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FMCG: 2025 में भी आम आदमी को महंगाई से नहीं मिलेगी राहत! क्यों महंगा होने जा रहे ब्यूटी प्रोडक्ट्स?
Wed, 01 Jan 2025 06:54 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Wed, 01 Jan 2025 06:54 PM IST
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घरेलू सामनों की कीमतों में होगा इजाफा
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अमर उजाला
विस्तार
साल 2025 में भी आम आदमी को महंगाई से राहत मिलती हुई नजर नहीं आ रही है। गेहूं-आटा समेत सब्जियों के बाद अब चाय, साबुन से लेकर स्किन क्रीम तक 5 से 20 फीसदी तक महंगे हो सकते है। दरअसल, एफएमसीजी कंपनियों ने सीमा शुल्क की भरपाई करने और लागत में बढ़ोतरी होने के चलते उत्पादों के रेट बढ़ाना शुरु कर दिए है।इन दाम के बढ़ने के पीछे की सबसे बड़ी वजह पाय आयल को माना जा रहा है। क्योंकि खाद्य तेलों समेत कई उत्पादों में पाम ऑयल के इस्तेमाल होता है। इसकी बढ़ती कीमतें देश की महंगाई पर भी गहरा असर डालती हैं। सरकार ने सितंबर 2024 में आयात शुल्क में 22 फीसदी की बढ़ोत्तरी की थी। ऐसे पूरे साल में करीब 40 फीसदी की बढोत्तरी ने कंपनियों की उत्पादन लागत को बढ़ा दिया है। पाम ऑयल केवल खाद्य तेलों तक सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल कुकिंग ऑयल, बेकरी प्रोडक्ट्स और प्रोसेस्ड फूड जैसे खाद्य उत्पादों साबुन, शैंपू और ब्यूटी प्रोडक्ट्स जैसे कॉस्मेटिक्स-पर्सनल केयर और बायोडीजल उत्पादन में भी होता है।
जानकारों का कहना है कि, जब भी पाम आयल के दाम बढ़ते है तो इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर दिखाई देता है। क्योंकि पाम ऑयल के दाम में बढ़ोतरी होने से हर तरह के खाने के तेल महंगे हो जाएंगे। खाने का तेल बनाने के लिए पाम ऑयल का इस्तेमाल अधिकता से होता है। इसी तरह खाने-पीने के और भी सामान जैसे कि बिस्कुट, नूडल्स आदि भी महंगे हो जाएंगे। पाम ऑयल के महंगा होने से इन सभी चीजों के दाम एक बार फिर बढ़ सकते हैं जैसा कि कुछ महीने पहले देखा गया था।
पाम ऑयल को सोया तेल से कड़ी टक्कर मिलती दिखती है जिसकी मांग दुनिया के सभी देशों में अधिक बनी रहती है। बाजार में कई तरह के तेल होने के बावजूद पाम ऑयल की मांग हमेशा से ज्यादा बनी रहती है। यही वजह है कि खाने के तेल में इसके दाम समय-समय पर बढ़ते रहते हैं। वहीं, पाम ऑयल का इस्तेमाल खाने के साथ ही बायोफ्यूल में तेजी से बढ़ रहा है, जिससे आने वाले समय में इसके दाम और बढ़ सकते हैं। जानकारों का कहना है कि, पाम ऑयल की कीमतों में हो रहे उतार-चढ़ाव का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर साफ तौर पर देखा जा सकता है। इससे महंगाई बढ़ने के साथ ही ग्राहकों के खर्च और औद्योगिक लागत में भी इजाफा होता है। अगर सरकार ने इस पर सख्त कदम नहीं उठाए, तो महंगाई का ये दबाव लंबे समय तक बना रह सकता है।