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पूर्व जज कोकजे बोले- न्यायालय नहीं, जनता-संसद सर्वोच्च, कोर्ट के पास सिर्फ समीक्षा का अधिकार
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 09 Dec 2018 07:10 PM IST
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विष्णु सदाशिव कोकजे
राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके विष्णु सदाशिव कोकजे ने कहा कि लोकतंत्र में जनता और जनता के द्वारा चुनी गई संसद सर्वोच्च है। सर्वोच्च न्यायालय ‘सर्वोच्च’ नहीं होता और उसके पास सिर्फ संसद द्वारा बनाये गये कानून की समीक्षा करने का ‘अधिकार’ है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार को जनता की भावनाओं की कदर करते हुए राममंदिर निर्माण के लिए कानून बनाना चाहिए या अध्यादेश लाना चाहिए। अनंतकाल तक इस मुद्दे पर न्यायालय के फैसले का इंतज़ार नहीं किया जा सकता।
विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) द्वारा रविवार को दिल्ली में बुलाई गई धर्मसंसद में उपस्थित लाखों की भीड़ को संबोधित करते हुए कोकजे ने कहा कि यह भ्रांति फैलाई जा रही है कि मस्जिद को तोड़कर मंदिर की नींव रखी गयी जबकि अयोध्या में हुई खुदाइयों से यह स्पष्ट है कि वहां एक मंदिर था जिसे तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने इस तथ्य को स्वीकार भी किया है। ऐसे में वह पूर्व में हुए एक अतिक्रमण को ढहाने की कार्रवाई थी। दुर्भाग्य है कि एक अतिक्रमणकारी पक्ष को भी अयोध्या में एक तिहाई जमीन दे दी गई जिसके खिलाफ हम सर्वोच्च अदालत में अपील कर चुके हैं। अब अदालत और सरकार को जनभावनाओं का सम्मान करते हुए मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति और सर्वोच्च अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता रह चुके विहिप के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष कोकजे ने कहा कि हिन्दुओं के जातियों में बंटे होने के कारण उनकी मांगों की उपेक्षा होती रही है। अगर वे इकट्ठे रहें तो कोई भी उनकी मांगों को अनदेखा नहीं कर सकता। जातिवाद समाज को कमजोर करता है और इससे बिखराव होता है। इसे हर हाल में रोका जाना चाहिए।
साडा हक एथे रख
राममंदिर के लिए लगातार नारेबाजी कर रहे रामभक्तों को सम्बोधित करते हुए दीपांकर जी महाराज ने कहा कि हिन्दू समाज कोई भीख नहीं मांग रहा है। उसे उसका हक चाहिए। उन्होंने पंजाबी की एक कहावत साड्डा हक, एथे रख को बोलते हुए कहा कि अब और इंतज़ार नहीं किया जायेगा, किसी भी कीमत पर राममंदिर का निर्माण अब टाला नहीं जायेगा।
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विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) द्वारा रविवार को दिल्ली में बुलाई गई धर्मसंसद में उपस्थित लाखों की भीड़ को संबोधित करते हुए कोकजे ने कहा कि यह भ्रांति फैलाई जा रही है कि मस्जिद को तोड़कर मंदिर की नींव रखी गयी जबकि अयोध्या में हुई खुदाइयों से यह स्पष्ट है कि वहां एक मंदिर था जिसे तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने इस तथ्य को स्वीकार भी किया है। ऐसे में वह पूर्व में हुए एक अतिक्रमण को ढहाने की कार्रवाई थी। दुर्भाग्य है कि एक अतिक्रमणकारी पक्ष को भी अयोध्या में एक तिहाई जमीन दे दी गई जिसके खिलाफ हम सर्वोच्च अदालत में अपील कर चुके हैं। अब अदालत और सरकार को जनभावनाओं का सम्मान करते हुए मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति और सर्वोच्च अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता रह चुके विहिप के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष कोकजे ने कहा कि हिन्दुओं के जातियों में बंटे होने के कारण उनकी मांगों की उपेक्षा होती रही है। अगर वे इकट्ठे रहें तो कोई भी उनकी मांगों को अनदेखा नहीं कर सकता। जातिवाद समाज को कमजोर करता है और इससे बिखराव होता है। इसे हर हाल में रोका जाना चाहिए।
साडा हक एथे रख
राममंदिर के लिए लगातार नारेबाजी कर रहे रामभक्तों को सम्बोधित करते हुए दीपांकर जी महाराज ने कहा कि हिन्दू समाज कोई भीख नहीं मांग रहा है। उसे उसका हक चाहिए। उन्होंने पंजाबी की एक कहावत साड्डा हक, एथे रख को बोलते हुए कहा कि अब और इंतज़ार नहीं किया जायेगा, किसी भी कीमत पर राममंदिर का निर्माण अब टाला नहीं जायेगा।