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UNICEF: विस्थापन के कारण विश्व में चार करोड़ बच्चों को मजबूरी में छोड़ना पड़ा घर, जानिए क्या है कारण

Sat, 24 Jun 2023 06:36 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Sat, 24 Jun 2023 06:36 AM IST
सार

यूनिसेफ के अनुसार, विस्थापित हुए 4.33 करोड़ बच्चों में से करीब 60 फीसदी हिंसा और संघर्ष का शिकार हुए। यूक्रेन युद्ध की वजह से 20 लाख से अधिक यूक्रेनी बच्चों को माता-पिता और परिवार से बिछड़ कर अपने देश से भागने पर मजबूर होना पड़ा है।

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four crore children in the world were forced to leave their homes Due to displacement
File Photo. - फोटो : unicef india

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के मुताबिक, 2022 में 4.33 करोड़ बच्चों को जबरन विस्थापित होने की वेदना झेलनी पड़ी। तमाम प्रयासों के बावजूद बच्चों के विस्थापन का यह आंकड़ा अब तक का रिकॉर्ड है। यूनिसेफ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अपने घरों को छोड़ जबरन विस्थापित हुए बच्चों की यह संख्या पिछले दशक के मुकाबले बढ़कर दोगुनी हो गई है।

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रिपोर्ट के अनुसार, विस्थापित बच्चों में से 1.2 करोड़ बच्चे वे हैं, जिनको जलवायु परिवर्तन से जुड़ी बाढ़, सूखा और तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण अपना घर-बार छोड़ना पड़ा। इन प्राकृतिक आपदाओं में 2022 के दौरान पाकिस्तान में आई बाढ़ और हार्न ऑफ अफ्रीका में पड़ा सूखा शामिल है। बच्चों के विस्थापन की यह वेदना कितनी दर्दनाक है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इन बच्चों में से लाखों को अपना पूरा बचपन दर-दर की ठोकरें खाकर बिताने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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ये हैं कारण
यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसेल के अनुसार, विस्थापित बच्चों की संख्या में होने वाली यह वृद्धि सीधे तौर पर दुनियाभर में चल रहे संघर्ष, हिंसा और जलवायु आपदाओं से जुड़ी है। यह समस्या शरणार्थी और आंतरिक रूप से विस्थापित बच्चों के कल्याण, शिक्षा और समग्र विकास की सुरक्षा के लिए कई सरकारों द्वारा किए गए अपर्याप्त प्रयासों को भी रेखांकित करती है।

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60% हिंसा और संघर्ष के शिकार
यूनिसेफ के अनुसार, विस्थापित हुए 4.33 करोड़ बच्चों में से करीब 60 फीसदी हिंसा और संघर्ष का शिकार हुए। यूक्रेन युद्ध की वजह से 20 लाख से अधिक यूक्रेनी बच्चों को माता-पिता और परिवार से बिछड़ कर अपने देश से भागने पर मजबूर होना पड़ा है। इस युद्ध ने 10 लाख से अधिक बच्चों को स्थायी रूप से विस्थापित बना दिया है। इसके अलावा शरणार्थी और शरण चाहने वाले बच्चों की संख्या रिकॉर्ड 1.75 करोड़ है। केवल सूडान में ही अब तक संघर्ष के कारण करीब 9.5 लाख बच्चे विस्थापित हो चुके हैं।

रिकॉर्ड 10.84 करोड़ हुए विस्थापित
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) की रिपोर्ट के मुताबिक, जलवायु प्रेरित उथल-पुथल और संघर्षों के बीच 2022 में पहले से कहीं ज्यादा लोगों को विस्थापन की पीड़ा झेलनी पड़ी है। 2022 के अंत तक युद्ध, उत्पीड़न, हिंसा और मानवाधिकारों के हनन के कारण विस्थापित हुए लोगों की संख्या रिकॉर्ड 10.84 करोड़ तक पहुंच गई थी। यह पिछले वर्ष की तुलना में करीब 1.9 करोड़ ज्यादा है। विस्थापित हुए लोगों में से 40 फीसदी से अधिक बच्चे हैं।

3.53 करोड़ ने सुरक्षा के लिए पार की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं...वैश्विक स्तर पर कुल शरणार्थियों में से 3.53 करोड़ ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार किया था। वहीं, इसका एक बड़ा हिस्सा करीब 58 फीसदी (6.25 करोड़) ऐसा है जो संघर्ष एवं हिंसा के कारण आंतरिक रूप से विस्थापित हुए। करीब 3.26 करोड़ लोगों को चरम मौसमी घटनाओं के कारण अपने देश में ही विस्थापित होना पड़ा। यूएनएचसीआर की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों के लिए विस्थापन अक्सर लंबा चलने वाला समय होता है।

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