भारत-चीन को सौहार्द के 'एक्सप्रेस-वे' पर लाना चाहते हैं विदेश मंत्री एस. जयशंकर
- भारत, पड़ोसी देशों से मधुर संबंधों का रहा है पक्षधर
- लद्दाख में चीन के रुख से से ही बन सकेगी बात
विस्तार
भारत हमेशा से पड़ोसी देशों के साथ शांति और सौहार्द का पक्षधर रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पहले से ही इस नीति के हिमायती रहे हैं। विदेश मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि चीन के साथ भी भारत तनाव पूर्ण प्लेटफार्म से सौहार्द के एक्सप्रेस-वे पर लाने का पक्षधर है। इसी कड़ी में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी से गुरुवार को सवा घंटा बात की थी। बातचीत के दौरान उन्हें सितंबर 2020 में मास्को में हुई चर्चा तथा सहमति को याद दिलाया और यथाशीघ्र लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएएसी) के बाकी हिस्सों पर विसैन्यीकरण (डिसएंगेजमेंट) की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने पर बल दिया। भारतीय विदेश मंत्री इसे दोनों देशों के बीच में शांति, स्थिरता और सौहार्द के लिए सबसे अहम जरूरत बताई।
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार दोनों विदेश मंत्रियों के बीच वार्ता सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई। चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारतीय विदेश मंत्रालय के साथ तालमेल, तारतम्य, आपसी मुद्दों के समाधान अथवा एलएएसी पर सीमा प्रबंधन के उपायों, विश्वास बहाली की प्रक्रिया के लिए हॉट लाइन स्थापित करने पर सहमत हुए। इससे पहले दोनों विदेश मंत्री मास्को में सितंबर 2020 में मिले थे।
तब एस. जयशंकर ने अपने समकक्ष वांग यी से लद्दाख क्षेत्र में चीनी सेना द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा पर एकतरफा कार्रवाई करके इसकी अवधारणा बदलने के प्रयास पर चिंता जताई थी। विदेश मंत्री ने गुरुवार को हुई वार्ता में एक बार फिर रिश्तों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की स्थिति के कारण दोनों देशों के आपसी संबंधों को गहरा झटका लगा है। पहले से जारी विश्वास बहाली के मजबूत उपायों को गहरी ठेस पहुंची है। उन्होंने एक बार फिर जोर देकर कहा कि सीमा मुद्दे के समाधान में समय लग सकता है, लेकिन इस तरह के प्रयास और एक पक्षीय उकसावे, हिंसा की कार्रवाई का दोनों देशों के रिश्ते पर बहुत विपरीत असर पड़ता है। इसलिए इस तरह की स्थितियां किसी भी पक्ष के हित में नहीं हैं।
अब एलएएसी के बाकी हिस्से का समाधान जरूरी
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पैंगोंग क्षेत्र में सैन्य विसैन्यीकरण के प्रयासों तथा दोनों देशों के बीच में बनी सहमति का स्वागत किया। लेकिन उन्होंने इसी के साथ एलएएसी के बाकी हिस्सों से भी विसैन्यीकरण की प्रक्रिया, शांति बहाली के उपायों को शीघ्रता से शुरू किए जाने की वकालत की।
विदेश मंत्री ने कहा कि मास्को में दोनों विदेश मंत्रियों ने माना था कि सीमा पर तनाव की स्थिति किसी भी पक्ष के हित में नहीं है। सीमा पर शांति और स्थिरता की स्थापना के लिए दोनों पक्षों की सेना और राजनयिक स्तर पर संवाद जारी रहना चाहिए। यथाशीघ्र दोनों देशों की सेनाओं को आमने-सामने जैसी स्थिति से पीछे हटना और तनाव घटाना चाहिए।
इसी क्रम में दोनों देशों ने सैन्य और राजनयिक स्तर पर संवाद को बनाए रखा। इससे पैंगोंग क्षेत्र में विसैन्यीकरण में सफलता मिली है। अब यह जरूरी है कि इसी तरह के समाधान एलएएसी के बाकी हिस्सों पर लागू करके शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने पर तेजी से पहल हो।