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SC Panel: सुप्रीम कोर्ट के पैनल ने कहा- केंद्र की मंजूरी के बिना दिल्ली कौशल विवि के लिए आवंटित की गई वन भूमि

Thu, 25 Aug 2022 04:08 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 25 Aug 2022 04:08 PM IST
सार

वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के अनुसार, गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए वन भूमि के गैर-आरक्षण या परिवर्तन (डायवर्जन) के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी आवश्यक है।

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Forest land allotted for Delhi Skill University without Centre's approval SC panel
Supreme Court - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने कहा है कि शहर सरकार (दिल्ली सरकार) के पंचायत विभाग ने दक्षिणी दिल्ली के जौनापुर में एक विश्व स्तरीय कौशल केंद्र और दिल्ली कौशल विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना वन भूमि आवंटित की है। 
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वन-भूमि में परिवर्तन के लिए केंद्र की मंजूरी आवश्यक
वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के अनुसार, गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए वन भूमि के गैर-आरक्षण या बदलाव (डायवर्जन) के लिए केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक है।  
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'बार-बार याद दिलाने के बावजूद नहीं दिया जवाब'
सीईसी ने कहा कि उसने पिछले साल जुलाई में दिल्ली के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा था और शहर सरकार ने 'बार-बार याद दिलाने के बावजूद' जवाब नहीं दिया था। 
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डीडीए के रिकॉर्ड में 'आवासीय' के रूप में दिखाई गई वन भूमि
इसमें कहा गया है कि प्रस्तावित कौशल केंद्र और दिल्ली कौशल विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए जौनापुर में 37.11 एकड़ की वन भूमि, प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा विभाग को हस्तांतरित होने के बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के रिकॉर्ड में 'आवासीय' के रूप में दिखायी गयी है। 

विचाराधीन भूमि 'वन भूमि' है : दिल्ली वन विभाग
इसने 22 अगस्त को दिल्ली के मुख्य सचिव को लिखे पत्र में कहा, "वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 और सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न आदेशों का उल्लंघन करते हुए केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना निदेशक, पंचायत, एनसीटी दिल्ली सरकार द्वारा गैर वन उपयोग के लिए वन भूमि आवंटित की गई है।  दिल्ली वन विभाग ने सीईसी को यह भी बताया है कि विचाराधीन भूमि 'वन भूमि' है।

पत्र में आगे कहा गया, बैठक में दिल्ली सरकार प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने फिर से पुष्टि की कि विश्व स्तरीय कौशल केंद्र और दिल्ली कौशल विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए जौनापुर में आवंटित 37.11 एकड़ भूमि भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 4 के तहत 1996 में जारी अधिसूचना का हिस्सा है। 
 
सीईसी ने कहा-  बिना मंजूरी के न आवंटित की जाए कोई वन भूमि
सीईसी ने प्रधान मुख्य वन सचिव को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि अधिसूचित क्षेत्रों के संबंध में वन भूमि का भूमि उपयोग डीडीए और राजस्व विभाग सहित सभी सरकारी रिकॉर्ड में 'वन' में बदल दिया जाए। इसने प्रधान मुख्य वन सचिव को संबंधित विभागों को केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बिना गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए कोई वन भूमि आवंटित न करने का निर्देश देने के लिए भी कहा। 

दिसंबर 2019 में दिल्ली सरकार ने लगभग 254 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से जौनापुर गांव में एक विश्वस्तरीय कौशल केंद्र स्थापित करने के लिए शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। 


जौनापुर केंद्र में आतिथ्य और पर्यटन, खुदरा बिक्री, आईटी और आईटी-सक्षम सेवाएं, खाता- बैंकिंग और वित्त, खाद्य प्रसंस्करण, रसद, इलेक्ट्रॉनिक्स, उत्पादन और विनिर्माण, ऑटोमोबाइल, स्वास्थ्य और कल्याण विभागों में 500-500 सीटें होंगी। अभी दिल्ली के विवेक विहार, पूसा, द्वारका, पुष्प विहार, झंडेवालान, वजीरपुर और रजोकरी में ऐसे सात केंद्र संचालित हो रहे हैं। 
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