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धोखाधड़ी और जानबूझकर कर्ज न लौटाने वालों के खिलाफ बैंक उठाएं कारगर कदम: जेटली

Tue, 25 Sep 2018 05:38 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 25 Sep 2018 05:38 PM IST
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FM Jaitley said that Banks should take proper action against who are returning their loan

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को धोखाधड़ी करने और जानबूझकर कर्ज नहीं लौटाने वालों के खिलाफ कारगर कदम उठाने को कहा। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ राजधानी में आयोजित एक बैठक में उनके कामकाज की समीक्षा करते हुये वित्त मंत्री ने विश्वास जताया कि अर्थव्यवस्था में लिखा-पढ़ी के साथ संगठित ढंग से कारोबार का विस्तार होने से भारत को आठ प्रतिशत की दर से आर्थिक वृद्धि पाने में मदद मिलेगी। 

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वित्त मंत्रालय द्वारा किए गए ट्वीट में कहा गया है, ‘वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बैंकों से कहा कि वह कर्ज देने का काम पूरी ईमानदारी से करें और बैंकों में पुन: जो भरोसा किया गया है उसे सही साबित करने के लिये धोखाधड़ी करने तथा जान बूझकर कर्ज नहीं लौटाने वालों के खिलाफ कारगर कार्रवाई करें। बैंकों को हर समय ऐसे संस्थान के रूप में दिखना चाहिये जो कि पूरी ईमानदारी और सूझबूझ के साथ कर्ज का वितरण करते हैं।’

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यह बैठक ऐसे समय पर हुई है जब सार्वजनिक क्षेत्र के तीन बैंकों- बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक के विलय का फैसला लिया गया है। यह फैसला वैश्विक आकार के मजबूत और बड़े बैंक बनाने के लक्ष्य के साथ किया गया है। 

बैंकों ने तेज किए कर्ज वसूली के प्रयास

वहीं बैंकों ने उनके फंसे कर्ज की वसूली के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बैंकों ने पुराने फंसे कर्ज में से 36,551 करोड़ रुपये की वसूली की है। पिछले साल की इसी तिमाही में की गई वसूली के मुकाबले यह राशि करीब 49 प्रतिशत अधिक है। पिछले वित्त वर्ष 2017- 18 में बैंकों ने कुल 74,562 करोड़ रुपये की वसूली की थई। 

मंत्रालय के एक अन्य ट्वीट के मुताबिक, जेटली ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में विभिन्न वाणिज्यिक गतिविधियों के औपचारिक तंत्र के तहत आने और बड़े पैमाने पर वित्तीय समावेश होने से देश में खरीद क्षमता बढ़ी है। इससे भारत की वृद्धि गति तेज होगी। 

बता दें कि जेटली वित्त मंत्री के साथ कारर्पोरेट कार्य मंत्रालय का प्रभार भी संभाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता (आईबीसी), माल एवं सेवाकर (जीएसटी), नोटबंदी और डिजिटल भुगतान जैसे कदमों के जरिए अर्थव्यवस्था को औपचारिक तंत्र में लाने से वित्तीय क्षमता और जोखिम का बेहतर आकलन करने में मदद मिली है।

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