चिंता: पूर्व नौकरशाहों का पीएम मोदी को खुला पत्र, लक्षद्वीप में जो हो रहा..वह परेशान करनेवाला घटनाक्रम
पूर्व नौकरशाहों ने पीएम को फिर लेटर लिखा है। नौकरशाहों ने केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप को लेकर चिंता जताई है। पत्र में लिखा कि विकास के नाम पर वहां जो कुछ हो रहा है वह सही नहीं है। इससे पहले पूर्व अधिकारियों ने पीएम केयर्स फंड पर भी सवाल उठाए थे।
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पूर्व नौकरशाहों ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला पत्र लिखा है। इस पत्र में लक्षद्वीप के हालत पर ध्यान देने का आग्रह किया है। इससे पहले पूर्व अधिकारियों ने पीएम केयर्स फंड में पारदर्शिता लाने के लिए ओपन लेटर लिखा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शनिवार को 93 पूर्व सिविल सेवा अधिकारियों ने अपने खुले पत्र में केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप में हाल के घटनाक्रम पर "गहरी चिंता" व्यक्त की। संवैधानिक आचरण समूह (सीसीजी) की अगुवाई में लिखे गए पत्र में प्रधानमंत्री से यहां एक ऐसा उचित विकास मॉडल सुनिश्चित करने की अपील की गई है जिसके लिए यहां के निवासियों से विचार लिए जाएं, जिसमें सुरक्षा, बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा और अच्छी शासन प्रणाली समेत अन्य चीजें शामिल हों।
पत्र में कहा गया है कि भारत के मानचित्र में लक्षद्वीप सांस्कृतिक विविधताओं से भरा एख अलग स्थान रखता है। प्रशासक पी के पटेल की ओर से पेश किए गए तीन नियमों के मसौदे पर प्रकाश डाला गया। जिसपर पिछले साल से विवाद चल रहा है।
कांग्रेस ने साधा निशाना
वहीं, कांग्रेस के केरल और लक्षद्वीप प्रभारी तारिक अनवर ने तैयार मसौदों को केंद्रशासित प्रदेश के लिए घातक करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मामले में तत्काल दखल देकर प्रफुल्ल पटेल को प्रशासक के पद से हटाया जाना चाहिए। प्रफुल्ल पटेल पर आरोप है कि स्थानीय जन प्रतिनिधियों और लोगों से बिना विचार-विमर्श किए मनमाने ढंग से फैसले तैयार कर दिए हैं। फैसले के कारण वहां के लोग उनका विरोध कर रहे हैं
पीएम के अलावा इन मंत्रियों को भी भेजी गई कॉपी
इस पत्र की प्रति गृह मंत्री अमित शाह और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को भी भेजी गई। इस पत्र पर पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन, प्रसार भारती के पूर्व सीईओ जवाहर सरकार, पूर्व विदेश सचिव सुजाता सिंह, प्रधानमंत्री के पूर्व सलाहकार टी के ए नायर समेत 93 लोगों के हस्ताक्षर हैं।