेकर कुछ संकेत दिए गए थे।'


हालांकि, डायग्नोस्टिक लैब से जुड़े डॉक्टरों का कहना है कि स्कैन रिपोर्ट में कोई त्रुटि नहीं थी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

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