फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   ITBP Boosts Drone Warfare Capabilities, Builds Underground Bunkers Along China Border

गलवां जैसी झड़प से निपटने की तैयारी: एलएसी पर ड्रोन से लेकर भूमिगत बंकर तक, आईटीबीपी का प्लान कितना दमदार?

Thu, 22 Oct 2026 11:25 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Thu, 22 Oct 2026 11:25 PM IST
सार

भारत-चीन सीमा पर तैनात आईटीबीपी ने ड्रोन युद्ध क्षमता बढ़ाने, भूमिगत बंकर बनाने और गलवां जैसी स्थिति से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण की तैयारी की है। 2027 तक पूरे बल को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है। आखिर आधुनिक तकनीक सीमा सुरक्षा की रणनीति को कैसे बदलेगी? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

विज्ञापन
ITBP Boosts Drone Warfare Capabilities, Builds Underground Bunkers Along China Border
आईटीबीपी का प्लान कितना दमदार? - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बल ने सभी सीमा बटालियनों में ड्रोन प्लाटून गठित की हैं। इसके साथ ही वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बड़े स्तर पर भूमिगत बंकर बनाने की तैयारी की जा रही है। गलवां घाटी जैसी परिस्थितियों का सामना करने के लिए जवानों को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से 'स्ट्राइक' नाम का नया प्रशिक्षण कोर्स भी तैयार किया गया है।

विज्ञापन


आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने गुरुवार को राजस्थान के अलवर स्थित बल के एक केंद्र में आयोजित अलंकरण समारोह के दौरान जवानों को संबोधित करते हुए ये जानकारी दी। उन्होंने कहा कि चीन जैसे शक्तिशाली पड़ोसी का मुकाबला करने के लिए पारंपरिक युद्ध के तरीकों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। इसलिए बल अपने हथियारों, वाहनों, सीमा चौकियों और आधुनिक युद्ध क्षमताओं को मजबूत कर रहा है। यह कार्यक्रम 24 अक्तूबर को मनाए जाने वाले आईटीबीपी के 65वें स्थापना दिवस से पहले आयोजित किया गया।
विज्ञापन


हर सीमा बटालियन में ड्रोन प्लाटून, 4,000 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी
आईटीबीपी प्रमुख ने बताया कि करीब 95 हजार जवानों वाले इस बल को सरकार से 400 करोड़ रुपये मिले हैं। इसमें से 70 प्रतिशत राशि ड्रोन युद्ध क्षमता बढ़ाने पर खर्च करने के लिए निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि अब प्रत्येक सीमा सुरक्षा बटालियन में ड्रोन प्लाटून मौजूद है। बल ड्रोन पायलटों को प्रशिक्षण देने के साथ खुद ड्रोन बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कपूर के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 4,000 करोड़ रुपये की एक बड़ी आधुनिकीकरण योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसमें से 1,000 करोड़ रुपये ड्रोन और ड्रोन रोधी प्रणालियों पर खर्च करने की योजना है। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि आधुनिक संघर्षों में ड्रोन तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उनके अनुसार, ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियां छोटे देशों को भी बड़ी सैन्य शक्तियों के खिलाफ प्रभावी चुनौती देने का अवसर देती हैं।

गलवां जैसी स्थिति से निपटेंगे जवान, 2027 तक पूरी फोर्स को प्रशिक्षण
आईटीबीपी ने जवानों की युद्ध क्षमता बढ़ाने के लिए 'स्ट्राइक' नाम का नया कोर्स तैयार किया है। इसका उद्देश्य गलवां घाटी जैसी परिस्थितियों में जवानों को बेहतर तरीके से मुकाबला करने के लिए तैयार करना है। महानिदेशक ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत पूरे बल को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य 2027 के अंत तक रखा गया है।

