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चकाचौंध से दूर रहने वाले एडमिरल रामदास राजनीतिक विवादों में कूद पड़ते हैं, आखिर क्यों?

Fri, 10 May 2019 09:29 PM IST
Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: Jitendra Bhardwaj Updated Fri, 10 May 2019 09:29 PM IST
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former navy chief admiral L Ramdas speaks on political controversies
पूर्व नौसेना अध्यक्ष एडमिरल लक्ष्मीनारायण रामदास - फोटो : PTI
पूर्व नौसेना अध्यक्ष एडमिरल लक्ष्मीनारायण रामदास सामान्य तौर पर राजनीतिक या अन्य किसी तरह की चकाचौंध से दूर ही रहते हैं, लेकिन जब बात सेना की हो तो वे बेहिचक उसमें कूद जाते हैं। इससे पहले भी उन्होंने पुलवामा हमला और बालाकोट एयर स्ट्राइक के राजनीतिक इस्तेमाल पर सख्त आपत्ति जताई थी। इस बाबत उन्होंने निर्वाचन आयोग को एक पत्र भी लिख दिया था। रामदास कहते हैं कि मैं किसी राजनीतिक पार्टी में नहीं हूं, लेकिन कोई हमारी सेनाओं के बाबत कुछ ऐसा कहे कि जिससे जवानों का मनोबल कमजोर होता हो तो किसी को चुप भी नहीं बैठना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी पर आरोप लगाया कि वे आईएनएस विराट पर छुट्टियां मनाने गए थे तो रामदास ने इसे ग़लत बता दिया। उनका कहना है कि राजीव गांधी का वह सरकारी दौरा था। उनके साथ कोई विदेशी नहीं था। 
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आपको ध्यान होगा कि आम आदमी पार्टी के गठन के बाद जब अरविंद केजरीवाल पहली बार नई दिल्ली सीट से नामांकन पत्र भरने के लिए जाम नगर स्थित निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय पहुंचे तो उनके बगल वाली सीट पर एडमिरल रामदास बैठे थे। वही नीले रंग की वेगनार कार, जिसमें केजरीवाल सीएम बनने के बाद भी चलते थे। उस वक्त चूंकि केजरीवाल आंदोलन से निकल कर राजनीति में आए थे, लिहाजा एडमिरल रामदास को लगा कि वे कुछ अच्छा कर सकते हैं, इसलिए उन्होंने केजरीवाल का साथ दिया। वे चुनाव प्रचार के लिए दिल्ली आए। केजरीवाल ने उन्हें पार्टी का आंतरिक लोकपाल बना दिया। 
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बाद में जब प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और प्रो. आनंद कुमार जैसे कई नेताओं को आप से बाहर का रास्ता दिखाया गया तो रामदास व केजरीवाल के बीच दूरी बढ़ती चली गई। यहां तक कि कुछ समय बाद रामदास को आंतरिक लोकपाल के पद से मुक्त कर दिया गया। उन्होंने आप संयोजक को एक पत्र लिखकर कहा था कि अब दूसरी पार्टियों और आप में कोई फर्क नहीं रह गया है। 
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रमन मैगसेसे अवार्ड और दूसरे सम्मान पीवीएसएम, एवीएसएम, वीआरसी और वीएसएम से नवाजे गए रामदास ने आम आदमी पार्टी से अपनी दूरियों के बीच अब एक बार फिर लोकसभा प्रत्याशी अतिशी मार्लेना और राघव चड्ढा के लिए एक वीडियो संदेश जारी कर इन्हें विजयी बनाने की अपील की है। लक्ष्मी नारायण रामदास और उनकी पत्नी ललिता रामदास का कहना है कि ये दोनों युवा हैं। इन्होंने अच्छा काम किया है। आज की राजनीति में इन जैसे युवाओं को ही आगे आना चाहिए। 

पूर्व सेनाध्यक्ष बिक्रम सिंह की नियुक्ति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक गए

बिक्रम सिंह की नियुक्ति कई तरह के विवादों में आ गई थी। सिंह की नियुक्ति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका लगाई गई। इस पर एडमिरल रामदास ने भी हस्ताक्षर कर दिए थे। एक राजनीतिक दल विशेष ने कथित तौर पर जब पुलवामा हमले और बालाकोट एयर स्टाइक का राजनीतिकरण करने का प्रयास किया तो एक बार फिर रामदास अपने एकांतवास से बाहर निकल आए। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर इसका विरोध किया और बाद में चुनाव आयोग को एक पत्र लिखकर इस मामले में अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने लिखा कि सेना का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए न हो। एडमिरल रामदास मुंबई के अलीबाग इलाके में रहते हैं। 
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