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Weather Conditions: बाढ़-आपदाओं से दक्षिण एशिया में तबाही, जून से अब तक 3,800 मौतें; छह करोड़ लोग प्रभावित
Wed, 15 Oct 2025 04:22 AM IST
शिव शुक्ला
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शिव शुक्ला
Updated Wed, 15 Oct 2025 04:22 AM IST
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बाढ़।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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साल 2025 का मानसून दक्षिण एशिया के लिए बड़ी चेतावनी बनकर आया है। भारत, बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान में जून से अब तक बाढ़-भूस्खलन के कारण 3,800 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 6 करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। करोड़ों घर जलमग्न हुए, फसलें नष्ट हो गईं और सड़क, बिजली ढांचों की तबाही हुई। एशियाई आपदा तैयारी केंद्र (एडीपीसी) की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि मानवजनित जलवायु परिवर्तन, अनियोजित शहरीकरण और कमजोर आपदा तैयारी का मिला-जुला परिणाम है।
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भारतीय उपमहाद्वीप में इस साल अब तक 2000 से अधिक मौतें बाढ़, भूस्खलन और बिजली गिरने से हुई हैं। असम, महाराष्ट्र, बिहार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश सर्वाधिक प्रभावित रहे। 15 राज्यों में औसतन वर्षा सामान्य से 22% अधिक रही। फसलों और संपत्तियों की कुल क्षति 1.4 लाख करोड़ आंकी गई है। बांग्लादेश में बाढ़ से लगभग 1.8 करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं। देश के 25% क्षेत्रफल पर जलभराव है और 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। नेपाल में लगातार बादल फटने और भूस्खलन में 400 से अधिक मौतें हुई हैं। हिमालयी क्षेत्र में बर्फ के पिघलने की दर में 23% वृद्धि देखी गई है, जो ग्लेशियर जनित बाढ़ का खतरा बढ़ा रही है। पाकिस्तान में फिर से 2022 जैसी आपदा की पुनरावृत्ति हुई है।
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आर्थिक असर : विकास पर वार
संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय के अनुसार, दक्षिण एशिया में इस मानसून के कारण अब तक कुल आर्थिक क्षति 24 अरब डॉलर के पार है। 2019 से 2023 के बीच केवल 2% विकास परियोजनाएं ही डीआरआर घटक को शामिल कर सकीं। आज की आपदाएं प्राकृतिक नहीं, बल्कि नीतिगत विफलताओं का नतीजा हैं। इनमें अंधाधुंध निर्माण, तटबंधों पर अतिक्रमण, वनों की कटाई शामिल है।
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आपदाएं रोकी नहीं जा सकतीं असर घटाया जा सकता है
रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण एशिया का यह मानसून वर्तमान की आपदा है। अगर सरकारें निजी क्षेत्र और समाज जोखिम-आधारित विकास नीतियों को तुरंत लागू नहीं करेंगी तो आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र और भी विनाशकारी बाढ़ों और सूखों का शिकार होगा। आपदाएं रोकना असंभव है, लेकिन उनसे होने वाला नुकसान कम करना पूरी तरह संभव है, बशर्ते हम आज तैयारी करें।