गौरतलब है कि जून 2020 में लद्दाख की गलवां घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस घटना में भारत के 20 जवानों की जान गई थी। चीन ने बाद में अपने चार सैनिकों की मौत की पुष्टि की थी। इसके अलावा, आईटीबीपी ने 'शौर्य कमांडो' नाम से एक नई लड़ाकू टीम भी गठित की है। कपूर के अनुसार, इन कमांडो ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के जवानों के साथ आमने-सामने की स्थिति के दौरान अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है। इन कमांडो को प्रत्येक सीमा बटालियन में तैनात करने की योजना है।

एलएसी पर बनेंगे भूमिगत बंकर, युद्ध के दौरान जवानों को मिलेगी सुरक्षा
आईटीबीपी चीन सीमा पर भूमिगत आश्रय स्थल और बंकर बनाने पर भी बड़े स्तर पर काम कर रही है। महानिदेशक ने कहा कि आधुनिक युद्ध की परिस्थितियों को देखते हुए इस तरह के ढांचे की जरूरत बढ़ गई है।

उन्होंने बताया कि युद्ध के दौरान जमीन के ऊपर बनी इमारतें निशाना बन सकती हैं। ऐसे में भूमिगत बंकर जवानों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। इस दिशा में फिलहाल एक पायलट परियोजना चल रही है। आने वाले वर्षों में ऐसे आश्रय स्थल विकसित करने की योजना है, जिनमें जमीन के ऊपर बने भवनों जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

कड़ाके की ठंड में भी तैयार रहेंगे जवान, बैरकों और वाहनों में सुधार
आईटीबीपी ने ऊंचाई वाले और बेहद ठंडे इलाकों में तैनात जवानों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए भी कई कदम उठाए हैं। कपूर ने बताया कि शून्य से नीचे तापमान वाले क्षेत्रों में मौजूद 383 बैरकों में से 342 को इंसुलेट किया जा चुका है। दूरदराज की चौकियों पर बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 141 जनरेटर खरीदे गए हैं। इसके अलावा, कई स्थानों पर सौर ऊर्जा से चलने वाले वॉटर हीटर लगाए गए हैं।

बल ने बर्फीले मौसम में वाहनों को आसानी से स्टार्ट करने के लिए 'कोल्ड स्टार्ट किट' भी उपलब्ध कराई है। साथ ही, पुराने हथियारों को बदलने और दुर्गम इलाकों में आवाजाही बेहतर बनाने के लिए नए ऑल-टेरेन वाहन, ग्राउंड व्हीकल और क्विक रिएक्शन वाहन खरीदने की दिशा में काम किया जा रहा है।

जवानों की सेहत और सुरक्षा पर भी जोर
आईटीबीपी प्रमुख ने जवानों को फिट और स्वस्थ रहने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि बल में नई डाइट योजना लागू की गई है, जिसके तहत भोजन में चीनी और तेल की अधिक मात्रा को कम किया गया है। उन्होंने बल में अल्कोहल डिपेंडेंस सिंड्रोम (ADS) के मामलों में वृद्धि पर चिंता जताई। उनके अनुसार, 2020 के बाद ऐसे मामले दोगुने या तीन गुना तक बढ़े हैं। कपूर ने जवानों को सोशल मीडिया के जरिए होने वाले 'हनी ट्रैप' से भी सतर्क रहने को कहा। उन्होंने संवेदनशील सूचनाएं अनजान लोगों के साथ साझा करने से बचने की जरूरत पर जोर दिया।


चीन सीमा पर विशेष पर्वतीय युद्ध बल बनने की तैयारी
आईटीबीपी प्रमुख ने कहा कि बल का लक्ष्य आधुनिक तकनीक, बेहतर हथियारों, विशेष प्रशिक्षण और मजबूत बुनियादी ढांचे के जरिए एक विशिष्ट उच्च पर्वतीय युद्ध बल के रूप में विकसित होना है। भारत-चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा की सुरक्षा करने वाला आईटीबीपी 1962 में स्थापित किया गया था। कठिन पहाड़ी परिस्थितियों में तैनात रहने वाले इस बल के लिए ड्रोन, एंटी-ड्रोन तकनीक, सुरक्षित आश्रय स्थलों और आधुनिक वाहनों पर निवेश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed