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Hindi News ›   India News ›   For mountain warfare along China border, Indian Army looking at developing 'Zorawar' light tanks

Zorawar Light Tanks: चीन से लगी पर्वतीय सीमा पर खास सुरक्षा, सेना के लिए हल्के टैंक 'जोरावर' बनाने की तैयारी

Fri, 26 Aug 2022 09:34 PM IST
Amit Mandal एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Fri, 26 Aug 2022 09:34 PM IST
सार

यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक संघर्ष के कारण आपूर्ति श्रृंखला में आ रही कमियों को देखते हुए भारतीय सेना के लिए स्वदेशी रूप से हल्के टैंक को डिजाइन और विकसित करना जरूरी है।

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For mountain warfare along China border, Indian Army looking at developing 'Zorawar' light tanks
Indian army tanks - फोटो : ANI

विस्तार

चीन से लगी पर्वतीय सीमाओं में टैंक युद्ध की तैयारी के उद्देश्य से भारतीय सेना ने अपने भविष्य के हल्के टैंक के लिए विनिर्देश जारी किए हैं जिसे 'जोरावर' नाम दिया गया है। टैंक का नाम महान पूर्व डोगरा सेना के जनरल के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने तिब्बत में कई सफल जीत का नेतृत्व किया था, जिसे अब चीनी सेना द्वारा नियंत्रित किया जाता है। रक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र, सीमांत इलाके और द्वीप क्षेत्रों के अलावा मैदानी, अर्ध-रेगिस्तान और रेगिस्तान में किसी भी संकट के मद्देनजर मध्यम युद्धक टैंकों की जरूरतों के देखते हुए अब इसे सेना में शामिल करना महत्वपूर्ण हो गया है। 

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भारतीय सेना के लिए स्वदेशी रूप से हल्के टैंक को विकसित करना जरूरी
उन्होंने कहा कि यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक संघर्ष के कारण आपूर्ति श्रृंखला में आ रही कमियों को देखते हुए भारतीय सेना के लिए स्वदेशी रूप से हल्के टैंक को डिजाइन और विकसित करना जरूरी है। भारतीय सेना ने परिचालन क्षेत्रों में काफी संख्या में टी -72 और टी -90 टैंकों को शामिल किया था, जिससे विरोधी चौंक गए थे और उन्हें पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा। हालांकि, ये टैंक मुख्य रूप से मैदानी और रेगिस्तानी इलाकों में संचालन के लिए डिजाइन किए गए थे और इनकी अपनी सीमाएं थीं। कच्छ के रण के सीमांत इलाके में तैनात होने पर उन्हें बाधा का सामना करना पड़ता है। सूत्रों ने कहा कि भारतीय सेना के पास पिछले सभी युद्धों में हल्के टैंक को फोर्स मल्टीप्लायर के रूप में सफलतापूर्वक नियोजित करने का अनुभव है।
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इन टैंकों ने जीत में निभाई अहम भूमिका 
द्वितीय विश्व युद्ध में कोहिमा की लड़ाई और 1947-48 में भारत-पाक युद्ध में नौशेरा, झंगर, राजौरी और खास तौर पर जोजिला में सबसे सफलतापूर्वक इस्तेमाल किए गए 254 भारतीय टैंक ब्रिगेड के स्टुअर्ट टैंक, 1962 में चुशुल और बोमडिला में एएमएक्स-13 टैंक, 1965 में चंब में एएमएक्स-13 टैंक और 1971 में पीटी -76 लाइट टैंक, ढाका युद्ध में पीटी -76 टैंक अग्रणी रहे। सूत्रों ने कहा कि मौजूदा खतरे और संभावित भविष्य के युद्धों की रूपरेखा ने नई चुनौतियों को जन्म दिया है, जिसके लिए भारतीय सेना को तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना में टैंकों की खूबियों में मध्यम और हल्के प्लेटफार्म की खासियतें और लचीलापन होना चाहिए।
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इस बीच भारतीय सेना ने दो भारतीय स्टार्टअप कंपनियों से स्वार्म ड्रोन खरीदे हैं। इसके अलावा भारतीय सेना ने एक मेक-2 केस, स्वायत्त निगरानी और सशस्त्र ड्रोन स्वार्म (ए-एसएडीएस) भी लिया है जिसमें कई सुधार और अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए अलग किस्म के ड्रोन शामिल हैं।   
 

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