Diplomacy: जमकर कूटनीतिक पारी खेल रहे विदेश मंत्री जयशंकर, पश्चिमी देशों के नखरों पर सुना रहे खरी-खरी
Diplomacy: विदेश मंत्री ने साफ कहा कि पश्चिम के देश पाकिस्तान परस्त रहे। पाकिस्तान पश्चिमी देशों की प्राथमिकता में रहा। कई पश्चिमी देश भारत को हथियारों आदि की आपूर्ति के मामले में कतराते थे लेकिन पाकिस्तान को सब आसानी से मिलता था। जबकि रूस ने कभी भारत के हितों को नुकसान नहीं पहुंचाया।
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मामला चाहे सस्ते तेल की खरीद रूस से खरीद का हो या फिर पश्चिम के देशों को खरी-खरी सुनाने का, विदेश मंत्री एस जयशंकर जमकर कूटनीतिक पारी खेल रहे हैं। विदेश मामले के जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान का बहाना लेकर रूस की बड़ाई कर रहे एस जयशंकर भारत के सामरिक साझीदार देश अमेरिका को भी इशारों में बड़ा संदेश दे रहे हैं। कुल मिलाकर कूटनीति की यह कोशिश भारत हितों की रक्षा ही है। विदेश मामलों के जानकार वरिष्ठ पत्रकार रंजीत कुमार कहते हैं कि बदली अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियों, युद्ध और आर्थिक हालात में विदेश मंत्री को भारतीय के बाजार की अहमियत पता है।
विदेश मंत्री क्यों कर रहे रूस की इतनी तारीफ?
रूस भारत का पुराना विश्वसनीय सामरिक और रणनीतिक साझीदार देश है। शीत के दौर से आज तक रूस ने भारत को न केवल तमाम कठिन समय में सहयोग और समर्थन किया है, बल्कि पाकिस्तान को लेकर अंतरराष्ट्रीय या द्विपक्षीय मामलों में भारत की आपत्तियों का भी सम्मान किया है। विदेश मंत्री के पास रूस से सस्ती दर पर तेल खरीदने पर पश्चिम देशों की आपत्ति का जवाब देने का यह सबसे बड़ा आधार है। हालांकि पिछले कुछ समय से रूस द्वारा सस्ती दर पर तेल देने का निर्णय लेने में हीलाहवाली करने पर भारत ने वेनेजुएला से कच्चे तेल के आयात को काफी बढ़ा दिया है। भारत इन कच्चे तेलों का शोधन के बाद निर्यात भी करता है और उससे भारतीय रिफानरी को आमदनी होती है। लेकिन अभी विदेश मंत्री एक तीर से दो निशाने साध रहे हैं। उनका एक निशाना यूरोप के कुछ देशों की तरफ है तो दूसरा अमेरिका के नखरे पर है।
क्या अमेरिका से तंग चल रहे भारत के कूटनीतिक रिश्ते?
कनाडा में सिख आतंकी निज्जर को वहां के दहशत गर्दों द्वारा मारे जाने के बाद से यह बदलाव आया है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर आरोप लगाया था कि नई दिल्ली ने अपने एजेंटों(अंडरकवर ऑपरेशन ) के जरिए इसे अंजाम दिया है। जस्टिन ट्रूडो ने इसे अपने देश की संप्रभुता पर खतरा बताया था। जस्टिन ट्रूडो ने जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर भी इस मुद्दे को हवा दी थी। इस पर अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भारत से स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया था। इसके कुछ समय बाद अमेरिका ने भारत पर एक और खालिस्तान समर्थक तथा सिख आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या के लिए षडयंत्र रचने का आरोप लगाया। चेतावनी जारी की। अमेरिका का कहना है कि उसने पन्नू की हत्या की साजिश को नाकाम कर दिया और भारत को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। भारत ने अमेरिका के इस तरह के आरोपों से साफ इनकार किया है और एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की है। इस बारे में भारत का कहना है कि अमेरिका ने कुछ इनपुट(आंतरिक सूचनाएं) साझा की हैं। भारत इनकी जांच कर रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार पन्नू की हत्या का षडयंत्र कुछ संगठित अपराधी गिरोहों, आतंकियों आदि ने रचा होगा।
अमेरिका के उप विदेश मंत्री रिचर्ड वर्मा ने भी इस पर बयान दिया है। वर्मा ने कहा कि अमेरिका पन्नू की हत्या की साजिश से जुड़े प्रकरण पर अपनी चिंताओं को भारत से साझा कर चुका है। भारत ने मामले की जांच के लिए समिति गठित की है। वर्मा ने कहा कि अमेरिका इस जांच समिति के निष्कर्षों की प्रतीक्षा कर रहा है। हालांकि रिचर्ड वर्मा ने भारत अमेरिका के संबंधों में गहराई का और उत्कृष्टता बताई। उन्होंने लाल सागर में हूती विद्रोहियों के आतंक से निबटने में भारतीय नौसेना की भी सराहना की। लेकिन इससे साफ है कि अमेरिका और भारत के रिश्ते में अभी कूटनीतिक पेंच फंसा है। वैसे भी गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति जो बाइडेन ने मेहमान बनने के लिए सैद्धांतिक सहमति दे दी थी, लेकिन बाद में अमेरिका में राष्ट्रपति पद के चुनावी साल समेत अन्य व्यस्तता का बहाना बनाकर आने से मना कर दिया था।
अमेरिकी विदेश उपमंत्री के चीन पर बयान के मायने क्या हैं?
