मोदी ने अपनी टीम से पांच को किया आउट, जानिए क्या रही वजह?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रधानमंत्री मोदी के दूसरे मंत्रिमंडल विस्तार में जहां 19 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई वहीं पांच चेहरे ऐसे भी रहे जिनकी मंत्रिमंडल से छुट्टी कर दी गई। इनमें से कुछ नाम तो ऐसे हैं जिन्हें उनकी खराब परफारमेंस का खामियाजा भुगतना पड़ा, कुछ को संगठन में जाने के लिए अपने मंत्री पद को कुर्बान करना पड़ा। वहीं कुछ नाम ऐसे भी रहे जिन्हें इस बार बहुत नजदीकी अंतर से जीवनदान मिल गया।
प्रधानमंत्री मोदी का यह मंत्रिमंडल विस्तार लंबे समय से टलता आ रहा था। इसकी बड़ी वजह यही मानी जा रही थी कि प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष इस विस्तार में तमाम समीकरणों और संतुलनों को साधने की कवायद में थे। क्योंकि अगले साल कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं ऐसे में उससे पहले राज्यों और जातियों को केंद्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व देने का भाजपा और केंद्र सरकार के पास यह अंतिम मौका था इसलिए विस्तार लंबे समय तक टलता रहा।
असल में केंद्र में एनडीए सरकार के दो साल पूरे होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी के सामने सवालों का सिलसिला शुरू हो चुका है। इस वजह से प्रधानमंत्री मोदी अपने मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा भी करना चाहते थे, जिससे काम न करने वाले चेहरों को बाहर किया जा सके और योग्य चेहरों को तरक्की दी जा सके। समीक्षा हुई तो कई मंत्रियों के कामकाज पर उंगली उठने लगी तो कुछ के बड़बोलेपन को लेकर भी चर्चा हुई, वहीं कुछ की बढ़ती उम्र का भी हवाला दिया गया।
पांच की छुट्टी तो कई को मिल गया जीवनदान
ऐसे में उम्मीद की जा रही थी कि जिस तरह पीएम मंत्रिमंडल में बड़ी संख्या में नए चेहरों को जगह देंगे वहीं पुरानों को बाहर भी किया जा सकता है। हालांकि मंगलवार को मंत्रिमंडल विस्तार के बाद यह गाज मात्र पांच मंत्रियों पर ही गिरी।
जिनमें यूपी के आगरा से सांसद और मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री प्रो रामशंकर कठेरिया, राजस्थान के श्रीगंगानगर से सांसद निहाल चंद, राजस्थान से ही सांवर लाल जाट, गुजरात के भरूच से सांसद मनसुख भाई वसावा और एमके कुंदरिया शामिल हैं।
बताया जाता है कि रामशंकर कठेरिया को तो भाजपा संगठन में लाने के लिए मंत्रीपद से अलग किया गया लेकिन बाकी लोगों की कुछ न कुछ खामियां उनके आड़े आ गई। मसलन गंगानगर के सांसद निहाल चंद पर लंबे समय से बलात्कार के आरोप लगे हुए थे जिनको लेकर विपक्ष कई बार मोदी सरकार को निशाना साध चुका था।
इसके अलावा सांवर लाल जाट, मनसुख भाई वसावा और एमके कुंदरिया को उनकी खराब परफारमेंस के चलते कैबिनेट से रुखसत होने को मजबूर होना पड़ा। पांचों मंत्रियों ने मंत्रिमंडल विस्तार से पूर्व अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके अलावा बिहार के गिरिराज सिंह और यूपी से साध्वी निरंजन ज्योति जैसे मंत्रियों को जीवनदान मिल गया जो लगातार अपनी बयानबाजी से सरकार के लिए मुसीबत का सबब बनते रहे हैं। वहीं बढ़ती उम्र के चलते नजमा हेपतुल्ला और कलराज मिश्र जैसे मंत्रियों पर लटक रही तलवार भी फिलहाल टल गई।