सवाल: भारत के आम चुनाव को प्रभावित करने में जुटा विदेशी मीडिया? ट्विटर की कार्रवाई से भाजपा नेता आशंकित
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में भी चीन और वामपंथी मीडिया पर मतदाताओं को प्रभावित करने के आरोप लगे थे। अब भारत में ट्विटर की कार्रवाइयों पर तीखे सवाल उठा रहे हैं भाजपा नेता
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पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया था कि ट्विटर और अमेरिका का वामपंथी मीडिया उन्हें निशाना बनाने की कोशिश कर रहा है। इन आरोपों की सच्चाई चाहे जो हो, लेकिन दुनिया ने देखा कि अमेरिकी चुनावों में डोनाल्ड ट्रंप की करारी हार हुई और जो बाइडन अमेरिका के राष्ट्रपति बने। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या भारत के अगले आम चुनाव को भी प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है?
विदेशी मीडिया में भी भारत सरकार के कामकाज के तरीके को लेकर काफी सवाल उठ रहे हैं। क्या इनका अगले आम चुनाव से कोई संबंध हो सकता है? भाजपा नेताओं ने अभी से इस बात की आशंका जतानी शुरू कर दी है।
भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय कह चुके हैं कि विदेशी मीडिया में भारत की छवि को जानबूझकर प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा है कि विदेशी मीडिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को नकारात्मक रूप से पेश कर अगले आम चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने विदेशी मीडिया में कोरोना मैनेजमेंट पर मोदी सरकार पर उठे सवालों के बाद यह टिप्पणी की थी।
ट्रंप के आरोपों का जवाब देते हुए ट्विटर ने यह कहा था-
'द वाशिंगटन पोस्ट' की एक खबर के अनुसार तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के आरोपों का जवाब देते हुए ट्विटर के चीफ एग्जीक्यूटिव जैक डोरसे (Jack Dorsey) ने अगस्त 2018 में यह स्वीकार किया था कि उनकी सोच वामपंथी है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि उनकी कंपनी में काम करने वाले ज्यादातर कर्मचारी वामपंथी विचारधारा के हैं।
हालांकि, डोरसे ने कहा था कि इसके कारण किसी अन्य विचारधारा की पोस्ट को गलत तरीके से प्रभावित करने की कोशिश नहीं की जाती। लेकिन डोरसे के इस बयान से डोनाल्ड ट्रंप के इन आरोपों को मजबूती मिल गई कि उनकी पोस्ट्स और उनकी पार्टी की विचारधारा के लोगों के पोस्ट्स से भेदभाव किया जा रहा है।
फेसबुक के अधिकारी भी सीनेट के सामने पेश हुए थे
केवल ट्विटर ने ही नहीं, फेसबुक के अधिकारियों ने भी अमेरिकी सीनेट की एक महत्त्वपूर्ण कमेटी के सामने पेश होकर अपने बारे में यह सफाई पेश की थी कि उनके मंच का किसी तरह से दुरूपयोग नहीं किया जाएगा। हालांकि, कंपनियों के बयान से डेमोक्रेट्स और कंजर्वेटिव दोनों ही लोग सहमत नहीं थे।
ट्विटर को लेकर भाजपा के आरोप
भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रेम शुक्ला ने कहा कि ट्विटर की कार्रवाई बेहद अराजकतावादी है। यह समाज के बीच घृणा-द्वेष फैलाने वाली और एकतरफा है। अपने इस अराजक रवैये से ट्विटर लोगों के विचार और अभिव्यक्ति को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। जिस तरह से केवल एक ही विचारधारा के लोगों के ट्वीट के साथ छेड़छाड़ हो रही है, उसे देखते हुए ट्विटर की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं और इसके लिए उस पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
आरएसएस के नेता राजीव तुली ने अमर उजाला से कहा कि ट्विटर की हाल ही कि गतिविधियों को देखने के बाद उसके इरादों के प्रति संदेह पैदा हो रहा है। ट्विटर ने इसी दौरान वामपंथी विचारधारा से जुड़े अनेक विभाजनकारी पोस्ट्स पर भी कोई कार्रवाई नहीं की है तो वहीं उसने राष्ट्रवादी विचारधारा के लोगों की पोस्ट्स पर अवांछित टिप्पणी की है। इससे एक तरह से राष्ट्रवादी लोगों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने की कोशिश हुई है और इसे राष्ट्रवादी लोगों को आम लोगों के बीच अविश्वसनीय साबित करने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। सरकार को इस मामले पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
ताजा मामला क्या है
शनिवार 5 जून को सुबह ट्विटर ने उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के ट्विटर अकाउंट से ब्लू टिक हटा दिया। इस पर विवाद बढ़ा तो कुछ देर बाद ट्विटर ने उपराष्ट्रपति के अकाउंट्स पर ब्लू टिक वापस कर दिया, लेकिन इसी बीच आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, आरएसएस नेता अरुण कुमार, सुरेश सोनी और सुरेश जोशी के ट्विटर अकाउंट्स पर से भी ब्लू टिक हटा दिया गया। इससे विवाद बढ़ गया।
नई सोशल मीडिया पालिसी को लेकर पहले ही सरकार और ट्विटर के बीच ठनी हुई है। केंद्र सरकार सभी कंपनियों को आईटी नियम मानने को बाध्य कर रही है तो ट्विटर ने इसे लोगों की निजता से हनन बताकर इसे मानने से इनकार किया है। वह इसके खिलाफ अदालत में अपील कर चुकी है।
ट्विटर ने इस पर सफाई दी है कि जो एकाउंट्स लंबे समय से निष्क्रिय थे, उन पर इस तरह की कार्रवाई की गई है। हालांकि, इसके बाद भी ट्विटर ने उपराष्ट्रपति के अकाउंट पर ब्लू टिक दुबारा लगा दिया। लेकिन यह करके ट्विटर ने एक विवाद को शुरू कर दिया है जिसकी गूँज आगे आने वाले चुनाव तक सुनाई पड़ती रहेगी।