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Bombay High Court: पूर्व जज पुष्पा गनेडीवाला को मिलेगी हाईकोर्ट जज के बराबर पेंशन, उच्च न्यायालय का आदेश

Thu, 13 Mar 2025 01:13 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: बशु जैन Updated Thu, 13 Mar 2025 01:13 PM IST
सार

गनेडीवाला ने 19 जुलाई 2023 को बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के समक्ष एक याचिका दायर की थी। इसमें उच्च न्यायालय (मूल पक्ष) रजिस्ट्री द्वारा दो नवंबर, 2022 को जारी एक पत्र को चुनौती दी गई है। पत्र में कहा गया था कि वह उच्च न्यायालय के जज के रूप में पेंशन और अन्य लाभों के लिए पात्र या हकदार नहीं हैं।

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Former judge Pushpa Ganediwala will get pension equal to that of a High Court judge, High Court order
बॉम्बे हाईकोर्ट। - फोटो : ANI

विस्तार

पॉक्सो एक्ट को लेकर विवादास्पद फैसले पर आलोचना का सामना करने वाली बॉम्बे हाईकोर्ट की पूर्व जज पुष्पा गनेडीवाला को अब हाईकोर्ट के पूर्व जज के बराबर पेंशन मिलेगी। पूर्व जज की याचिका पर हाईकोर्ट के आलोक अराधे और न्यायमूर्ति भारती डांगरे की खंडपीठ ने नवंबर 2022 के उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार के पत्र को रद्द कर दिया। कोर्ट ने रजिस्ट्रार कार्यालय को आदेश दिया कि रजिस्ट्रार दो महीने के भीतर फरवरी 2022 से छह प्रतिशत ब्याज के साथ गनेडीवाला की पेंशन तय करे।

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गनेडीवाला ने 19 जुलाई 2023 को बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के समक्ष एक याचिका दायर की थी। इसमें उच्च न्यायालय (मूल पक्ष) रजिस्ट्री द्वारा दो नवंबर, 2022 को जारी एक पत्र को चुनौती दी गई है। पत्र में कहा गया था कि वह उच्च न्यायालय के जज के रूप में पेंशन और अन्य लाभों के लिए पात्र या हकदार नहीं हैं।
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गनेडीवाला ने उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में उन्हें पेंशन देने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा था कि इस तथ्य पर गौर नहीं किया जाना चाहिए कि उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली है या फिर आयु सीमा पूरी होने के बाद सेवानिृत्त हुई हैं। जनवरी और फरवरी 2021 में संदेहास्पद फैसलों के बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने गनेडीवाला को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की अपनी सिफारिश वापस ले ली थी और इसके बजाय अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया था। उनकी कार्यकाल फरवरी 2022 में समाप्त हो गया था।
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यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र: ‘स्किन टू स्किन कॉन्टैक्ट’ का विवादित फैसला देने वाली जज पुष्पा गनेडीवाला ने दिया इस्तीफा

इसका मतलब यह हुआ कि गनेडीवाला को 12 फरवरी 2022 को अपनी अतिरिक्त न्यायधीश पद के अंत में जिला सत्र न्यायाधीश के रूप में वापस जाना था। लेकिन, अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में उनके कार्यकाल में कोई विस्तार नहीं दिए जाने और उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश नियुक्त नहीं किए जाने के कारण गनेडीवाला ने इस्तीफा दे दिया था। 

गनेडीवाला ने कहा, मुझे कोई पेंशन नहीं मिल रही है। पेंशन से इनकार करने में उत्तरदाताओं की ओर से पूरा दृष्टिकोण मनमाना और कानून को अस्थिर करने वाला है। याचिका के अनुसार, गनेडीवाला को 26 अक्टूबर, 2007 को जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। 2019 में उन्हें बॉम्बे उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। गनेडीवाला ने अपनी याचिका में कहा है कि जनवरी 2021 में शीर्ष अदालत ने स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए उनके आवेदन को मंजूरी दे दी थी। हालांकि, बाद में सिफारिश वापस ले ली गई। 

याचिका में दावा किया गया है कि उन्होंने करीब तीन साल तक उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में काम किया था। इसमें कहा गया है कि उन्होंने उच्च न्यायालय रजिस्ट्री में पेंशन के लिए आवेदन किया था, लेकिन निर्णय लिया गया कि चूंकि वह उच्च न्यायालय न्यायाधीश के रूप में सेवानिवृत्त नहीं हुई थी, इसलिए वह समान रैंक पेंशन की हकदार नहीं हैं।


यह भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम: ‘स्किन टू स्किन’ फैसला देने वाली बॉम्बे हाईकोर्ट की अस्थायी जज पुष्पा गनेडीवाला को स्थायी बनाने की फिलहाल मंजूरी नहीं

इस फैसले के बाद हुआ था हंगामा
गनेडीवाला को कई फैसलों के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा था। उन्होंने फैसला सुनाया था कि पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत यौन उत्पीड़न के अपराध के रूप में विचार करने के लिए 'यौन इरादे से त्वचा से त्वचा का संपर्क' होना चाहिए तभी पॉक्सो अधिनियम के तहत यौन उत्पीड़न का अपराध माना जाएगा। एक नाबालिग लड़की का हाथ पकड़ना और उसकी पैंट की जिप खोलना पॉस्को अधिनियम के तहत "यौन उत्पीड़न" की परिभाषा में नहीं आता है। इस फैसले के बाद खूब हंगामा हुआ था। 

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