अमेरिका के उप विदेश मंत्री वर्मा ने क्वाड (अमेरिका, जापान, भारत और आस्ट्रेलिया) को लेकर भी बयान दिया है। अपने बयान में उन्होंने कूटनीतिक लाइन का इस्तेमाल करते हुए कहा है कि क्वाड के गठन का मकसद चीन को रोकने के लिए नहीं है। इसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में शांति सुनिश्चित करना है। भारत भी इस बयान से कूटनीतिक रूप से सहमत है, लेकिन नई दिल्ली और जापान दोनों क्वॉड देशों के सम्मेलन की इच्छा रख रहे थे। आस्ट्रेलिया को इसमें कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन अमेरिका जी-20 शिखर सम्मेलन के बाद से सम्मेलन के आयोजन में कम रूचि दिखा रहा है। इसका कारण पन्नू प्रकरण के बाद पैदा हुए कूटनीतिक गतिरोध को भी माना जा रहा है। जबकि सच्चाई यह भी है क्वाड के गठन के पीछे अमेरिका का उद्देश्य चीन के साथ अपने अंतरराष्ट्रीय कारोबार की प्रतिद्वंदिता को साधना भी था। क्वाड का सदस्य देश जापान पड़ोसी देश की चीन लगातार विस्तारवादी नीति के खिलाफ रहता है।
जयशंकर के कूटनीतिक दांव-पेंच के मायने
रंजीत कुमार भी मानते हैं कि कच्चे तेल के मामले में रूस के साथ खुले तौर खड़ा होकर भारत एक साथ कई निशाने साध रहा है। इसका एक मकसद अमेरिका समेत कुछ देशों को संदेश देना भी है। विदेश मंत्री ने साफ कहा कि पश्चिम के देश पाकिस्तान परस्त रहे। पाकिस्तान पश्चिमी देशों की प्राथमिकता में रहा। कई पश्चिमी देश भारत को हथियारों आदि की आपूर्ति के मामले में कतराते थे लेकिन पाकिस्तान को सब आसानी से मिलता था। जबकि रूस ने कभी भारत के हितों को नुकसान नहीं पहुंचाया। जर्मनी के एक अखबार को साक्षात्कार देते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि इस तरह की स्थितियों(पश्चिमी देशों की प्राथमिकता) में बदलाव 10-15 वर्षों में आया। उन्होंने कहा कि अमेरिका से रक्षा सौदों की गतिशीलता ने रक्षा सौदों को विविधतापूर्ण बना दिया।
जयशंकर ने कच्चे तेल के मामले में म्यूनिख में यूरोपीय देशों को भी संदेश दे दिया। उन्होंने कहा कि चीन के साथ हमारे राजनीतिक और सैन्य रिश्ते बहुत कठिन रहे हैं। जयशंकर ने कहा कि जैसे वो(यूरोपीय देश) चीन के मामले में भारत के नजरिए से सहमत नहीं हो सकते, उसी तरह भारत भी रूस के मामले में यूरोप के नजरिए से पूरी तरह सहमत नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि इसे यूरोपीय देशों को समझना चाहिए।
दौर भारत और भारत के बाजार का है
भारत ने अंतरराष्ट्रीय निवेश के लिए इको सिस्टम को विकसित किया है। भारत को पता है कि उसका बाजार और देश में व्यापार, निवेश, कारोबार के अनुकूल वातावरण दुनिया के देशों के लिए महत्वपूर्ण है। पूर्व एयर वाइस मार्शल एनबी सिंह कहते हैं कि इसे आप भारत के लिए गोल्डेन चांस कह सकते हैं, क्योंकि दुनिया के शक्तिशाली देश अभी युद्ध, तनाव और भू-राजनीतिक परिस्थितियों में उलझे हैं। वल्र्ड आर्डर थोड़ा बिगड़ा हुआ है। एक के बाद एक बड़ी अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो रही है। जापान ने मंदी की घोषणा कर दी है। चीन में 2023 में 20 साल पहले 1993 में हुए अंतरराष्ट्रीय निवेश से भी कम निवेश आया। बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियां शिप्ट कर रही हैं और उनके विकल्प में भारत भी एक है। टाटा कंसल्टेंसी से जुड़े वरिष्ठ सदस्य ने कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर प्लांट का लगना कोई छोटी घटना है क्या? सूत्र का कहना है कि जर्मनी ने अर्थव्यवस्था की रेटिंग में जापान का स्थान ले लिया। उसकी भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। दुनिया के देश तो युद्ध और तनाव में उलझे हैं। ब्रिटेन की जीडीपी लगातार सिकुड़ रही है। इसलिए निवेश के बड़े विकल्प के रूप में भारत के उभरने की पूरी संभावना है। पूर्व राजनयिक एसके शर्मा कहते हैं कि दौर बदल चुका है। अब किसी को भी भारत को नजरअंदाज करना मुश्किल है।