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निरस्त किए आधार कानून के पांच प्रावधान

Thu, 27 Sep 2018 02:32 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 27 Sep 2018 02:32 AM IST
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Five Provisions of Abolished Adhar card Law
आधार - फोटो : IA
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर किसी व्यक्ति की निजी जानकारी हासिल करने की अनुमति देने से जुड़े प्रावधान समेत आधार कानून के पांच प्रावधानों को निरस्त कर दिया। पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने आधार कानून की धारा-33 (2) को निरस्त किया। इसके तहत सरकारी एजेंसियां राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए किसी व्यक्ति की बायोमैट्रिक और डेमोग्राफिक जानकारी हासिल कर सकती थीं।
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हालांकि, पीठ ने कहा कि देश की सुरक्षा को खतरे की स्थिति में संयुक्त सचिव से उच्चस्तर के अधिकारी को जानकारी हासिल करने का अधिकार दिया जाना चाहिए। इस जानकारी के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक न्यायिक अधिकारी को भी जोड़ा जा सकता है। इसके अलावा पीठ ने आधार नियमन-27 (1) को निरस्त कर दिया। यह नियमन यूआईडीएआई को सत्यापन रिकॉर्ड को पांच साल तक सुरक्षित रखने का अधिकार देता है।
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पीठ ने कहा कि कोई भी निजी कंपनी और यहां तक कि यूआईडीएआई भी सत्यापन रिकॉर्ड को छह माह से ज्यादा समय तक अपने पास नहीं रख सकता। लेनदेन के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने से जुड़े प्रावधान को निरस्त करते हुए पीठ ने संशोधन की जरूरत बताई। धारा-33 (1) को निरस्त करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति की जानकारी सार्वजनिक की जा रही है उसे सुनवाई का एक मौका दिया जाना चाहिए। प्रावधान के तहत जिला जज के आदेश पर व्यक्ति की जानकारी सार्वजनिक की जा सकती है। 
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इसके अलावा धारा-47 और 57 को भी निरस्त कर दिया गया। आधार कानून के अलावा पीठ ने मनी लॉन्ड्रिंग कानून के उस प्रावधान को भी निरस्त कर दिया, जिसके तहत बैंक खाते को आधार से लिंक करना अनिवार्य था।  
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